मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय के एक भृत्य शुभम सोनी पर सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से कथित तौर पर लाखों रुपये लेने के आरोप लगे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद सचिवालय ने कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया. आरोप है कि शुभम सोनी विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का हवाला देकर लोगों को नौकरी दिलाने का भरोसा देता था.
डेढ़ साल से नौकरी का इंतजार, पैसे वापस मांगने पर सड़क पर हंगामामध्य प्रदेश विधानसभा में नौकरी दिलाने के नाम पर कथित पैसों के लेनदेन का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है. आरोप लगाने वाले लोगों का कहना है कि उन्होंने विधानसभा सचिवालय में नौकरी पाने की उम्मीद में शुभम सोनी को रकम दी थी. करीब डेढ़ साल बीतने के बावजूद जब नौकरी नहीं मिली, तो उन्होंने पैसे वापस मांगने शुरू कर दिए.
गुरुवार को भोपाल में माता मंदिर के पीछे प्लेटिनम प्लाजा के पास कुछ लोगों का सामना शुभम सोनी से हो गया. लोगों ने उसे रोककर अपनी रकम वापस मांगी, जिसके बाद मौके पर विवाद हुआ. मौके पर मौजूद लोगों ने शुभम की पिटाई भी कर दी. घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. वीडियो में लोग शुभम सोनी पर पैसे लेने का आरोप लगाते हुए रकम लौटाने की मांग करते नजर आ रहे हैं.
विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का हवाला देने का आरोपइस मामले में सबसे गंभीर आरोप यह है कि शुभम सोनी कथित तौर पर विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के नाम का हवाला देकर लोगों को सरकारी नौकरी दिलाने का भरोसा देता था. आरोप लगाने वाले लोगों के मुताबिक, नौकरी नहीं लगने पर जब उन्होंने अपनी रकम वापस मांगी, तो विवाद की स्थिति बन गई. फिलहाल, यह स्पष्ट नहीं है कि कथित तौर पर कितने लोगों ने पैसे दिए, कुल कितनी रकम का लेनदेन हुआ और क्या इस मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भी भूमिका है.
वायरल वीडियो के बाद विधानसभा सचिवालय की कार्रवाईमध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय की जनसंपर्क शाखा की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सचिवालय के भृत्य शुभम सोनी पर शासकीय सेवा में नौकरी दिलाने के बदले धनराशि लेने के आरोप लगाए गए हैं. सचिवालय ने यह भी बताया कि शुभम सोनी के खिलाफ पूर्व में अनुचित कृत्यों को लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किए जा चुके हैं.
इसके बावजूद उसके आचरण में अपेक्षित सुधार नहीं होने की बात कही गई है. सचिवालय ने कथित कृत्य को प्रथम दृष्टया पदीय कर्तव्यों के प्रति घोर लापरवाही, अवांछनीय आचरण और मध्य प्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के नियम 3 के विपरीत माना है. इसके आधार पर उसे तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया.