शुभेंदु अधिकारी (Shubhendu Adhikari) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक नेता हैं. वे 2021 से पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता रहे हैं. वे नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र से और 2006 से 2009 तक कोंटाई साउथ विधानसभा क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के सदस्य हैं.
राजनीतिक करियर की शरुआत में वे पहली बार 1995 में कांथी नगर पालिका में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पार्षद के रूप में चुने गए थे. 2006 में कांथी दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से पश्चिम बंगाल विधानसभा के लिए चुने गए. वे उसी वर्ष कांथी नगर पालिका के अध्यक्ष भी बने. वह 1998 में तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए जहां से 2020 तक बने रहे.
वे पश्चिम बंगाल सरकार में 2016 से 2020 तक परिवहन मंत्री, 2018 से 2020 तक सिंचाई और जल संसाधन मंत्री के रूप में कार्य किया. वह 2009 से 2016 तक लोकसभा के सदस्य और 2020 से 2021 तक भारतीय जूट निगम के अध्यक्ष भी रहे.
अधिकारी का जन्म 15 दिसंबर 1970 को पश्चिम बंगाल के पुरबा मेदिनीपुर जिले के करकुली में हुआ था. वह मनमोहन सिंह सरकार में सांसद और पूर्व केंद्रीय ग्रामीण विकास राज्य मंत्री शिशिर अधिकारी के बेटे हैं.
अधिकारी अविवाहित हैं.।[13]
शुभेंदु के भाइयों में से एक सौमेंदु कांथी नगर निगम के अध्यक्ष हैं. 2019 में तमलुक निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा के लिए चुने गए दिव्येंदु अधिकारी भी उनके भाई हैं.
अधिकारी ने नेताजी सुभाष मुक्त विश्वविद्यालय से कला में स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की रणनीति जो भी हो, भूमिका क्या होगी, सवाल उठ रहे हैं. बंगाल में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच है, जबकि कांग्रेस सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही है - पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की रणनीति दिल्ली और बिहार चुनाव से कितना अलग होगी?
आज बात पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दंगल की जहां टीएमसी और बीजेपी के बीच कड़ा मुकाबला है. बंगाल की सियासत इस वक्त अपने चरम पर है, जहां हर बयान, हर कदम और हर मंच चुनावी रणनीति का हिस्सा बन चुका है. कल ईद के मौके पर मंदिर -मस्जिद का रंग देखने को मिला. ममता बनर्जी ने कोलकाता में ईद के मौके पर बीजेपी के घुसपैठिए वाले मुद्दे पर अबतक का सबसे बड़ा पलटवार किया. ईद-उल-फितर के मौके पर कोलकाता के रेड रोड पर आयोजित एक बड़े धार्मिक कार्यक्रम में ममता ने पीएम मोदी को सबसे बड़ा घुसपैठिया बता दिया. ये वही मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी लगातार ममता सरकार को घेर रहे हैं. ममता के बयान पर बीजेपी ने हार की हताशा में दिया गया बयान बताया. वहीं बीजेपी ने भी बंगाल में अपने वोटरों को मैसेज दिया है. शुभेंदु अधिकारी कालीघाट मंदिर में जाकर पूजा-अर्चना की और मां काली से आशीर्वाद मांगते हुए कहा कि बंगाल में घुसकर बांग्लादेशी घुसपैठियों ने बहुत अत्याचार किया है. बंगाल में अगले महीने दो चरण में वोटिंग होनी है. ऐसे में जैसे-जैसे तारीख नजदीक आएगी, बयान और भी तीखे होंगे और सियासी चालें और भी पेचीदा. लेकिन सवाल ये कि क्या बंगाल मंदिर-मस्जिद की राजनीति से बाहर निकल पाएगी. इस बार बंगाल में किस पार्टी की नैरेटिव का सिक्का चलेगा. बीजेपी-टीएमसी की आमने-सामने की लड़ाई में आखिर कांग्रेस और कभी 34 साल तक लगातार सरकार में रहने वाली लेफ्ट क्या कर रही है.
पश्चिम बंगाल के सियासी रण में ममता बनर्जी को सियासी शिकस्त देने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया गया है... पहले बीजेपी ने ममता के खिलाफ भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी को उतारकर उनकी मुश्किलें बढ़ाईं फिर हुमायूं कबीर ने ममता के खिलाफ मुस्लिम महिला उम्मीदवार उतारकर चुनौती और बढ़ा दी.
