थाउजेंड लाइट्स तमिलनाडु की विधानसभा का एक बेहद महत्वपूर्ण और घनी आबादी वाला शहरी क्षेत्र है. यह विधानसभा क्षेत्र नंबर 20 है और चेन्नई के मध्य हिस्से में स्थित है. यह इलाका रिहायशी और व्यावसायिक गतिविधियों का मिश्रण है, जहां अल्पसंख्यक समुदाय की अच्छी खासी आबादी रहती है और आसपास बड़े व्यापारिक, शैक्षणिक व संस्थागत केंद्र मौजूद हैं. इस सीट का राजनीतिक इतिहास भी काफी समृद्ध रहा है. वर्तमान मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन चार बार इसी थाउजेंड लाइट्स सीट से विधायक चुने गए थे, बाद में वे कोलाथूर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने लगे. इसके अलावा, पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि का भी इस क्षेत्र से खास जुड़ाव रहा है, क्योंकि वे गोपालपुरम में रहते हुए इसी थाउजेंड लाइट्स विधानसभा क्षेत्र में मतदान किया करते थे, जिससे डीएमके की राजनीति में इस इलाके का महत्व और बढ़ जाता है.
यह इलाका मुख्य रूप से अन्ना सलाई और उसके आसपास के मोहल्लों में फैला हुआ है, जहां पुराने रिहायशी इलाके, बड़े दफ्तर, अस्पताल, मस्जिदें, स्कूल और ऊंची-ऊंची आवासीय इमारतें एक साथ मौजूद हैं. इसी वजह से यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहां प्रशासनिक कामकाज ज्यादा चुनौतीपूर्ण होता है और मीडिया की नजर भी हमेशा बनी रहती है. यह सिर्फ एक सामान्य रिहायशी इलाका नहीं है, बल्कि यहां की राजनीति अल्पसंख्यकों की सुरक्षा, रहने की सुविधाओं की गुणवत्ता, ट्रैफिक जाम, नागरिक सुविधाओं पर दबाव और सरकारी सेवाओं तक लोगों की पहुंच जैसे मुद्दों से तय होती है.
सामाजिक रूप से यहां की आबादी काफी विविध है. बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता हैं, साथ ही हिंदू और ईसाई समुदाय भी रहते हैं. यहां पुराने निवासी परिवार, प्रोफेशनल लोग, व्यापारी, अस्पतालों में काम करने वाले कर्मचारी, बाहर से आए प्रवासी और असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूर भी शामिल हैं. वोटिंग का रुझान अल्पसंख्यकों के भरोसे, सरकारी योजनाओं के सही क्रियान्वयन, स्थानीय प्रशासन के कामकाज और नेतृत्व की विश्वसनीयता पर निर्भर करता है. मस्जिदों की समितियां, व्यापार मंडल, रेज़िडेंट वेलफेयर एसोसिएशन और वार्ड स्तर के नेता यहां राजनीतिक माहौल बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक दृष्टि से यह इलाका अन्ना सलाई के किनारे स्थित है और मेट्रो व बस जैसी सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. बड़े अस्पताल और व्यावसायिक केंद्र भी पास में हैं. इसके बावजूद भारी ट्रैफिक, पार्किंग की कमी, अंदरूनी सड़कों का संकरा होना और पैदल चलने वालों की भीड़ के कारण यातायात और सड़क सुरक्षा पर लगातार दबाव बना रहता है.
यहां के मुख्य स्थानीय मुद्दों में ट्रैफिक जाम और पार्किंग की समस्या, बरसात में जलभराव और ड्रेनेज की खराब स्थिति, पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति, कचरा प्रबंधन की कमियां, प्रदूषण और सार्वजनिक सुरक्षा की चिंताएं, साथ ही अस्पतालों और अन्य बुनियादी सेवाओं पर बढ़ता बोझ शामिल हैं.
थाउजेंड लाइट्स एक ऐसा शहरी और घनी आबादी वाला विधानसभा क्षेत्र है, जहां मतदाता प्रशासनिक कामकाज और प्रदर्शन को बहुत महत्व देते हैं. यहां के लोग ऐसे प्रतिनिधि को पसंद करते हैं जो कुशल प्रशासन चलाने वाला हो, सभी समुदायों को साथ लेकर चलने वाला हो, किसी भी संकट में तुरंत सक्रिय दिखाई दे और रोजमर्रा की नागरिक समस्याओं के समाधान में ठोस और दिखाई देने वाला सुधार ला सके.
Kushboo Sundar
BJP
K M Shariff
MNM
Sherine Aj
NTK
Nota
NOTA
Vaidhyanathan N
AMMKMNKZ
Williams D
BSP
Radha Krishnan S
IND
Manivannan N
IND
Parthiban V
IND
Domnic A
NINIK
Sudakar R
IND
Sanjeevi S
IND
Babu A
IND
A George Benny
IND
Nirmal Kumar S
IND
Riaz(a) Syed Zakeerulla
AMAK
P Parimala
IND
Velraj S
IND
Deeban M
IND
Sekar K
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2029 के आम चुनाव से महिला आरक्षण कानून लागू करना चाहते हैं, और उसके लिए संसद के विशेष सत्र में संशोधन विधेयक लाए जा रहे हैं. एक विधेयक परिसीमन को लेकर है, जिसका विपक्षी दल खासकर दक्षिण भारत के नेता कड़ा विरोध कर रहे हैं - क्या बीजेपी ने कोई जोखिम भरा कदम बढ़ाया है?
तमिलनाडु के चुनावी रण में एडप्पादी पलानीस्वामी के लिए 2026 की यह जंग उनके राजनीतिक अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा साबित होने वाली है. ईपीएस अपनी 'स्ट्रॉन्गमैन' छवि और एनडीए के साथ के भरोसे जयललिता की विरासत को अपने नाम करने की कोशिश कर रहे हैं.