JD(U)
RJD
JSP
नोटा
NOTA
IND
AAP
PBI
BSP
JGJP
Bihar Election Result 2025 Live: निर्मली विधानसभा सीट पर JD(U) को दोबारा मिली जीत
Nirmali Assembly Election Result Live: निर्मली में RJD पीछे, JD(U) आगे! जानें वोटों का अंतर कितना
Bihar Election Results Live: बिहार चुनाव में राजनीतिक गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
Nirmali Election Results 2025 Live: निर्मली सीट पर उलटफेर! RJD भारी अंतर से पीछे
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Nirmali Vidhan Sabha Chunav Result Live: बिहार के कोसी क्षेत्र में पार्टियों/गठबंधनों का प्रदर्शन कैसा है?
निर्मली विधानसभा क्षेत्र बिहार के सुपौल जिले में स्थित है और सुपौल लोकसभा सीट के छह खंडों में से एक है. यह राघोपुर और सरायगढ़ भपटियाही प्रखंडों से सटा हुआ है. सात ही नेपाल सीमा के करीब है. नेपाल का विराटनगर यहां से महज 50 किलोमीटर उत्तर में स्थित है.
निर्मली सीट की स्थापना वर्ष 1951 में हुई थी और पहला चुनाव 1952 में कांग्रेस पार्टी ने जीता. इसके बाद यह सीट लंबे समय तक अस्तित्व में नहीं रही, लेकिन परिसीमन आयोग ने 2008 में इसे पुनर्जीवित किया. तब से अब तक यहां तीन विधानसभा चुनाव (2010, 2015 और 2020) हुए हैं, जिनमें जनता दल (यूनाइटेड) के अनिरुद्ध प्रसाद यादव विजयी रहे.
2010 में यादव ने कांग्रेस के विजय कुमार गुप्ता को 46,010 वोटों से हराया. 2015 में जेडीयू ने बीजेपी से गठबंधन तोड़कर अकेले चुनाव लड़ा और बीजेपी के राम कुमार राय को 23,951 वोटों से मात दी. 2020 में एनडीए में वापसी के बाद यादव ने राजद प्रत्याशी यदुवंश कुमार यादव को 43,922 वोटों से हराया.
संसदीय चुनावों में भी निर्मली सीट अहम भूमिका निभाती रही है. 2009 के लोकसभा चुनाव में जेडीयू को यहां 34,814 वोटों की बढ़त मिली थी. 2014 में एनडीए टूटने से यह बढ़त घटकर केवल 699 वोट रह गई. लेकिन 2019 और 2024 में एनडीए में वापसी के बाद जेडीयू ने क्रमशः 63,411 और 47,132 वोटों की बढ़त दर्ज की.
2020 विधानसभा चुनाव में निर्मली में कुल 2,96,989 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें 51,379 मुस्लिम (17.30%) और 41,222 अनुसूचित जाति के मतदाता (13.88%) थे. यादव जाति के मतदाता यहां का सबसे बड़ा समूह हैं, जिनकी संख्या 37,123 (12.50%) है. यह इलाका मुख्य रूप से ग्रामीण है, जहां शहरी मतदाता मात्र 4.62% हैं. 2020 में यहां 63.20% मतदान हुआ था. 2024 लोकसभा चुनाव तक मतदाताओं की संख्या बढ़कर 3,12,932 हो गई.
निर्मली का भूभाग समतल और कोसी नदी की बाढ़ से प्रभावित रहता है. 1934 के भूकंप के बाद कोसी का रुख बदल गया था, जिसने रेलवे लाइन और जमीन के बड़े हिस्से को डुबो दिया. 2008 में भी नदी का तटबंध टूटने से सुपौल और आसपास के जिले बुरी तरह प्रभावित हुए. आज भी बार-बार आने वाली बाढ़ और जमीन विवाद यहां की बड़ी समस्या है.
कृषि इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है, जहां धान, मक्का और दालें मुख्य फसलें हैं. लेकिन सिंचाई और कृषि-आधारित उद्योगों की कमी से विकास बाधित है. रोज़गार की तलाश में युवाओं का पलायन भी यहां की गंभीर समस्या है.
ढांचे और सुविधाओं के मामले में क्षेत्र पिछड़ा हुआ है. सड़कों की हालत खराब रहती है, शिक्षा और स्वास्थ्य संस्थान पर्याप्त संसाधनों व स्टाफ़ की कमी से जूझ रहे हैं. नेपाल सीमा क़रीब होने के बावजूद सीमा-पार व्यापार की संभावनाएं अभी भी पूरी तरह से नहीं साकार हो पाई हैं.
निर्मली, सुपौल जिला मुख्यालय से लगभग 20 किमी उत्तर में स्थित है. इसके आसपास के प्रमुख नगरों में सहरसा (70 किमी), मधेपुरा (60 किमी), मधुबनी (62 किमी) और दरभंगा (100 किमी) शामिल हैं. राज्य की राजधानी पटना यहां से लगभग 200 किमी दक्षिण-पश्चिम में है.
