मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने कोलकाता में मोर्चा खोल दिया है. पार्टी ने मंगलवार को शहर राजाबाजार इलाके में जोरदार प्रदर्शन किया.
पार्टी कार्यकर्ता पहले राजाबाजार से पार्क सर्कस तक मार्च निकालने वाले थे. लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया और कहा कि इस कार्यक्रम के लिए कोई अनुमति नहीं ली गई थी.
इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने राजाबाजार में ही धरना-प्रदर्शन किया. इस दौरान उन्होंने बीजेपी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की.
कुणाल घोष का दावा- पुलिस को ईमेल कर दिया था
बेलेघाटा के विधायक कुणाल घोष ने दावा किया कि मार्च का आयोजन करने वाले पार्टी के छात्र और युवा विंग ने ई-मेल के जरिए पुलिस को पहले ही सूचित कर दिया था. उन्होंने आरोप लगाया, 'लेकिन आज सुबह से ही पुलिस और केंद्रीय बल सड़क को रोक रहे हैं. जो पार्टी कार्यकर्ता यहां आना चाहते हैं, उन्हें रोका जा रहा है. हम ज्ञानेश कुमार के खिलाफ शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रहे हैं. इससे बीजेपी को दर्द हुआ है क्योंकि ज्ञानेश कुमार ने उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए वोट चोरी की है.'
हालांकि कोलकाता पुलिस कमिश्नर अजय कुमार नंद ने बताया कि अधिकारियों को रैली के बारे में कोई सूचना नहीं मिली थी. लालबाजार के पुलिस मुख्यालय में पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा, 'आप किस रैली की बात कर रहे हैं? हमारे पास किसी भी रैली की कोई सूचना या जानकारी नहीं है. मुझे देखने दीजिए.'
सीपी नंद ने कहा कि आयोजकों को एक लिखित आवेदन देना होगा और प्रस्तावित रूट, अपेक्षित भीड़ और दूसरी व्यवस्थाओं के बारे में अधिकारियों के साथ चर्चा करनी होगी. उन्होंने कहा, 'मैं सिर्फ एक पोस्टर देखकर फैसला नहीं ले सकता. हमारा नियम ये है कि अगर कोई रैली होती है, तो लोगों को अनुमति के लिए लिखित रूप में आवेदन करना होगा. एक प्रोसेस है.'
शुभेंदु अधिकारी और टीएमसी आमने-सामने
वहीं, मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को तंज कसते हुए कहा था कि उन्होंने रैली के लिए 'बहुत अच्छी जगह चुनी है.' उन्होंने ये भी कहा था कि उन्होंने कोलकाता पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया है कि दुर्गा पूजा के जश्न के बीच रैली की अनुमति न दी जाए.
सीएम शुभेंदु ने कहा था, 'हम उन्हें बाहर नहीं आने देंगे. मैंने सीपी को निर्देश दिया है कि रैली राजाबाजार से एक कदम भी आगे नहीं बढ़नी चाहिए. अगर जरूरत पड़ी, तो मैंने उन्हें केंद्रीय बलों को तैनात करने के लिए कहा है.'
'ये लोकतंत्र है या कोई मजाक'
इस पर पलटवार करते हुए ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले टीएमसी गुट ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में लिखा, 'शुभेंदु अधिकारी इतने डरे हुए क्यों हैं? और ये कहने का क्या मतलब है कि आप विरोध मार्च की अनुमति नहीं देंगे? शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के खिलाफ केंद्रीय बल तैनात करने की धमकी देने का क्या मतलब है? क्या ये लोकतंत्र है या कोई मजाक?'
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पार्टी ने दावा किया कि राज्य ने शायद ही कभी ऐसा परेशान करने वाला राजनीतिक माहौल देखा हो. जो सत्तावादी प्रवृत्तियों, शक्ति के ज्यादा प्रदर्शन और भारतीय संविधान की भावना की खुली अवहेलना से जुड़ा हो. पार्टी ने कहा, 'ये लोकतंत्र का मजाक है! एक मौजूदा संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के ऐसे बयान बेहद परेशान करने वाले और संवैधानिक पद के बिल्कुल शोभा नहीं देते.'