ताम्बरम विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 31) चेन्नई महानगरीय क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से में स्थित एक प्रमुख उपनगरीय सीट है. यह क्षेत्र ताम्बरम शहर के आसपास केंद्रित है, जो पहले एक पारंपरिक कस्बा था. लेकिन अब तेजी से विकसित होकर एक घना शहरी केंद्र बन चुका है, जहां आवासीय और व्यावसायिक विस्तार बहुत तेजी से हुआ है. इस विधानसभा क्षेत्र में ताम्बरम ईस्ट, ताम्बरम वेस्ट और आसपास के कई इलाके शामिल हैं. यहां बड़ी संख्या में आईटी कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी, मध्यम वर्गीय परिवार और कामकाजी पेशेवर रहते हैं. चेन्नई के नजदीक होने के कारण यह इलाका एक महत्वपूर्ण आवासीय और ट्रांजिट हब बन गया है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से यह क्षेत्र मुख्य रूप से शहरी, मध्यम वर्ग और कामकाजी लोगों का है. यहां समाज की बनावट में ब्राह्मण, मुदलियार, नायडू, अनुसूचित जाति के लोग और बाहर से आए पेशेवर (माइग्रेंट) शामिल हैं. यहां रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA), नागरिक समूह और शहरी मतदाता राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाते हैं. चुनावी अभियानों में आमतौर पर बुनियादी ढांचा, बेहतर प्रशासन और शहर में जीवन की गुणवत्ता जैसे मुद्दों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है.
भौगोलिक स्थिति और कनेक्टिविटी के लिहाज से ताम्बरम काफी महत्वपूर्ण है. यह चेन्नई सबअर्बन रेलवे नेटवर्क के साथ स्थित है, जिससे यह एक बड़ा ट्रांजिट केंद्र बनता है. इसके अलावा ग्रैंड सदर्न ट्रंक रोड (GST रोड) के जरिए यह केंद्रीय चेन्नई और दक्षिणी जिलों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. चेन्नई इंटरनेशनल एयरपोर्ट भी यहां से काफी नजदीक है. इस क्षेत्र में शहरी वातावरण देखने को मिलता है, जिसमें रिहायशी कॉलोनियां, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स, शैक्षणिक संस्थान और पास में आईटी कॉरिडोर मौजूद हैं. उपनगरीय विस्तार के कारण यहां रियल एस्टेट का तेजी से विकास हो रहा है.
इस क्षेत्र के प्रमुख स्थानों में ताम्बरम ईस्ट और वेस्ट शामिल हैं, जो घनी आबादी वाले आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्र हैं. यहां के प्रमुख धार्मिक स्थलों में ओम श्री स्कंदाश्रमम, अरुलमिगु कडपेरी वक्र काली अम्मन मंदिर और ऐतिहासिक श्री सुंदरवरथराजा पेरुमल मंदिर शामिल हैं. इसके अलावा आईटी कर्मचारियों के लिए बने रिहायशी क्लस्टर और गेटेड कम्युनिटीज, बाजार और शॉपिंग क्षेत्र, तथा बाहरी उपनगरीय इलाके जो तेजी से विकसित हो रहे हैं, भी इस क्षेत्र का हिस्सा हैं.
मुख्य समस्याओं की बात करें तो यहां ट्रैफिक जाम और परिवहन व्यवस्था एक बड़ी चुनौती है. इसके अलावा पीने के पानी की सप्लाई, सीवेज मैनेजमेंट, ठोस कचरा प्रबंधन और शहरी साफ-सफाई भी अहम मुद्दे हैं. मानसून के समय बाढ़ से बचाव, आवास और रियल एस्टेट का नियमन तथा नागरिक सुविधाओं की उपलब्धता भी लोगों की प्रमुख चिंताएं हैं.
मतदाताओं के मूड को देखें तो यहां का मध्यम वर्ग बुनियादी ढांचे, अच्छे प्रशासन और बेहतर जीवन स्तर को प्राथमिकता देता है. रोजाना आने-जाने वाले लोग बेहतर परिवहन और कनेक्टिविटी चाहते हैं. स्थानीय निवासी पानी की आपूर्ति, ड्रेनेज और बाढ़ नियंत्रण पर ध्यान देते हैं. वहीं युवा और पेशेवर बेहतर शहरी योजना और रोजगार के अवसरों की मांग करते हैं. कुल मिलाकर यहां मतदान का रुझान जाति के बजाय सरकार के कामकाज और प्रदर्शन पर ज्यादा निर्भर करता है.
Chinnaiyah.t.k.m
ADMK
Elango.siva
MNM
Sureshkumar.t
NTK
Karikalan.m
AMMKMNKZ
Nota
NOTA
Abdulnazar P A
TNLK
Harikrishnan.r
BSP
Laksmanan N.
IND
Sigamani S
IND
Krishna T V N H S R.
IND
Kamatchi U.
AMAK
Sivaraman.s
IND
Rathinakumar R.
IND
Anand Prabhu B.
IND
Kannairam.b
IND
Manojkumar A.
SHS
Venkatesan.c
VTVTK
Venkatesan Balaji B.
IND
Justin Charles.p
RPPRINAT
Ramu A
NDPOSI
Thangaraj V.
IND
Balakrishnan G.
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.