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अंकिता भंडारी केस में कैसे आया दुष्यंत गौतम का नाम? जानें क्या है पूरा विवाद

दुष्यंत गौतम को सिक्किम का राज्यपाल बनाने को लेकर विवाद तेज हो गया है. अंकिता भंडारी के पेरेंट्स उनके विरोध में इंडिया गेट पर धरना दे दिया. अंकिता भंडारी हत्याकांड में दुष्यंत गौतम का नाम भी सामने आया था. ऐसे में उन्हें राज्यपाल बनाने को लेकर मृतका के माता-पिता और विपक्ष सड़क पर उतर आया है.

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अंकिता भंडारी के पेरेंट्स ने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ धरना दिया. (Photo- PTI)
अंकिता भंडारी के पेरेंट्स ने दुष्यंत गौतम को राज्यपाल बनाए जाने के खिलाफ धरना दिया. (Photo- PTI)

दुष्यंत गौतम को सिक्किम राज्यपाल बनाए जाने के विरोध में अंकिता भंडारी के माता-पिता दिल्ली के इंडिया गेट पर धरने पर बैठ गए हैं. ऐसे में अंकिता भंडारी हत्याकांड मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है. आइए जानते हैं कि दुष्यंत गौतम का इस हत्याकांड से क्या कनेक्शन है.

दरअसल राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 12 अक्टूबर 2026 को दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया. इसके बाद उत्तराखंड कांग्रेस ने इस नियुक्ति के विरोध में उपवास का ऐलान किया था.

आज जब अंकिता भंडारी के माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना दिया, तो नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी में इंडिया गेट जाकर उनसे मुलाकात की. राहुल गांधी ने 13 अगस्त 2026 को भी नई दिल्ली में अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की थी.

अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी और माता सोनी देवी ने राहुल गांधी से मिलकर अपनी बेटी को न्याय दिलाने की मांग की थी. राहुल गांधी ने उन्हें न्याय की लड़ाई में साथ देने का आश्वासन दिया था. राहुल ने अपने कार्यालय का भी नंबर दिया था जिससे अंकिता के माता पिता उनसे संपर्क कर सकें.

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क्या है पूरा मामला?

ये मामला तब शुरू हुआ जब 22 दिसंबर 2025 को पूर्व बीजेपी MLA सुरेश राठौर की पत्नी और अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर अंकिता भंडारी मामले से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट किया था. उन्होंने दावा किया कि उन्हें उस VIP के बारे में जानकारी है, जिसका नाम 2022 के हत्याकांड से जोड़ा जा रहा था. इसके साथ उन्होंने सुरेश राठौर से बातचीत की एक ऑडियो रिकॉर्डिंग भी शेयर की थी.

उनके दावों में 'गट्टू' नाम का जिक्र था. चर्चाओं में इस नाम को बीजेपी के तत्कालीन राष्ट्रीय महासचिव दुष्यंत गौतम से जोड़कर पेश किया गया.

23 दिसंबर को सुरेश राठौर सार्वजनिक रूप से सामने आए और वायरल ऑडियो को AI से बनाया गया बताते हुए उसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठाए. इस तरह विवाद दो हिस्सों में बंट गया: उर्मिला का दावा कि रिकॉर्डिंग में अहम जानकारी है, और राठौर का दावा कि रिकॉर्डिंग नकली है.

दुष्यंत गौतम ने इन आरोपों को गलत बताते हुए 5 जनवरी 2026 को देहरादून के डालनवाला थाने में शिकायत दर्ज कराई. 7 जनवरी को दुष्यंत गौतम ने दिल्ली हाई कोर्ट में मानहानि का दीवानी मुकदमा दायर किया. उन्होंने उर्मिला, सुरेश राठौर, कांग्रेस के संबंधित पदाधिकारियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ राहत मांगी.

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अदालत ने प्रथम दृष्टया मानहानि का मामला बनता हुआ मानते हुए संबंधित प्रतिवादियों को गौतम को अंकिता मामले का VIP बताने या ऐसा संकेत देने वाली सामग्री पोस्ट या प्रसारित करने से रोका. निर्दिष्ट सामग्री हटाने के लिए 24 घंटे का निर्देश भी दिया गया.

मुख्यमंत्री ने CBI जांच की सिफारिश की

पुष्कर सिंह धामी ने अंकिता भंडारी हत्याकांड की CBI जांच की सिफारिश की. ये फैसला विरोध प्रदर्शनों और मामले में VIP की भूमिका को लेकर बढ़ते दबाव के बीच आया.

