मेरठ के बहुचर्चित 'सांप कांड' में अमित कश्यप की हत्या को लेकर अदालत ने फैसला सुना दिया है. पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को इस मामले में फांसी की सजा दी गई है. इस बीच अमित के साथ टाइल्स और पत्थर लगाने का काम करने वाले उसके साथी संदीप ने पूरी कहानी बयां की है. उसने अमित के साथ हुई घटना को कई अहम बातें बताई हैं. वहीं, अमित के परिवार के सदस्य ने भी शव की स्थिति, पोस्टमार्टम कराने को लेकर हुए विवाद और रविता के व्यवहार से जुड़े अपने अनुभव साझा किए हैं.
अमित के साथ काम करने वाले संदीप ने बताया कि अमित और अमरदीप दोनों टाइल्स-पत्थर लगाने का काम करते थे. इसी काम के सिलसिले में दोनों के बीच जान-पहचान हुई थी और एक-दूसरे के घर आने-जाने का सिलसिला शुरू हुआ. संदीप के मुताबिक, बाद में रविता और अमरदीप के बीच प्रेम संबंधों की जानकारी सामने आई. इस बात को लेकर अमित और अमरदीप के बीच कई बार विवाद हुआ था. संदीप का दावा है कि इस विवाद के चलते अमित के साथ कई बार मारपीट भी की गई थी.
संदीप ने बताया कि एक बार अमरदीप को गली से बुलाकर अमित के घर के पास लाया गया था, जहां दोनों के बीच झगड़ा हुआ. उसके मुताबिक, रविता और अमरदीप के संबंधों को लेकर आसपास के लोगों को भी जानकारी हो गई थी. हालांकि, संदीप ने यह भी कहा कि पहले रविता का व्यवहार सामान्य था और उसे देखकर ऐसा नहीं लगता था कि वह इस तरह की वारदात में शामिल हो सकती है. अमित के स्वभाव के बारे में संदीप ने बताया कि वह मिलनसार था और गांव में लोगों के साथ उसका व्यवहार अच्छा था.
घटना वाले दिन की परिस्थितियों का जिक्र करते हुए संदीप ने बताया कि अमित के शव के ऊपर और आसपास बिस्तर तथा रजाई पड़ी हुई थी. उसके मुताबिक, बिस्तर की स्थिति देखकर उसे कुछ असामान्य लगा. संदीप ने बताया कि मौके पर सांप भी मौजूद था, जो अमित की कमर के पास था. सांप को पकड़ने के बाद अमित को पहले स्थानीय डॉक्टर के पास ले जाने की कोशिश की गई, लेकिन वहां उसकी नब्ज नहीं चलने की बात कही गई. इसके बाद उसे प्यारेलाल शर्मा अस्पताल ले जाया गया.
संदीप के अनुसार, शुरुआत में परिवार के लोगों को भी यही लगा था कि अमित की मौत सांप के काटने से हुई है. लेकिन बाद में शव पर चोटों के निशान दिखाई देने और पोस्टमार्टम की बात आने पर संदेह गहराने लगा. संदीप का दावा है कि रविता पोस्टमार्टम कराने के पक्ष में नहीं थी और उसने इसका विरोध किया था. उसके मुताबिक, परिवार के लोगों ने रविता के भाई को भी समझाने की कोशिश की, लेकिन सहमति नहीं बन सकी. आखिरकार पुलिस की मौजूदगी में पोस्टमार्टम कराया गया. पोस्टमार्टम में अमित की मौत का कारण गला दबाने से दम घुटना सामने आया, जिसके बाद मामला हत्या की दिशा में आगे बढ़ा.
अमित के साथ काम करने वाले संदीप ने इस मामले में दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दिए जाने की मांग की है. उसका कहना है कि ऐसी घटनाओं पर कठोर कार्रवाई जरूरी है, ताकि दूसरे लोग भी इस तरह का अपराध करने से बचें.
वहीं, अमित के ताऊ के बेटे ने भी घटना के बाद सामने आई परिस्थितियों का जिक्र किया. उसने बताया कि जब परिवार के लोग मौके पर पहुंचे तो शव और बिस्तर की स्थिति को लेकर कई सवाल उठे. उसके मुताबिक, अमित के शव के ऊपर रजाई थी और नीचे भी बिस्तर था. परिवार के लोगों को यह बात असामान्य लगी कि अगर किसी को गर्मी लग रही थी तो वह बाहर आकर रजाई ओढ़कर कैसे लेट सकता था. उसने बताया कि इस बारे में सवाल पूछे जाने पर रविता घबरा गई थी.
अमित के परिजन ने बताया कि पोस्टमार्टम कराने को लेकर भी विवाद हुआ था. परिवार के लोगों ने रविता और उसके भाई को समझाने की कोशिश की कि पोस्टमार्टम होने दिया जाए, ताकि मौत की असली वजह सामने आ सके. उसके मुताबिक, रविता इसके लिए तैयार नहीं थी. बाद में पुलिस की मदद से पोस्टमार्टम कराया गया. परिवार के सदस्य का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला दबाकर हत्या किए जाने की बात सामने आने के बाद मामले की दिशा बदल गई.
इस मामले में जिला शासकीय अधिवक्ता के.के. चौबे ने सजा पर बहस के दौरान अपराध की प्रकृति, हत्या के पीछे की मंशा और वारदात को अंजाम देने के तरीके को महत्वपूर्ण बताया. अभियोजन पक्ष की दलील थी कि अमित की हत्या के बाद शव के पास सांप छोड़कर मौत को सर्पदंश का रूप देने और जांच को गुमराह करने की कोशिश की गई. चौबे ने अदालत में अपने तर्कों के समर्थन में शबनम हत्याकांड और उच्च न्यायालय तथा सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कठोरतम सजा की मांग की थी.
सरकारी अधिवक्ता फरजाना ने भी दोनों दोषियों के लिए मृत्युदंड की मांग की थी. उन्होंने अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि अमित की हत्या के बाद घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की गई थी. पोस्टमार्टम में गला दबाकर हत्या किए जाने की बात सामने आई.
मृतक अमित कश्यप के परिवार की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता बलराज सिंह ने भी दोनों दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग की थी. उनका कहना था कि अमित की हत्या के बाद उसे प्राकृतिक मौत का रूप देने की कोशिश की गई और इस मामले में अदालत के सामने रखे गए साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी ठहराया गया.