ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच तनाव कई वर्षों से चला आ रहा है और समय-समय पर यह सैन्य हमलों, ड्रोन स्ट्राइक और मिसाइल हमलों के रूप में सामने आता रहा है. यह टकराव सीधे युद्ध की बजाय अक्सर “प्रॉक्सी वॉर” और सीमित सैन्य कार्रवाई के रूप में दिखता है.
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया, जिसमें अली हुसैनी खामनेई की मृत्यु हो गई. क्षेत्रीय टकराव और प्रॉक्सी संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है (US, Israel attack on Iran). ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से वैचारिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद रहे हैं. इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान इजरायल की नीतियों की खुलकर आलोचना करता रहा है. अमेरिका, जो इजरायल का प्रमुख सहयोगी है, ईरान पर प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव की नीति अपनाता रहा है (US Israel Attack on Iran).
बात करें तनाव की जड़ की तो इजरायल और अमेरिका को आशंका है कि ईरान परमाणु हथियार विकसित कर सकता है, जबकि ईरान इसे शांतिपूर्ण बताता है. ईरान क्षेत्र में अपने सहयोगी संगठनों (जैसे हिज्बुल्लाह, हमास) का समर्थन करता है, जिसे इजरायल अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है. अमेरिका लंबे समय से इजरायल का करीबी सहयोगी है और उसकी सुरक्षा के समर्थन में खड़ा रहता है.
इजरायल ने कई बार सीरिया और अन्य जगहों पर ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया है. ईरान ने ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए जवाबी कार्रवाई की है. अमेरिका ने भी क्षेत्र में अपने ठिकानों पर हमलों के बाद ईरान समर्थित समूहों पर एयरस्ट्राइक की हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सीधा युद्ध छिड़ता है तो इसका असर पूरे मध्य पूर्व, तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है. खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी और इजरायल की उन्नत रक्षा प्रणाली (जैसे आयरन डोम) के कारण स्थिति बेहद संवेदनशील बनी रहती है.
अभी तक तीनों देशों के बीच पूर्ण युद्ध की स्थिति नहीं बनी है, लेकिन तनाव लगातार बना हुआ है. कूटनीतिक प्रयास, अंतरराष्ट्रीय दबाव और क्षेत्रीय समीकरण इस बात पर निर्भर करेंगे कि हालात शांत होते हैं या और बिगड़ते हैं.
अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के लिए एक नई कूटनीतिक कोशिश शुरू होने वाली है. बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच गुरुवार को बातचीत का एक नया दौर आयोजित किया जा सकता है, जिससे शांति की उम्मीद जगी है.
डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज में अमेरिकी नाकेबंदी के दावे के बीच एक प्रतिबंधित चीनी टैंकर का गुजरना कई सवाल खड़े करता है. होर्मुज स्ट्रेट से जहाज का निकलना बताता है कि अमेरिकी दबाव के बावजूद व्यापार पूरी तरह नहीं रुका है और नाकेबंदी उतनी असरदार नहीं दिख रही.
पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता के विफल होने के बाद वैश्विक तनाव चरम पर है. इसी बीच चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने चार सूत्रीय शांति प्रस्ताव पेश कर कूटनीतिक दांव चला है. होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते संकट, अमेरिकी नाकेबंदी और ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल के बीच यह प्रस्ताव अहम है.
जिस हिसाब से ग्लोबल तनाव बढ़ रहा है, उस हिसाब से सोने-चांदी के भाव में तेजी आनी चाहिए, लेकिन सोना और चांदी के भाव में गिरावट देखी जा रही है. अब इसी चीज को लेकर एक्सपर्ट की चेतावनी आई है.
ईरान-अमेरिका संघर्ष के चलते दुबई के प्रॉपर्टी बाजार में गिरावट दर्ज की गई है, जिससे वैश्विक निवेशकों का रुझान अब भारत की ओर बढ़ने लगा है. जानकारों का मानना है कि इस मंदी का सीधा फायदा गुरुग्राम, मुंबई और बेंगलुरु जैसे शहरों के लग्जरी रियल एस्टेट मार्केट को मिल सकता है.
मिडिल ईस्ट में शांती बहाली के लिए वॉशिंगटन में लेबनान और इज़रायल के राजदूतों के बीच बैठक होगी. युद्धविरान समेत देश हित के सभी मामलों की चर्चा होगी. मार्को रुबियो भी वार्ता में शामिल होंगे. दोनों देशों के प्रतिनिधियों की आमने-सामने बातचीत होगी. देखें नॉनस्टॉप खबरे.
चीन ने होर्मुज नाकेबंदी पर अमेरिका को चेताते हुए कहा कि हमारे मामले में दखल ना दे. ईरान से व्यापार और ऊर्जा समझौतों को लागू करने की बात कही. चीनी जहाजों की आवाजाही जारी रखने का ऐलान किया. साथ ही किसी भी बाहर दखलअंदाजी का भी विरोध किया. देखें वीडियो.
