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ईरान पर अमेरिका-इजरायल का डबल गेम? ट्रंप का 'हाफ सीजफायर' क्यों नहीं टिका

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान युद्ध में Half Ceasefire का प्रस्ताव दिया, लेकिन यह सिर्फ 48 घंटे में टूट गया. एक्सपर्ट्स इसे ट्रंप और नेतन्याहू का डबल गेम बता रहे हैं. बाहर से शांति का दिखावा किया गया, लेकिन असल में ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमले जारी रखने के लिए समय खरीदा गया. ईरान ने जवाबी हमले तेज कर दिए.

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डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों मिलकर ईरान के खिलाफ डबल गेम खेल रहे हैं. (Photo: ITG)
डोनाल्ड ट्रंप और बेंजामिन नेतन्याहू दोनों मिलकर ईरान के खिलाफ डबल गेम खेल रहे हैं. (Photo: ITG)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध के बीच एक ‘आधा सीजफायर’ यानी हाफ सीजफायर का प्रस्ताव रखा था. इसमें कहा गया था कि पांच दिनों के लिए हमले रोक दिए जाएं, ताकि बातचीत हो सके और क्षेत्र में शांति लौटे. ट्रंप ने इसे मानवीय आधार पर पेश किया था. 

साथ ही ट्रंप ने दावा किया था कि इससे दोनों पक्षों को फायदा होगा. लेकिन यह सीजफायर शुरू होते ही टूट गया. ईरान ने कहा कि इजरायल ने हमले जारी रखे, जबकि इजरायल का आरोप था कि ईरान ने रॉकेट दागे. सिर्फ 48 घंटे में यह प्रस्ताव फेल हो गया.

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एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह सीजफायर कभी भी मजबूत आधार पर नहीं था. ट्रंप ने इसे सिर्फ समय खरीदने के लिए पेश किया था. असल में दोनों तरफ से हमले रुकने वाले नहीं थे. ईरान ने डिमोना न्यूक्लियर सेंटर के पास मिसाइल दागी और इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमले तेज कर दिए.

Trump half ceasefire

ट्रंप की टीम ने कहा कि हमने ईरान को चेतावनी दी थी, लेकिन ईरान ने इसे कमजोरी माना. परिणाम यह हुआ कि सीजफायर की कोई औपचारिक घोषणा या दोनों पक्षों का लिखित समझौता नहीं था. सिर्फ ट्रंप का ट्वीट और बयान था, जो युद्धविराम के लिए काफी नहीं था.

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एक्सपर्ट्स इसे ट्रंप-नेतन्याहू का डबल गेम क्यों मान रहे हैं?

कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह ‘हाफ सीजफायर’ एक स्मार्ट डबल गेम था. जॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. मार्क लिंच कहते हैं कि ट्रंप और नेतन्याहू दोनों जानते थे कि ईरान सीजफायर नहीं मानेगा. उन्होंने जानबूझकर ऐसा प्रस्ताव रखा जिसे ईरान ठुकरा दे.

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लिंच कहते हैं कि इससे दुनिया को लगे कि ईरान ही शांति नहीं चाहता, जबकि असल में इजरायल को और समय मिल गया ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर हमले जारी रखने के लिए.

भारतीय विदेश नीति विशेषज्ञ डॉ. सी. राजा मोहन कहते हैं कि ट्रंप घरेलू राजनीति के लिए शांति का चेहरा दिखाना चाहते थे, लेकिन नेतन्याहू को पूर्ण विजय चाहिए थी. दोनों ने मिलकर ईरान को कमजोर करने का खेल खेला. सीजफायर सिर्फ कवर था.

Trump half ceasefire

ट्रंप-नेतन्याहू की असली रणनीति क्या है?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि दोनों नेताओं का लक्ष्य ईरान को पूरी तरह कमजोर करना था. ट्रंप को लगता था कि अगर कुछ दिनों का ब्रेक लिया जाए तो ईरान दबाव में आएगा और बातचीत के लिए तैयार हो जाएगा. लेकिन नेतन्याहू चाहते थे कि हमले जारी रहें ताकि ईरान की परमाणु क्षमता खत्म हो जाए. 

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इस डबल गेम की वजह से सीजफायर सिर्फ कागजी रह गया. अमेरिकी मीडिया में भी इसे ट्रंप का पॉलिटिकल थिएटर कहा जा रहा है. नेतन्याहू ने कहा कि हम हिजबुल्लाह और ईरान को खत्म करने तक नहीं रुकेंगे, जबकि ट्रंप ने दुनिया को बताया कि वे शांति चाहते हैं.

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आगे क्या होगा?

अब युद्ध फिर तेज हो गया है. ईरान ने जवाबी हमले किए और इजरायल ने लेबनान में और गहराई तक घुसपैठ बढ़ा दी. एक्सपर्ट्स चेतावनी दे रहे हैं कि अगर यह डबल गेम जारी रहा तो युद्ध पूरे मिडिल ईस्ट में फैल सकता है. डॉ. लिंच कहते हैं कि ट्रंप और नेतन्याहू ने शांति का नाटक किया, लेकिन असल में उन्होंने ईरान को और उकसाया. अब दोनों पक्ष और ज्यादा हिंसक हो गए हैं.  
 

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