अंकिता के माता-पिता ने कहा कि जांच में VIP के पहलू को विशेष रूप से शामिल किया जाना चाहिए. फरवरी की शुरुआत में CBI ने अंकिता भंडारी हत्याकांड के VIP पहलू की जांच के लिए अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया. एजेंसी ने उत्तराखंड पुलिस की SIT से संपर्क कर संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू की.

FIR में अज्ञात व्यक्ति का नाम होने का मतलब ये नहीं था कि दुष्यंत गौतम को आरोपी बनाया गया. सीबीआई जांच आगे ना बढ़ते देख उत्तराखंड में बीते महीनों में कई विरोध प्रदर्शन भी हुए.

कौन हैं दुष्यंत गौतम?

दुष्यंत कुमार गौतम बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं, जिनका जन्म 29 दिसंबर 1957 को दिल्ली के मल्कागंज में हुआ था. उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.ए. की पढ़ाई की और अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत दिल्ली की स्थानीय राजनीति से की. वो 1997 से 2002 तक वसंत विहार के नगर निगम पार्षद रहे. इसके बाद उन्होंने 2008 और 2013 में दिल्ली के कोंडली विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ा, लेकिन जीत नहीं पाए.

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वो बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चे के प्रमुख भी रहे और सितंबर 2020 में पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किए गए. मार्च 2020 में वो हरियाणा से राज्यसभा सदस्य निर्वाचित हुए और नवंबर 2020 में उत्तराखंड बीजेपी के प्रभारी बने. जुलाई 2024 में उन्हें दोबारा ये जिम्मेदारी मिली. फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में उन्होंने करोल बाग से बीजेपी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा, लेकिन आम आदमी पार्टी के विशेष रवि से हार गए.

यह भी पढ़ें: कांग्रेस, AAP तुरंत हटाए BJP महासचिव दुष्यंत गौतम वाली पोस्ट... अंकिता भंडारी केस में दिल्ली HC का आदेश

गौतम ने इन आरोपों को मानहानिकारक बताते हुए जनवरी 2026 में दिल्ली हाई कोर्ट में 2 करोड़ रुपए के हर्जाने का मुकदमा दायर किया, जिस पर अदालत ने अंतरिम राहत दी. हालांकि, ये आदेश VIP की पहचान या वायरल आरोपों की सच्चाई पर आखिरी फैसला नहीं था.

अब अक्टूबर 2026 में राष्ट्रपति भवन की घोषणा के मुताबिक उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया. इसे लेकर ही अंकिता भंडारी का परिवार विरोध पर उतर आया है. ऐसे में राहुल गांधी ने परिवार से मिलकर उनका समर्थन किया और सोशल मीडिया पर पोस्ट भी किया.

उन्होंने कहा, 'चार साल से अंकिता भंडारी के परिवार को इंसाफ नहीं मिला, लेकिन एक VIP आरोपी को संरक्षण और संवैधानिक पद का इनाम जरूर मिला. जहां बलात्कारियों और हत्यारों का फूल-मालाओं से स्वागत होता है और अपराधियों को सत्ता की ताकत से नवाजा जाता है. उस महिला-विरोधी BJP से कोई उम्मीद की भी नहीं जा सकती. आज, अंकिता के माता-पिता अपनी बच्ची के लिए न्याय की गुहार ले कर, अपने घर से मीलों दूर, इंडिया गेट पर बैठे हैं. मैं और कांग्रेस पार्टी उनके साथ खड़े हैं. उनके दुख में भी और इंसाफ की इस लड़ाई में भी.'

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उत्तराखंड सरकार का बयान 

वहीं, विवाद के बीच उत्तराखंड सरकार ने अंकिता भंडारी केस को लेकर बयान जारी किया है. मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी जानकारी में एक बार फिर उत्तराखंड सरकार ने अंकिता भंडारी में मजबूत पैरवी और तुरंत करवायी का दावा किया है. सरकार का दावा है की अंकिता को न्याय दिलाने के लिए त्वरित कार्रवाई से लेकर जांच और अभियोजन तक कई स्तरों पर कदम उठाए गए.

सरकार के मुताबिक, मामला सामने आने के 24 घंटे के भीतर आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था. प्रकरण की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और जांच के बाद आरोपियों के विरुद्ध आरोपपत्र न्यायालय में पेश किया गया था.

यह भी पढ़ें: अंकिता भंडारी के परिवार का इंडिया गेट पर धरना, राहुल-प्रियंका ने की मुलाकात

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी में ये भी बताया गया कि मामले में अभियोजन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई. आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई और इस मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को उम्रकैद की सजा भी सुनाई.

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