पश्चिम बंगाल के सियासी रण में ममता बनर्जी को सियासी शिकस्त देने के लिए चक्रव्यूह तैयार किया गया है. पहले बीजेपी ने ममता के खिलाफ भवानीपुर सीट से शुभेंदु अधिकारी को उतारकर उनकी मुश्किलें बढ़ाईं फिर हुमायूं कबीर ने ममता के खिलाफ मुस्लिम महिला उम्मीदवार उतारकर चुनौती और बढ़ा दी. इससे पहले चुनाव की तारीखों के ऐलान के तुरंत बाद चुनाव आयोग ने बंगाल के बड़े अधिकारियों के ट्रांसफर हुए. फिर कई जिलों में पुलिस अधिकारियों के तबादले कर दिए गए. खबर है कि, सब मिलाकर बंगाल में 60 अधिकारियों के तबादले हो चुके हैं. इधर, मुस्लिम वोटों के बल पर बंगाल में राज करने वाली ममता बनर्जी को इस बार मुस्लिम वोटों के बंटवारे का डर भी सता रहा है. हुमायूं कबीर ने 182 सीटों पर प्रत्याशी उतारकर ममता की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. आपको बता दें कि, भवानीपुर में 20 प्रतिशत वोटर मुसलमान हैं. वहीं एसआईआर के दौरान इस विधानसभा सीट से 40 हजार वोटरों के नाम काटे जा चुके हैं. कुल मिलाकर ममता की राहें आसान नहीं लग रहीं. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने ईडी की छापेमारी में 8 जनवरी को दखल देने के मामले में ममता बनर्जी को फटकार लगाई है. जिससे ममता चौतरफा घिरती जा रहीं हैं.
पश्चिम बंगाल की सबसे हाई प्रोफाइल सीट भवानीपुर है, जहां से ममता बनर्जी एक बार फिर से चुनावी मैदान में हैं. ममता के खिलाफ बीजेपी ने शुभेंदु अधिकारी को उतार रखा तो हुमायूं कबीर ने पूनम बेगम के जरिए मुस्लिम दांव चला है. इस तरह भवानीपुर में डबल ट्रैप में क्या ममता उलझेंगी या फिर नहीं?
भवानीपुर सीट 2026 के बंगाल विधानसभा चुनाव में प्रतिष्ठा की लड़ाई बन गई है, जहां ममता बनर्जी और शुभेंदु अधकारी आमने-सामने हैं. इस मुकाबले में जीत सिर्फ सीट नहीं बल्कि बंगाल की सियासत की दिशा तय कर सकती है. आखिरी बार हुए मुकाबले में शुभेंदु ने नंदीग्राम से ममता को हरा दिया था.
तृणमूल कांग्रेस ने अपने सबसे चर्चित प्रवक्ता कुणाल घोष को कोलकाता उत्तर बेलेघाटा से चुनावी मैदान में उतार दिया है. बेलेघाट से टिकट मिलने पर घोष ने खुशी जताई है. उन्होंने कहा कि मैंने कभी भी अपनी पार्टी का साथ नहीं छोड़ा. जिस वक्त उनके नेतृत्व के साथ मतभेद थे, तब भी उन्होंने ईमानदारी और निष्ठा से पार्टी के लिए काम किया.
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी के बीच चुनावी मुकाबला पांच साल बाद फिर से देखने को मिलने वाला है. बीजेपी की पहली लिस्ट में शुभेंदु अधिकारी का नाम आने के बाद तृणमूल कांग्रेस ने भी ममता बनर्जी को भवानीपुर से उम्मीदवार घोषित कर दिया है - देखना है, नया संग्राम भी नंदीग्राम जैसा होता है या बिल्कुल अलग. SIR के कारण यहां काफी सीन बदला हुआ है.
पश्चिम बंगाल चुनाव 2026 के लिए टीएमसी की कैंडिडेट की लिस्ट में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पार्टी ने 74 विधायकों को हटाया और कई नए चेहरों को मौका दिया है. इस बार स्टार पावर से दूरी बनाते हुए प्रदर्शन, जमीनी पकड़ और सामाजिक संतुलन पर जोर दिया गया है.
भवानीपुर सीट पर बीजेपी ने बंगाल चुनाव में शुवेंदु अधकारी को उतारकर TMC को चुनौती दी है. यह सीट ममता बनर्जी का मजबूत गढ़ रही है, लेकिन हाल के चुनावों में TMC की बढ़त घटने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है.
