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मॉनसून ने बदली चाल, दो दिन उत्तर भारत में बारिश का जोर, लो प्रेशर से बदलेगा मौसम

उत्तर भारत के मौसम में अगले 48 घंटे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. 11-12 अगस्त को बारिश तेज होने के आसार हैं. दिल्ली-NCR समेत कई इलाकों में बादल और बौछारें बढ़ सकती हैं.

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नई दिल्ली में बारिश के बीच सड़क पर चलते कावड़िये. (Photo: PTI)
नई दिल्ली में बारिश के बीच सड़क पर चलते कावड़िये. (Photo: PTI)

उत्तर भारत में 11 और 12 अगस्त को बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है. इसकी बड़ी वजह मध्य प्रदेश के ऊपर बना कम दबाव वाला क्षेत्र और उत्तर भारत में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ है. दोनों मौसम सिस्टम के असर से उत्तर भारत में बारिश का दौर तेज हो सकता है. दिल्ली-NCR समेत हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हिमाचल प्रदेश के कई हिस्सों में इसका असर देखने को मिल सकता है.

इस समय सिर्फ एक मौसम सिस्टम सक्रिय नहीं है. मॉनसून ट्रफ भी एक्टिव है और अपनी सामान्य जगह से दक्षिण की ओर बनी हुई है. मध्य प्रदेश में बना कम दबाव का क्षेत्र उत्तर मध्य प्रदेश की तरफ बढ़ गया है. वहीं बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक और सिस्टम बना हुआ है, जिसके असर से 12 अगस्त के आसपास नया लो प्रेशर बन सकता है. हिमाचल प्रदेश के ऊपर भी हवा का एक सिस्टम बना हुआ है. इन सभी के असर से अगले दो दिनों में उत्तर भारत में बारिश बढ़ सकती है.

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मध्य प्रदेश से बंगाल की खाड़ी तक एक्टिव सिस्टम

10 अगस्त की सुबह 8:30 बजे तक मध्य प्रदेश और आसपास बना कम दबाव वाला क्षेत्र उत्तर मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में पहुंच गया था. इसके साथ हवा का एक घूमता हुआ सिस्टम भी बना हुआ है, जो समुद्र तल से करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक फैला है. इसके कारण मध्य प्रदेश और आसपास के इलाकों में बारिश की स्थिति बनी हुई है.

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उधर, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी के ऊपर भी ऊपरी हवा में चक्रवाती सिस्टम मौजूद है. इसके असर से करीब 12 अगस्त को इसी क्षेत्र में एक नया कम दबाव वाला क्षेत्र बन सकता है. मॉनसून के दौरान बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे सिस्टम बारिश बढ़ाने में अहम भूमिका निभाते हैं. ये समुद्र से नमी वाली हवाओं को जमीन की ओर लाते हैं.

वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बढ़ेगा असर

उत्तर भारत में पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस भी सक्रिय है. यह पश्चिम से आने वाला मौसम सिस्टम है, जिसका असर खास तौर पर उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत पर पड़ता है. फिलहाल यह करीब 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई पर एक ट्रफ के रूप में मौजूद है.

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जब पश्चिमी विक्षोभ का असर मॉनसून से जुड़े कम दबाव वाले सिस्टम के साथ पड़ता है, तो बादल बनने और बारिश बढ़ने की स्थिति बन सकती है. यही वजह है कि 11-12 अगस्त का समय उत्तर भारत के लिए खास माना जा रहा है.

इसके अलावा मॉनसून ट्रफ भी सक्रिय है और सामान्य स्थिति से दक्षिण की तरफ बनी हुई है. आसान भाषा में इसे बारिश से जुड़ी हवाओं की एक लंबी पट्टी समझ सकते हैं. इसका सक्रिय रहना भी उत्तर और मध्य भारत में बारिश बढ़ाने में मदद कर सकता है.

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शियर जोन और हिमाचल का सिस्टम भी एक्टिव

मध्य और उत्तर प्रायद्वीपीय भारत में करीब 22 डिग्री उत्तरी अक्षांश के आसपास शियर जोन भी बना हुआ है. आसान भाषा में यह ऐसी स्थिति है, जिसमें अलग-अलग ऊंचाई पर चलने वाली हवाओं की दिशा या रफ्तार बदलती है. इससे बादल बनने और बारिश की स्थिति मजबूत हो सकती है.

दक्षिण-पूर्वी हिमाचल प्रदेश और आसपास के इलाकों में भी ऊपरी हवा में चक्रवाती सिस्टम बना हुआ है. इसके कारण हिमाचल और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश जारी रह सकती है. तेज बारिश होने पर पहाड़ी सड़कों और यातायात पर असर पड़ सकता है.

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11-12 अगस्त को बढ़ेगी बारिश

इन सभी मौसम सिस्टम के एक साथ सक्रिय रहने से 11 और 12 अगस्त को उत्तर भारत में बारिश बढ़ने की उम्मीद है. दिल्ली-NCR, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश हो सकती है. मध्य प्रदेश और हिमाचल प्रदेश में भी इसका असर देखने को मिलेगा.

हर जगह बारिश एक जैसी नहीं होगी. कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है, जबकि कुछ जगह तेज बौछारें पड़ सकती हैं. कुल मिलाकर अगले दो दिन उत्तर भारत के मौसम के लिए अहम रहने वाले हैं और बारिश की गतिविधियां सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा रह सकती हैं.

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