कोलाथुर, विधानसभा क्षेत्र संख्या 13, वह सीट है जहां से डीएमके अध्यक्ष और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन लगातार तीन बार 2011, 2016 और 2021 के विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं. इसी वजह से चेन्नई ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य की राजनीति में इस क्षेत्र का खास महत्व माना जाता है. कोलाथुर एक घनी आबादी वाला आवासीय-व्यावसायिक इलाका है, जो पेरंबूर, विल्लिवक्कम और माधवरम के बीच स्थित है. पहले यह क्षेत्र आंशिक रूप से औद्योगिक था, लेकिन अब तेजी से अपार्टमेंट और रिहायशी कॉलोनियों का केंद्र बन चुका है, जिससे सड़कों, पानी, सीवरेज और अन्य नागरिक सुविधाओं पर भारी दबाव पड़ा है. यह कोई पारंपरिक मजदूर बहुल इलाका नहीं है, बल्कि यहां की राजनीति शहरी सुविधाओं, बाढ़ से सुरक्षा और जीवन स्तर सुधार जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहती है.
सामाजिक और राजनीतिक रूप से कोलाथुर की आबादी काफी विविध है. यहां निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवार, निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारी, छोटे व्यापारी, असंगठित क्षेत्र के मजदूर, प्रवासी और अपार्टमेंट में रहने वाले लोग बड़ी संख्या में हैं. जाति का असर मौजूद है, लेकिन अब रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन, अपार्टमेंट संघ और गली-मोहल्लों के स्थानीय नेता राजनीतिक राय बनाने में ज्यादा प्रभावशाली हो गए हैं.
भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र घनी रिहायशी बस्तियों, अपार्टमेंट बेल्ट, बाजारों और कुछ बचे-खुचे औद्योगिक इलाकों से मिलकर बना है. आसपास के क्षेत्रों से सड़क और बस कनेक्टिविटी अच्छी है, लेकिन अंदरूनी सड़कें संकरी हैं, ट्रैफिक जाम आम समस्या है और जल निकासी की व्यवस्था कमजोर है.
यहां के मुख्य मुद्दों में मानसून के समय गंभीर जलभराव, स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज की कमी, गर्मियों में पानी की किल्लत, ट्रैफिक जाम, खराब अंदरूनी सड़कें, कचरा प्रबंधन की दिक्कतें और खुले स्थानों की कमी शामिल हैं. इसके अलावा नालों पर अतिक्रमण, पुरानी सीवर लाइनें, स्कूलों और अस्पतालों पर बढ़ता दबाव, पैदल चलने वालों की सुरक्षा, प्रदूषण और शिकायतों के समाधान में ढिलाई भी बड़ी समस्याएं हैं.
मतदाताओं का मिजाज साफ तौर पर मुद्दों और कामकाज के प्रदर्शन पर आधारित है. यहां रेजिडेंट एसोसिएशन का असर मजबूत है. परिवार बाढ़ नियंत्रण और भरोसेमंद जल आपूर्ति चाहते हैं, व्यापारी पार्किंग की समस्या का हल चाहते हैं, महिलाएं सुरक्षा और स्वच्छता पर जोर देती हैं, युवा सार्वजनिक पार्क और खेल के मैदान चाहते हैं, जबकि बुजुर्गों के लिए चलने लायक सड़कें और अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं अहम हैं.
Aadirajaram
ADMK
A.jagadish Kumar
MNM
Camilus Selva
NTK
Nota
NOTA
Mjs.jamal Mohamed Meera
BSP
J.arumugam
AMMKMNKZ
Agni Sri Ramachandran. N
IND
Suresh
TNLK
Ashok Kumar.s
NGPP
Al. Naresh Kumar
IND
Divya
IND
Vivekraj.j
tmc
L.kathiresan
IND
J.suriyamuthu
IND
Mirza Safdar Ali
IND
Malarvizhi
IND
Sathiyaseelan
IND
M.rajendran
NDPOSI
Rama Devi
IND
C.jeevakumar
IND
D.sureshbabu
DMSK
K.elumalai
VTVTK
D.nilamani
IND
K. Pannerselvam
IND
S.sureshkumar
MKat
A.seetha
BHUDRP
G.velmurugan
SHS
P.senthil Kumar
IND
P.harishkumar
IND
Devikarani
IND
M.a.s. Senthil Kumar
IND
R.selvam
IND
E.rajendran
AMGRDMK
Nirmala Devi
IND
V.sureshkumar
IND
B.vijaya Kumar
IND
कमल हासन, जिन्हें लोग ‘उलगनायगन’ कहते हैं, ने अपने अभियान के जरिए साफ कर दिया कि यह चुनाव सिर्फ तमिलनाडु का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है. उन्होंने परिसीमन के मुद्दे को केंद्र में रखते हुए मुख्यमंत्री स्टालिन के रुख का समर्थन किया.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु में लोकसभा में महिला आरक्षण बिल का संशोधन पारित न होने पर निराशा जाहिर करते दिखे. उन्होंने कांग्रेस और डीएमके को बिल न पारित होने का जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि ये लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और बीजेपी और एनडीए महिलाओं के अधिकारों के लिए संघर्ष जारी रखेंगे.