तृणमूल कांग्रेस ने नंदीग्राम सीट से शुभेंदु अधिकारी के खिलाफ उनके करीबी रहे पबित्र कर को मैदान में उतारा है. पबित्र 2021 के विधानसभा चुनाव से पहले शुभेंदु अधिकारी के साथ टीएमसी छोड़कर बीजेपी में शामिल हो गए थे. अब उन्होंने अपनी पुरानी पार्टी में वापसी कर ली है.
पश्चिम बंगाल में 15 मार्च को चुनाव की तारीखों का ऐलान हुआ. तभी से कोलकाता से दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ा हुआ है. एक समय था जब बीजेपी, टीएमसी की लिस्ट आने का इंतजार करती थी. उस हिसाब से अपनी रणनीति बनाती थी. लेकिन इस बार बीजेपी की आक्रामक रणनीति देखने को मिल रही है. बीजेपी ने टीएमसी की लिस्ट से एक दिन पहले ही ऐलान कर दिया कि, इस बार भी शुभेंदु अधिकारी ममता बनर्जी को घेरने के लिए तैयार हैं. कल बीजेपी ने ऐलान किया कि, शुभेंदु नंदीग्राम और भवानीपुर दोनों सीटों से लड़ेंगे तो आज ममता ने ऐलान किया कि, वो नंदीग्राम से नहीं बल्कि भवानीपुर से ही चुनाव लड़ेंगी. यानी एक बार फिर ममता vs शुभेंदु का राउंड 2 देखने को मिलेगा.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के लिए बीजेपी ने पहली उम्मीदवार सूची जारी की है. इसके मुताबिक शुभेंदु अधिकारी को भवानीपुर सीट से ममता बनर्जी के खिलाफ उतारा गया है. इसे बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में पहला चरण चुनावी मुकाबले का सबसे अहम चरण माना जा रहा है. आंकड़ों के अनुसार इस चरण में बीजेपी की कई कमजोर सीटें हैं, जबकि दूसरे चरण में टीएमसी की मजबूत पकड़ वाले क्षेत्र शामिल हैं.
भारतीय जनता पार्टी ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी की है. पार्टी ने नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी को नंदीग्राम के साथ-साथ भवानीपुर सीट से भी मैदान में उतारा है, जहां से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव लड़ती हैं. बंगाल में 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान होगा, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे.
बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने चुनाव की घोषणा के साथ ही 144 उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है, जिसमें शुभेंदु अधिकारी भवानीपुरा और नंदीग्राम से चुनाव लड़ेंगे. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी भवानीपुरा से चुनाव लड़ती हैं. शुभेंदु अधिकारी इस बार ममता बनर्जी के खिलाफ भवानीपुरा से चुनाव लड़ेंगे. दिलीप घोष जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता भी दो सीटों से चुनाव मैदान में हैं. देखें वीडियो.
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर कलकत्ता हाईकोर्ट में शुभेंदु अधिकारी के काफिले पर हमले के मामले की सुनवाई में हो रही देरी पर चिंता जताई. अदालत ने हाईकोर्ट को मामले की जल्द सुनवाई करने और फैसला लेने के लिए निर्देश दिए.
पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने दावा किया कि बंगाल का मुस्लिम समुदाय अब ममता बनर्जी के साथ नहीं है.
टीएमसी जितना तो नहीं, लेकिन बंगाल में बीजेपी के पांव जमाने में मुकुल रॉय की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, क्रेडिट भले ही कम मिला हो. ममता बनर्जी के साथ संगठन संभालने, दिल्ली की राजनीति में खास रोल निभाने, केंद्र सरकार में मंत्री बनने और भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते विवादों में रहे मुकुल रॉय हमेशा ही सुर्खियों में रहे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष अधिकारी ने दावा किया कि कबीर पिछले साल 28 सितंबर को बांग्लादेश गए थे और एक सप्ताह तक वहां रहकर मस्जिद निर्माण के लिए धन जुटाया. उन्होंने आरोप लगाया कि मुर्शिदाबाद जिले के बेलडांगा में बनने वाली मस्जिद के लिए बांग्लादेशी दानदाताओं और जमात से जुड़े संगठनों से धन जुटाया गया है.
इस वीडियो में गृहमंत्री ने बांग्लादेश से आए बांग्लादेशी चरमपंथियों द्वारा कही गई बातों पर मज़बूत जवाब दिया है. उन्होंने ममता बनर्जी की बंगाल में विशेषकर उत्तर बंगाल के लिए बजट और विकास योजनाओं में उपेक्षा की कड़ी आलोचना की है.