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ओटीटी

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OTT (Over-The-Top) या ओवर-द-टॉप मीडिया सर्विस एक ऐसा तरीका है, जिसमें आप इंटरनेट के जरिए सीधे फिल्में, वेब सीरीज, टीवी शो या ऑडियो कंटेंट देखते और सुनते हैं. इसमें केबल टीवी, डिश या सैटेलाइट की जरूरत नहीं होती. आजकल इसे आम तौर पर स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म भी कहा जाता है. 

पहले टीवी देखने के लिए हमें केबल या डीटीएच कनेक्शन लेना पड़ता था. लेकिन OTT में ऐसा नहीं है. इसमें कंटेंट सीधे इंटरनेट के जरिए आपके मोबाइल, लैपटॉप, स्मार्ट टीवी या टैबलेट पर पहुंचता है. आप Netflix, Amazon Prime Video या Disney+ Hotstar जैसे ऐप खोलते हैं और तुरंत वीडियो चल जाता है, यही OTT है.

OTT प्लेटफॉर्म मुख्य रूप से दो तरह के होते हैं- 1. सब्सक्रिप्शन वाले (SVOD), इनमें आपको महीने या साल का पैसा देना पड़ता है. और 2. फ्री (FAST - Free Ad Supported), इनमें आपको पैसे नहीं देने पड़ते, लेकिन बीच-बीच में विज्ञापन आते हैं.

कई बार OTT प्लेटफॉर्म दूसरे प्रोड्यूसर्स से कंटेंट के राइट्स खरीदते हैं, और कई बार खुद अपनी फिल्में या सीरीज बनाते हैं.

आज के समय में OTT बहुत तेजी से बढ़ रहा है. 2023 में दुनिया भर में करीब 38% लोग टीवी देखने के लिए OTT का इस्तेमाल कर रहे थे.

भारत में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स मनोरंजन का एक लोकप्रिय माध्यम बन चुके हैं. दर्शकों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर हिंदी, तमिल, तेलुगु, मलयालम, कन्नड़ और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में भी भरपूर कंटेंट उपलब्ध कराया जाता है. यहां रोमांच, ड्रामा, कॉमेडी, एक्शन, क्राइम और पारिवारिक मनोरंजन से लेकर क्रिकेट जैसे बड़े खेल आयोजनों की लाइव स्ट्रीमिंग तक देखी जा सकती है.

ओटीटी की सबसे बड़ी विशेषता इसकी सुविधा है. दर्शक अपनी पसंद का कंटेंट किसी भी समय और किसी भी स्थान से मोबाइल, लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्ट टीवी पर देख सकते हैं। यही वजह है कि पिछले कुछ वर्षों में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है.

डिजिटल कंटेंट को व्यवस्थित करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2021 में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) नियम लागू किए थे. इन नियमों के तहत डिजिटल मीडिया और ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के लिए कुछ दिशा-निर्देश निर्धारित किए गए हैं. सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय इन प्लेटफॉर्म्स की गतिविधियों पर नजर रखता है.

यदि कोई प्लेटफॉर्म नियमों का उल्लंघन करता है या आपत्तिजनक एवं गैरकानूनी सामग्री प्रसारित करता है, तो संबंधित अधिकारियों द्वारा उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. सरकार समय-समय पर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी करती रहती है.

OTT सिर्फ वीडियो तक सीमित नहीं है, आजकल म्यूजिक, पॉडकास्ट, रेडियो, ऑडियोबुक भी इंटरनेट के जरिए स्ट्रीम होते हैं. इसे ऑडियो स्ट्रीमिंग कहा जाता है.

OTT का कॉन्सेप्ट 1998 में शुरू हुआ था, जब हांगकांग टेलीकॉम ने iTV नाम की सर्विस लॉन्च की थी. यह दुनिया का पहला वीडियो-ऑन-डिमांड प्लेटफॉर्म था, जहां लोग अपनी पसंद का कंटेंट चुनकर देख सकते थे.

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