बांग्लादेश ने पहले मोंगला पोर्ट के पास भारत के लिए बनने वाले आर्थिक क्षेत्र की परियोजना रद्द कर दी थी. अब इसी बंदरगाह के विस्तार के लिए चीन से करीब 335.78 मिलियन डॉलर (लगभग ₹3,223 करोड़ भारतीय रुपये) का कर्ज लिया है. इस पैसे से दो नए कंटेनर टर्मिनल बनाए जाएंगे. साथ ही, माल रखने और उसकी आवाजाही के लिए अलग जगह तैयार होगी. इससे बंदरगाह पर पहले से ज्यादा माल संभालना आसान होगा.
बांग्लादेश का मोंगला पोर्ट उसके सबसे बड़े समुद्री बंदरगाह चटगांव के बाद दूसरे नंबर पर है. सरकार अब इसकी क्षमता बढ़ाना चाहती है. चीन से मिला कर्ज इसी योजना का हिस्सा है. दोनों देशों के बीच शनिवार को इस समझौते पर हस्ताक्षर हुए. इसकी जानकारी सोमवार को आई एक मीडिया रिपोर्ट में दी गई.
इस समझौते की एक और अहम बात है. चीन यह कर्ज 2 प्रतिशत ब्याज पर देगा. बांग्लादेश को इसे चुकाने के लिए 20 साल का समय मिलेगा. शुरुआती पांच साल तक कर्ज की रकम चुकाने से छूट रहेगी. यानी इस दौरान बांग्लादेश को कर्ज की किस्तें नहीं देनी होंगी.
मोंगला पोर्ट पर क्या होगा?
सरकारी समाचार एजेंसी बीएसएस के मुताबिक, चीन के एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बैंक और बांग्लादेश सरकार के आर्थिक संबंध विभाग के बीच यह समझौता हुआ है. परियोजना के तहत दो कंटेनर टर्मिनल बनाए जाएंगे. इनके अलावा माल चढ़ाने-उतारने के लिए अलग यार्ड तैयार होंगे. इसका मकसद बंदरगाह की सुविधाएं बेहतर करना है, ताकि यहां ज्यादा माल आ सके और उसे दूसरे स्थानों तक भेजने में आसानी हो. मोंगला पोर्ट पसुर नदी के पूर्वी किनारे पर है, जो कि 71 समुद्री मील अंदर की ओर स्थित है. यह भारतीय सीमा से लगभग 80 किलोमीटर पश्चिम में है.
एक साल पहले रद्द हुई थी भारत की परियोजना
मोंगला पोर्ट के पास भारत के लिए 110 एकड़ जमीन पर आर्थिक क्षेत्र बनाने की योजना थी. साल 2015 में दोनों देशों के बीच हुए समझौते के तहत यह जमीन भारत के लिए तय की गई थी. बाद में भारत सरकार ने इस परियोजना को विकसित करने के लिए हीरानंदानी ग्रुप की सहयोगी कंपनी एविटा कंस्ट्रक्शंस को चुना. हालांकि, करीब एक साल पहले बांग्लादेश की तत्कालीन सरकार ने मोंगला पोर्ट के पास भारत के लिए प्रस्तावित आर्थिक क्षेत्र की परियोजना रद्द कर दी थी. उस समय मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने कहा था कि भारत की ओर से चुनी गई कंपनी तय समय के भीतर निर्माण कार्य शुरू नहीं कर सकी.
चीन के साथ कैसे आगे बढ़ी बात?
बांग्लादेश और चीन के बीच मोंगला पोर्ट को लेकर यह समझौता जून में हुई बातचीत के बाद हुआ. उस समय बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने बीजिंग का दौरा किया था.
भारत पहले भी बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी को लेकर चिंता जता चुका है. खासकर भारतीय सीमा के करीब रणनीतिक रूप से अहम इलाकों में चीन की परियोजनाओं पर उसकी नजर रही है. अब मोंगला पोर्ट के विस्तार के लिए चीन से मिले कर्ज के बाद इस बंदरगाह की क्षमता बढ़ाने की योजना आगे बढ़ेगी.