पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) एक बाह्य उष्णकटिबंधीय (Extratropical) मौसम प्रणाली है, जिसकी शुरुआत भूमध्य सागर (Mediterranean Sea) के आसपास के क्षेत्र से होती है. यह प्रणाली पश्चिमी हवाओं (Westerlies) के साथ आगे बढ़ते हुए भारत, पाकिस्तान, नेपाल और बांग्लादेश के कुछ हिस्सों तक पहुंचती है. भारत में इसका सबसे अधिक प्रभाव उत्तर-पश्चिमी राज्यों और हिमालयी क्षेत्रों में देखा जाता है. यह मानसून से अलग एक मौसम प्रणाली है, जो मुख्य रूप से सर्दियों के दौरान वर्षा और बर्फबारी लेकर आती है.
पश्चिमी विक्षोभ का निर्माण तब होता है, जब भूमध्य सागर के आसपास ठंडी और गर्म हवा आपस में मिलते हैं. इस प्रक्रिया से ऊपरी वायुमंडल में कम दबाव का क्षेत्र विकसित होता है, जो धीरे-धीरे पूर्व दिशा की ओर बढ़ता है. इस दौरान यह प्रणाली भूमध्य सागर, कैस्पियन सागर और काला सागर से नमी प्राप्त करती है. जब यह हिमालय पर्वत तक पहुंचती है, तो पर्वत इसकी गति और संरचना को प्रभावित करते हैं, जिससे कई स्थानों पर वर्षा और ऊंचे पहाड़ी इलाकों में बर्फबारी होती है.
भारत में पश्चिमी विक्षोभ का असर मुख्य रूप से दिसंबर से मार्च के बीच देखने को मिलता है. इस दौरान जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और उत्तर-पश्चिम भारत के कई हिस्सों में बारिश और बर्फबारी होती है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी इसके कारण सर्दियों में वर्षा दर्ज की जाती है. कभी-कभी इसका प्रभाव बिहार, उत्तरी पश्चिम बंगाल, बांग्लादेश के उत्तरी भाग और दक्षिण-पूर्वी नेपाल तक भी पहुंच जाता है (Western Disturbance India) .
पश्चिमी विक्षोभ के दौरान मौसम में कई तरह के बदलाव देखे जाते हैं. आसमान में बादल छा सकते हैं, रात के तापमान में परिवर्तन हो सकता है और कई क्षेत्रों में हल्की से मध्यम या तेज बारिश हो सकती है. पहाड़ी इलाकों में भारी बर्फबारी भी हो सकती है. कुछ परिस्थितियों में अधिक वर्षा के कारण भूस्खलन, बाढ़ और हिमस्खलन जैसी घटनाएं भी सामने आ सकती हैं. वहीं, उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्रों में इसके प्रभाव से घना कोहरा और शीत लहर जैसी स्थितियां भी बन सकती हैं.
गर्मी के मौसम में पश्चिमी विक्षोभ की संख्या और प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है. अप्रैल और मई के दौरान भी कुछ पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत तक पहुंचते हैं. कई बार इनका दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियों के साथ भी संपर्क होता है, जिससे कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और घने बादल बनने की स्थिति पैदा हो सकती है. मौसम वैज्ञानिक समय-समय पर पश्चिमी विक्षोभ की गतिविधियों पर नजर रखते हैं, क्योंकि इसका असर उत्तर भारत के मौसम और वर्षा के पैटर्न पर पड़ता है.
क्लाउड मैप में पूरा भारत सफेद दिखने का मतलब है घने मॉनसूनी बादलों का फैलाव. जून में कमजोर मॉनसून के बाद जुलाई में नया एक्टिव फेज शुरू हुआ है, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश हो रही है.
North India Weather: वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से उत्तर भारत में 18 से 22 जून तक हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है. पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में भारी बारिश हो सकती है जबकि दिल्ली-एनसीआर समेत कई इलाकों में 22 जून तक बारिश और आंधी-तूफान की संभावना है.
भारत के अधिकांश हिस्सों में सूखा पड़ रहा है, लेकिन प्रशांत महासागर में मौसमी सिस्टम बन रहे हैं. अगर ये बंगाल की खाड़ी पहुंचे तो 18-25 जुलाई में मॉनसून की वापसी हो सकती है.
झारखंड के अधिकतर जिलों में पश्चिमी विक्षोभ के कारण ठंड, शीतलहर और कोहरे का प्रभाव बना हुआ है. मौसम विभाग के अनुसार बिहार और यूपी से सटे जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है. पलामू में विजिबिलिटी मात्र 150 मीटर, जमशेदपुर में 700 मीटर और रांची में 800 मीटर तक सीमित रही। संथाल परगना क्षेत्र में भी विजिबिलिटी 400 मीटर दर्ज की गई है। सड़क परिवहन पर इसका प्रभाव पड़ा है जिससे NH मार्ग पर यातायात प्रभावित हुआ है.
North India Weather: पश्चिमी विक्षोभ के असर से उत्तर भारत के कई राज्यों में हल्की से मध्यम बारिश और तेज हवाओं के साथ आंधी-तूफान की गतिविधियां देखने को मिल रही हैं. दिल्ली-NCR, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और उत्तराखंड के आसमान में बादलों का डेरा है.
मौसम विभाग ने बताया है कि 31 जनवरी से 2 फरवरी के बीच एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होगा. इसके कारण पश्चिमी हिमालयी राज्यों जैसे जम्मू कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में जोरदार बर्फबारी होगी जबकि मैदानी राज्यों हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और मध्य भारत के कुछ हिस्सों में बारिश की संभावना है. नए विक्षोभ की ताकत पिछले दो से कम होने का अनुमान है और इसका सबसे अधिक प्रभाव 1 फरवरी को देखने को मिलेगा.
दो नए पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने जा रहे हैं. इनसे पहाड़ी इलाकों में बारिश और बर्फबारी की संभावना है. वहीं, मैदानी इलाकों खासकर दिल्ली-NCR में तापमान तेजी से बढ़ेगा. मौसम के इस बदलाव के बीच लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है.
दो पश्चिमी विक्षोभ हिमालयन क्षेत्र को प्रभावित करने वाले हैं. पहला विक्षोभ कल से प्रभाव डालना शुरू करेगा जबकि दूसरा मार्च में सक्रिय होगा. इन दोनों के कारण 26 से 27 तारीख को और उसके बाद भी हल्की बारिश और बर्फबारी का अनुमान है. इससे क्षेत्र में मौसम थोड़ा ठंडा और नम रहेगा. ये मौसम का सामान्य चक्र है जो हिमालयी क्षेत्रों में मार्च के अंत तक जारी रह सकता है.
पश्चिमी विक्षोभों की लगातार सक्रियता की वजह से उत्तर-पश्चिम भारत में बार-बार बारिश, तेज हवाएं और आंधी-तूफान का दौर बना हुआ है. इससे देश के कई हिस्सों में बारिश के हालात बन रहे हैं.