2025 विधानसभा चुनाव में BIHAR की NIRMALI सीट पर JD(U) के प्रत्याशी Aniruddha Prasad Yadav ने जीत दर्ज की. उन्होंने RJD के उम्मीदवार Baidyanath Mehta को 37310 मतों से हराया. Aniruddha Prasad Yadav को 118904 वोट मिले, जबकि RJD के उम्मीदवार 81594 वोट ही प्राप्त कर सके.
(अजय झा)
Yadubansh Kumar Yadav
RJD
Arjun Prasad Mehta
RLSP
Vijay Kumar Yadav
JAP(L)
Gautam Kumar
LJP
Nota
NOTA
Aman Kumar Samajsevi
IND
Manoj Kumar
IND
Gyanshankar Choudhary
IND
Dhiraj Kumar
PP
Ravindra Prasad Sah
RSMJP
Ramdev Sharma
PPI(D)
Shambu Choudhary
NCP
Krishnaavatar Singh
BCHP
Pappu Yadav
PSS
Gosai Mandal
JVKP
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले आरजेडी के दो विधायकों ने पार्टी से किनारा कर लिया है और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया है. दोनों विधायकों का इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है.
बिहार में चुनाव को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे पर वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी ने जमकर निशाना साधा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री सिर्फ चुनाव के वक्त बिहार आते हैं, मगर वादे पूरे नहीं करते. सहनी ने नीतीश कुमार को लेकर अमित शाह के बयान पर भी हमला बोला और एनडीए की मंशा पर सवाल खड़े किए.
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने एग्जिट पोल्स को सट्टा बाजार का खेल बताया. उन्होंने कहा कि मतदान खत्म होने के आधे घंटे में सरकार तय कर देना केवल दिखावा है. यादव ने दावा किया कि सीमांचल में बदलाव होगा और इंडिया गठबंधन को 19 से 23 सीटें मिलेंगी. दिल्ली ब्लास्ट पर उन्होंने इंटेलिजेंस फेलियर बताया और जिम्मेदारों के इस्तीफे की मांग की.
दिल्ली से पटना पहुंचे चिराग पासवान से जब एयरपोर्ट पर एनडीए से अलग होने को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, सच से इसका कोई संबंध नहीं है. चिराग ने कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, एनडीए में दरार की संभावना नहीं है. विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह झूठ फैलाकर भ्रम पैदा कर रहा है. वहीं उन्होंने इस दौरान सीट बंटवारे पर चर्चा न होने की बात भी स्पष्ट की.
अनंत सिंह इस बार मोकामा से चुनाव लड़ रहे हैं. शनिवार को वह चुनाव प्रचार के लिए एक गांव में पहुंचे थे. इस दौरान उनका मंच ही टूट गया. जिससे वह नीचे गिर गए.
शेखपुरा जिले में नामांकन के अंतिम दिन गहमागहमी रही. शेखपुरा विधानसभा से 13 और बरबीघा विधानसभा से 12 लोगों ने अपनी उम्मीदवारी दी है. बरबीघा विधानसभा के लिए एलजेपी से मधुकर कुमार ने नामांकन किया.
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला हुआ है. मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद नीतीश कुमार को Z प्लस कैटेगरी की सुरक्षा मिलेगी. बिहार सरकार के गृह विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी की है. इसी बीच नीतीश कुमार से जुड़ी एक और बड़ी खबर सामने आई है। 9 अप्रैल को नीतीश कुमार दिल्ली दौरे पर जाएंगे। 10 अप्रैल को राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ लेंगे। इसके साथ ही बिहार में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया इसके साथ ही शुरू हो जाएगी
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों के चुनावी खर्च के आंकड़े दिलचस्प कहानी सुना रहे हैं. चुनाव आयोग में जमा आंकड़ों पर नजर डालने पर मालूम होता है कि सबसे ज्यादा खर्च बीजेपी ने किए, और सबसे कम मार्क्सवादी कम्यनिस्ट पार्टी ने - लेकिन सबसे दिलचस्प बात यह है कि सबसे महंगा विधायक किसे पड़ा है?
बिहार विधानसभा चुनाव की गूंज यूपी की सियासी जमीन पर भी सुनाई पड़ रही है. इसकी वजह यह है कि सीएम योगी आदित्यनाथ बिहार में एनडीए को जिताने के लिए मशक्कत कर रहे थे तो सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने महागठबंधन के लिए पूरी ताकत झोंक दी. ऐसे में सवाल उठता है कि बिहार का यूपी कनेक्शन क्या है?
इंडिया टुडे ने चुनाव आयोग के डेटा की गहराई से जांच की और पाया कि SIR और चुनाव नतीजों के बीच कोई सीधा या समझ में आने वाला पैटर्न दिखता ही नहीं. हर बार जब एक ट्रेंड बनता लगता है, तुरंत ही एक दूसरा आंकड़ा उसे तोड़ देता है. बिहार चुनाव में NDA ने 83% सीटें जीतीं, पर SIR से जुड़े नतीजे अलग कहानी कहते हैं.