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दो दिन तक हाईवे पर पिता के शव को रौंदते रहे सैकड़ों वाहन, चप्पल-कपड़ों से बेटे ने पहचाना, सड़क से खुरचकर निकाले टुकड़े

झांसी में कानपुर हाईवे पर एक व्यक्ति का शव दो दिन तक वाहनों के नीचे कुचलता रहा. सड़क मरम्मत के काम के चलते किसी की नजर उस पर नहीं पड़ी. रविवार को घर लौटे बेटे को पिता के लापता होने की जानकारी मिली. तलाश के दौरान चप्पल और कपड़ों से पहचान हुई. शव को सड़क से खुरचकर निकाला गया.

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सड़क मरम्मत के बीच हाईवे पर पड़ा रहा शव. (File Photo: ITG)
सड़क मरम्मत के बीच हाईवे पर पड़ा रहा शव. (File Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के झांसी में कानपुर हाईवे से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया. यहां एक शख्स का शव करीब दो दिन तक हाईवे पर पड़ा रहा और सैकड़ों वाहन उसके ऊपर से गुजरते रहे. लगातार वाहनों के रौंदने से शव सड़क पर चिपक गया. जब परिवार ने तलाश शुरू की, तो बेटे को घटनास्थल पर पिता की चप्पल और कपड़े दिखाई दिए. इन्हीं के सहारे उसने अपने पिता की पहचान की. हालात ऐसे थे कि शव को सड़क से खुरचकर निकालना पड़ा. बाद में शव के टुकड़ों को एक छोटी गठरी में रखकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया.

मृतक की पहचान करीब 56 वर्षीय जगमोहन तिवारी के रूप में हुई है. वह झांसी जिले के पूंछ थाना क्षेत्र के महाराजगंज के रहने वाले थे. वह खेती-किसानी करते थे. परिवार में उनकी पत्नी रागनी, दो बेटे और एक बेटी हैं. बड़े बेटे सागर और बेटी प्राची की शादी हो चुकी है, जबकि छोटा बेटा आयुष्य अविवाहित है. परिवार के मुताबिक, 9 अक्टूबर की सुबह करीब 11 बजे जगमोहन घर से निकलकर झांसी-कानपुर हाईवे के किनारे स्थित अपने खेत पर गए थे. देर रात तक जब वह घर नहीं लौटे, तो उनकी पत्नी रागनी को लगा कि वह खेत पर ही रुक गए होंगे. ऐसा पहले भी हो चुका था, इसलिए परिवार ने शुरुआत में इसे असामान्य नहीं समझा.

9 अक्टूबर को खेत पर गए थे जगमोहन, फिर घर नहीं लौटे

जगमोहन के पास मोबाइल फोन भी नहीं था. ऐसे में उनकी पत्नी उनसे संपर्क नहीं कर सकीं. परिवार को अंदाजा भी नहीं था कि जिस व्यक्ति के खेत से लौटने का इंतजार किया जा रहा है, उसके साथ इतना बड़ा हादसा हो चुका है. जगमोहन का छोटा बेटा आयुष्य अपनी दादी शोमा तिवारी को लेने गुजरात गया हुआ था. वहीं, बड़ा बेटा सागर एक कंपनी में काम करता है और घूमने के लिए मथुरा गया हुआ था. रविवार को आयुष्य अपनी दादी को लेकर घर पहुंचा. वहां पिता को नहीं देखकर उसने मां से उनके बारे में पूछा.

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रागनी ने बताया कि जगमोहन 9 अक्टूबर को खेत पर गए थे, लेकिन उसके बाद वापस नहीं लौटे. यह जानकारी मिलने के बाद आयुष्य अपने पिता को खोजने खेत की तरफ गया. इसी दौरान स्थानीय लोगों ने उसे बताया कि हाईवे पर एक हादसा हुआ था. आयुष्य जब घटनास्थल पर पहुंचा, तो वहां उसे अपने पिता की चप्पल दिखाई दी. इसके बाद तौलिया और कपड़े भी नजर आए. इन चीजों को देखकर उसे शक हुआ कि सड़क पर पड़ा शव उसके पिता का ही हो सकता है. कपड़ों और चप्पलों के आधार पर उसने जगमोहन की पहचान की.

सड़क पर चिपक गया था शव, खुरचकर निकालने पड़े टुकड़े

लगातार वाहनों के गुजरने और शव के कुचलने के कारण उसकी हालत बेहद खराब हो चुकी थी. परिवार के मुताबिक, शरीर का कोई भी हिस्सा सुरक्षित नहीं बचा था. वहां बाल और मांस के लोथड़े भी मिले. शव सड़क पर इस तरह चिपक गया था कि उसे सामान्य तरीके से उठाना संभव नहीं था. सूचना मिलने के बाद रविवार रात पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने शव को सड़क से खुरचकर निकाला. शव के बचे हुए टुकड़ों को एक छोटी गठरी में इकट्ठा किया गया, जिसके बाद उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया. सोमवार को पोस्टमार्टम की कार्रवाई की गई. इस घटना ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया. जिस व्यक्ति के घर लौटने का इंतजार हो रहा था, उसकी पहचान तक कपड़ों और चप्पलों के सहारे करनी पड़ी. 

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इस मामले में पूंछ थाना प्रभारी विद्यासागर ने फोन पर बताया कि सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची थी. उनके मुताबिक, जगमोहन दो दिन से लापता चल रहे थे. जिस स्थान पर यह घटना हुई, वहां सड़क की मरम्मत का काम चल रहा था. इसी वजह से शव पर किसी की नजर नहीं पड़ी. थाना प्रभारी ने बताया कि शव के टुकड़ों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम कराया गया है और मामले में आगे की कार्रवाई की जा रही है. फिलहाल, इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईवे पर दो दिन तक शव पड़ा रहने के बावजूद किसी को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई. सड़क मरम्मत के काम के बीच शव वाहनों से कुचलता रहा और परिवार को इसकी भनक तक नहीं लगी. आखिरकार, रविवार को बेटे ने चप्पल और कपड़ों के सहारे अपने पिता को पहचाना.
 

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