Assembly Election Updates: असम, केरल और पुडुचेरी में चुनाव के बाद अब पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हैं. पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे. जबकि तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग होगी. बंगाल में चुनावी पारा चढ़ने के बीच ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (TMC) को झटका लगा है. बंगाल के अल्पसंख्यक बहुल मुर्शिदाबाद जिले की जलांगी विधानसभा सीट से TMC विधायक अब्दुर रज्जाक ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने का ऐलान किया है.
डीएमके ने काले झंडे लहराकर और परिसीमन विधेयक की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया.16 अप्रैल को डीएमके की बैठकों में ‘काला रंग’ छाया रहा.
स्टालिन की डीएमके ने इस मुद्दे को 'नॉर्थ बनाम साउथ' के रूप में पेश करना शुरू कर दिया है. पार्टी का कहना है कि परिसीमन पर केंद्र सरकार का फैसला क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व को कमजोर कर सकता है.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने केंद्र सरकार के परिसीमन बिल के खिलाफ कड़ा विरोध जताया है. उन्होंने नामक्कल में चुनाव प्रचार के दौरान बिल की प्रति जलाई और काला झंडा दिखाया. स्टालिन ने इसे तमिलों के खिलाफ फासीवादी कदम बताया और पूरे द्रविड़ क्षेत्र में आंदोलन फैलाने की चेतावनी दी. डीएमके नेताओं ने कहा कि ये बिल दक्षिण भारत के राजनीतिक अधिकारों को कमजोर करेगा और उत्तर भारत के वर्चस्व को बढ़ाएगा.
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने वोटिंग से हफ्ता भर पहले परिसीमन का मुद्दा लपक लिया है. डीएमके की कैंपेन स्ट्रैटेजी बदल कर परिसीमन पर फोकस हो गई है, और काले झंडे के साथ विरोध प्रदर्शन हो रहा है. AIADMK को बचाव की मुद्रा में आना पड़ा है, जबकि टीवीके नेता विजय परिसीमन का जोरदार विरोध कर रहे हैं.
चेन्नई के टी नगर में जब विजय का रोड शो निकला, तो सड़कों का नजारा देखने लायक था. समर्थकों की भारी भीड़ और जबरदस्त उत्साह के बीच पूरा माहौल किसी फिल्मी सीन जैसा लग रहा था. विजय ने टी नगर में घूम-घूमकर प्रचार किया. इस सीट से उनके सबसे करीबी साथी आनंद चुनाव लड़ रहे हैं, जहां मुकाबला काफी कड़ा माना जा रहा है.
तमिलनाडु में अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके और सत्तारूढ़ डीएमके आमने-सामने हैं. टीवीके की रैली में पुलिस व्यवस्था को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को और तीखा बना दिया है. करूर भगदड़ का जिक्र करते हुए टीवीके ने सरकार पर साजिश के आरोप लगाए हैं.
तमिलनाडु चुनाव के लिए मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने अपने 'महा-महा' गठबंधन का पूरा फॉर्मूला फाइनल कर लिया है. इसके तहत DMK 164 सीटों पर खुद चुनाव लड़ेगी, जबकि 70 सीटें कांग्रेस और अन्य सहयोगियों को दी गई हैं. खुद स्टालिन अपनी पारंपरिक सीट कोलाथुर से मैदान में उतरेंगे. खास बात यह है कि इस बार स्टालिन ने 18 महिलाओं और 60 नए चेहरों के साथ-साथ डॉक्टर, इंजीनियर और वकीलों जैसे पढ़े-लिखे उम्मीदवारों पर बड़ा दांव लगाया है.