हार्बर विधानसभा क्षेत्र संख्या 18 है. यह उत्तर चेन्नई का एक घनी आबादी वाला तटीय-शहरी क्षेत्र है. इसकी पहचान चेन्नई बंदरगाह और उससे जुड़ी आर्थिक गतिविधियों से बनी है. यहां बंदरगाह पर काम करने वाले मजदूर, माल ढुलाई, मछली पकड़ने से जुड़े व्यवसाय और असंगठित क्षेत्र की आजीविकाएं बड़ी संख्या में मौजूद हैं. यह इलाका समुद्री व्यापार और अत्यधिक जनसंख्या घनत्व का मेल है, जहां एक ओर आर्थिक महत्व है तो दूसरी ओर बुनियादी सुविधाओं का भारी दबाव भी है.
इस क्षेत्र का राजनीतिक इतिहास भी काफी मजबूत रहा है. तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि 1989 और 1991 में यहीं से विधायक चुने गए थे. वरिष्ठ डीएमके नेता के. अन्बझगन भी दो बार इसी सीट से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. इससे हार्बर सीट का राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक महत्व साफ झलकता है.
हार्बर केवल एक रिहायशी इलाका नहीं है, बल्कि यहां की राजनीति रोजगार की सुरक्षा, मकान की स्थिरता, प्राकृतिक आपदाओं से बचाव और बुनियादी नागरिक सुविधाओं पर केंद्रित रहती है. खासकर बंदरगाह और समुद्र से जुड़े समुदायों के लिए ये मुद्दे बेहद अहम होते हैं.
सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से यहां का मतदाता वर्ग मुख्य रूप से कामकाजी तबके का है. इसमें बंदरगाह और गोदी के मजदूर, ठेका कर्मी, मछुआरे, परिवहन से जुड़े कर्मचारी, छोटे व्यापारी, प्रवासी मजदूर और लंबे समय से बसे शहरी गरीब परिवार शामिल हैं. लोगों की नौकरी, समुदाय और सरकारी योजनाओं तक पहुंच उनके मतदान व्यवहार को काफी प्रभावित करती है. ट्रेड यूनियन, गोदी मजदूर संघ, मछुआरा संगठन, मस्जिद और चर्च की समितियां तथा वार्ड स्तर के नेता लोगों को संगठित करने में अहम भूमिका निभाते हैं.
भौगोलिक रूप से यह इलाका बंदरगाह के आसपास के क्षेत्र, समुद्री तट, रेलवे लाइनें, गोदाम और बेहद घनी बस्तियों से मिलकर बना है. सड़क और रेल संपर्क अच्छा है, लेकिन भारी मालवाहक गाड़ियों की आवाजाही से जाम और दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है. समुद्र के पास और निचले इलाकों में हर साल मानसून के दौरान जलभराव और चक्रवात का खतरा भी रहता है.
यहां की प्रमुख समस्याओं में असुरक्षित और जर्जर मकान, समुद्री बाढ़, तूफान और पानी भरने की दिक्कतें, बंदरगाह और माल ढुलाई से होने वाला प्रदूषण, साफ-सफाई और कचरा प्रबंधन की कमी, पीने के पानी की अनियमित आपूर्ति, ट्रैफिक जाम, भारी वाहनों से होने वाले हादसे, और सरकारी अस्पतालों पर बढ़ता दबाव शामिल हैं.
मतदाताओं का मूड ऐसा रहता है कि वे उन्हीं जनप्रतिनिधियों को पसंद करते हैं जो संकट के समय मैदान में दिखाई दें, रोज़मर्रा की समस्याओं पर तुरंत कार्रवाई करें और लोगों को राहत, मुआवजा व सरकारी सुविधाएं दिलाने में सक्रिय भूमिका निभाएं.
Vinoj. P. Selvam
BJP
Ramesh. A
MNM
Ahamed Fazil. M
NTK
Nota
NOTA
Santhana Krishnan. P
AMMKMNKZ
Ravikumar. C
BSP
Selvam. P
IND
Vivek Ram. A
IND
Suresh. R
IND
Ganesh. S
IND
Selvaraj. S
IND
Kamal. J
IND
Sivaraman. G
IND
Shankar. A
IND
Selvakumar. R
IND
Ramki. P
IND
Pugalenthi. P
IND
Udhayakumar. V
IND
Srinivasan. P
IND
Krishnakumar. G
IND
Anandraj. T.k
IND
Damodharan. A.g
IND
Zionraj. M
IND
Chandran. R
IND
Ramesh. D
IND
Raghunath. K
IND
Nagaraj. S
IND
Mahalingam. D
IND
तीन भाषा फॉर्मूले को लेकर एक बार फिर से केंद्र और तमिलनाडु के बीच गतिरोध सामने आया है. मुख्यमंत्री एमके स्टालिन इन इस नीति पर एक बार फिर से सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि हिंदी थोपने की कोशिश की जा रही है. इसे एकतरफा नीति बताया है. वहीं, केंद्र की ओर से भी इस पर प्रतिक्रिया आई है. शिक्षा मंत्री ने जवाब दिया है.
तमिलनाडु चुनावों के लिए बीजेपी ने 27 उम्मीदवारों की सूची जारी की, जिसमें के. अन्नामलाई का नाम नहीं था. अब अन्नामलाई ने बताया है उन्होंने खुद चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है. उन्होंने कहा कि वो अब पूरी ताकत से NDA उम्मीदवारों के लिए प्रचार करेंगे.
तमिलनाडु चुनाव को लेकर बीजेपी जोर-शोर से तैयारियों में जुट गई है. पार्टी ने उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की है. हालांकि इसमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. अन्नामलाई का नाम नहीं है. बताया जा रहा है कि सीट बंटवारे, खासकर कोयंबटूर को लेकर हुए विवाद और AIADMK के साथ तालमेल के कारण उनका नाम सूची से बाहर रखा गया.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की लिस्ट में केंद्रीय मंत्री के साथ ही पूर्व राज्यपाल का भी नाम है. पार्टी ने अपने कोटे की सभी 27 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं.
तमिलनाडु कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिकम टैगोर ने राज्य में लोकसभा चुनाव के लिए गठित चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है. सूत्रों के अनुसार, टैगोर ने ये कदम डीएमके के साथ हुए सीट बंटवारे के फॉर्मूले में कांग्रेस को कमजोर सीटें मिलने की नाराजगी के कारण उठाया है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 को मुख्यमंत्री स्टालिन 'तमिल अस्मिता' बनाम 'दिल्ली के प्रभाव' की लड़ाई बनाकर अल्पसंख्यक वोट बैंक को एकजुट करने और विपक्षी वोटों में सेंध लगाने का दांव खेल रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
AIADMK तमिलनाडु में सत्ताधारी DMK को सत्ता से बेदखल करने के लिए कई तरकीबें आजमा रही है, और उनमें आजमाया हुआ एक कारगर नुस्खा मुफ्त वाली योजना भी है. फर्क बस यही है कि डीएमके नए वादे भी कर रही है, और पुराने वादों को पूरा भी कर रही है - और AIADMK के सामने बड़ा चैलेंज यही है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय ने पेरंबूर सीट से नामांकन दाखिल किया है. उन्होंने जनता से अपील की है कि चुनाव में उनकी पार्टी TVK को समर्थन दें.