तिरुवल्लूर जिले (निर्वाचन क्षेत्र संख्या 1) में स्थित गुम्मिडीपूंडी, तमिलनाडु के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सीमावर्ती निर्वाचन क्षेत्रों में से एक है. राज्य के उत्तरी प्रवेश द्वार पर स्थित, यह कृषि आधार को बढ़ते औद्योगिक विकास के साथ जोड़ता है. कभी यह एक बड़ा ग्रामीण इलाका था जो झीलों, धान के खेतों और पारंपरिक बस्तियों के लिए जाना जाता था, लेकिन पिछले दो दशकों में यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजमार्गों, विनिर्माण समूहों और सीमा पार आर्थिक गतिविधियों से एक प्रमुख औद्योगिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ है.
राजनीतिक रूप से, गुम्मिडीपूंडी का महत्व आंध्र प्रदेश के साथ इसकी सीमा के कारण है, जो मतदाताओं के व्यवहार, व्यापार प्रवाह और प्रवासी श्रमिकों के पैटर्न को प्रभावित करता है. इसका सामाजिक-आर्थिक मिश्रण - किसानों से लेकर औद्योगिक श्रमिकों तक - एक विशिष्ट चुनावी प्रोफाइल बनाता है जहां विकास, आजीविका और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समान महत्व है.
भौगोलिक रूप से, यह निर्वाचन क्षेत्र समतल उत्तरी मैदानों में फैला हुआ है, जिसके बीच में कालीवेली झील, सिंचाई टैंक और मानसून चक्र पर निर्भर सूखे इलाके हैं. चेन्नई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग (NH16) इसके केंद्र से होकर गुजरता है, जो गुम्मिडीपूंडी को एक प्रमुख औद्योगिक गलियारे के रूप में स्थापित करता है. SIPCOT औद्योगिक परिसर, जिसमें सैकड़ों विनिर्माण इकाइयां हैं, रोजगार प्रदान करता है और पूरे क्षेत्र में यात्रियों की आवाजाही को आकार देता है.
इस निर्वाचन क्षेत्र में गुम्मिडीपूंडी शहर, पंजेट्टी, शोलावरम, करणोदाई बेल्ट, पूंडी और औद्योगिक क्षेत्रों के पास कई बढ़ती हुई पंचायतें शामिल हैं. कृषि क्षेत्र अपना पारंपरिक चरित्र बनाए हुए हैं, जबकि औद्योगिक क्षेत्रों में तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के श्रमिक रहते हैं, जिससे जनसांख्यिकीय विविधता बढ़ती है. परिवहन नेटवर्क, ECR लिंक सड़कें, और चेन्नई के उत्तरी उपनगरों से निकटता गुम्मिडीपूंडी को ग्रामीण और औद्योगिक तमिलनाडु के बीच एक संक्रमण क्षेत्र के रूप में स्थापित करती है.
इस क्षेत्र में स्थिती मुख्य स्थानों की बात करें तो SIPCOT इंडस्ट्रियल कॉम्प्लेक्स, करनोडाई चेकपोस्ट, पूंडी जलाशय क्षेत्र, पंजेट्टी जंक्शन, गुम्मिडीपूंडी बाजार, मनाली-पुलिकट सड़क का हिस्सा और प्रमुख ट्रक टर्मिनल और लॉजिस्टिक्स हब शामिल है.
यहां के निवासी के कुछ मौलिक मुद्दे भी हैं जिनमें औद्योगिक प्रदूषण, ग्रामीण इलाकों में पानी की कमी, पंचायतों के अंदर सड़कों का खराब रखरखाव, NH16 पर दुर्घटना संभावित हिस्से, सरकारी अस्पतालों की कमी, बेहतर पीने के पानी की पाइपलाइनों की जरूरत, झीलों और तालाबों से गाद निकालने का धीमा काम शामिल हैं.
निर्वाचन क्षेत्र बात करें तो यह अर्ध-शहरी और ग्रामीण मिश्रित सीट है. बड़ी आबादी औद्योगिक श्रमिक हैं. प्रवासी श्रमिक स्थानीय अर्थव्यवस्था को आकार दे रहे हैं. मतदाता आजीविका, सुरक्षा और परिवहन को प्राथमिकता देते हैं. किसान सिंचाई सुरक्षा और उचित फसल समर्थन की उम्मीद करते हैं.
कुल मिलाकर यह एक अर्ध-शहरी, औद्योगिक निर्वाचन क्षेत्र है जहां लगातार प्रदर्शन मतदाता समर्थन जीतने में निर्णायक भूमिका निभाता है.
Prakash M
PMK
Usha
NTK
Dilliy K.m
DMDK
Nota
NOTA
Nagaraj S
BSP
Saravanan V
IJK
Saravanan E
IND
Devanathan R
IND
Lakshmi R
IND
Prakash K
IND
Gowtham J
AMAK
Prakash M
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
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