ईरान के एनरिच्ड यूरेनियम पर तनाव चरम पर है. रूस इसे अपने पास सुरक्षित रखने को तैयार है. ईरान 5 साल तक अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम सस्पेंड करने को तैयार है. लेकिन अमेरिका इसे छीनने या पूरी तरह हटाने पर अड़ा है. होर्मुज ब्लॉकेड इसी मुद्दे से जुड़ा है. अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ.
पाकिस्तान और सऊदी अरब के रक्षा समझौते में लीक दस्तावेजों से पता चला है कि ये डील एकतरफा है. इसके तहत पाकिस्तान तो सऊदी अरब की रक्षा के लिए अपनी सेना भेजेगा, लेकिन सऊदी अरब की ओर से ऐसी कोई प्रतिबद्धता नहीं है.
अमेरिकी नौसेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकेबंदी शुरु कर दी है. इसकी शुरुआत होते ही इसका असर दिखने लगा है. 2 तेल टैंकर्स ने होर्मुज के पास से अपना रास्ता बदल दिया. सऊदी अरब ने अमेरिका पर नाकेबंदी हटाने का दबाव बनाया है. खाड़ी देश इस बात से चिंतित हा कि इस कदम से ईरान तनाव और बढ़ा सकता है.
अमेरिका की होर्मुज नाकाबंदी (US Strait of Hormuz Blockade) से ईरान की लाइफलाइन संकट में है. रिपोर्ट की मानें, तो इसकी वजह से ईरान को हर रोज 435 मिलियन डॉलर यानी करीब 4000 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान उठाना पड़ सकता है.
अमेरिका-ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद जेडी वेंस ने नया बयान देते हुए कहा है कि अमेरिका ने अपना आखिरी ऑफर ईरान को दे दिया है और समझौते का फैसला अब ईरान के हाथ में है. वहीं नोएडा में कर्मचारियों के प्रदर्शन में पुलिस एक्शन तेज हो गया है. पुलिस ने 300 से ज्यादा लोग गिरफ्तार किए है और 100 लोग हिरासत में लिए है.
US-Israel-Iran War LIVE Updates: होर्मुज़ स्ट्रेट में अमेरिकी नाकेबंदी लागू होते ही US-ईरान तनाव और ज्यादा बढ़ गया है, ईरान ने इसे गैरकानूनी बताया है. तेल कीमतों में उछाल आया है और वैश्विक शक्तियां समुद्री रास्तों की सुरक्षा और कूटनीति पर जोर दे रही हैं.
ईरान की राजधानी तेहरान में अमेरिका के खिलाफ सड़कों पर उतर कर लोगों ने जोरदार प्रदर्शन किया. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर खासकर ये प्रदर्शन किया गया. लोगों ने सड़कों पर उतरकर अपनी नाराजगी जाहिर की. वहीं ट्रंप ने नई धमकी देते हुए कहा है ईरान के बाद अगली बारी क्यूबा की है.
अमेरिका-ईरान के बीच इस्लामाबाद में शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिका ने अपने धमकियां दोबारा तेज कर दी है तो वहीं ईरान ने भी उनके धमकी पर पलटवार किया है. हाल ही में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बयान देते हुए कहा कि समझौते का फैसला अब ईरान के हाथ में ही है और आगे की बातचीत ईरान पर निर्भर करेगी.
ईरान ने मिडिल-ईस्ट के पांच बड़े देशों बहरीन, सऊदी अरब, कतर, यूएई और जॉर्डन से युद्ध में हुए नुकसान के लिए मुआवजा मांगा है. ईरान का आरोप है कि ये देश अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ हमलों में शामिल थे.
डोनाल्ड ट्रंप के ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी के जवाब में यमन ने लाल सागर में बाब-अल-मंदेब को बंद करने की चेतावनी दी है. अगर ये मार्ग बंद होता है, तो ग्लोबल एनर्जी सप्लाई ठप हो सकती है और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन को भारी नुकसान होगा.
अमेरिका और ईरान के बीच चल रही कूटनीतिक चर्चाओं को लेकर बड़ी खबर आई है. अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया है कि बातचीत में काफी सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि भविष्य की दिशा अब पूरी तरह ईरान के फैसलों पर टिकी है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की होर्मुज पर धमकी के बाद ईरान ने होर्मुज पर अपनी प्रतिक्रिया दी है. ईरानी सेना के प्रवक्ता ने कहा कि ईरान होर्मुज में सुरक्षा सुनिक्षित करना जारी रखेगा. ईरान ने एक बार फिर बयान देते हुए कहा कि होर्मुज से दुशमनों के जहाजों को निकलने की इजाजत नहीं.
इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फेल होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अब ईरान को नई धमकी दी है. उन्होनें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर आर्टिकल साझा कर लिखा कि अमेरिका के पास युद्धपोत से ईरान की घेराबंदी का विकल्प मौजूद है.
चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून की चेतावनी सोमवार को अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी की शुरुआत के साथ ही आई.