इजराइल (Israel) पश्चिम एशिया में एक देश है . इसकी सीमा उत्तर में लेबनान से, उत्तर पूर्व में सीरिया से, पूर्व में जॉर्डन से, दक्षिण में लाल सागर से, दक्षिण पश्चिम में मिस्र से, पश्चिम में भूमध्य सागर से, पूर्व में वेस्ट बैंक और दक्षिण पश्चिम में गाजा पट्टी और फिलिस्तीनी क्षेत्रों से लगती है. तेल अवीव देश का आर्थिक और तकनीकी केंद्र है, जबकि इसकी सरकार की सीट यरूशलेम की घोषित राजधानी में है, हालांकि पूर्वी यरूशलेम पर इजरायल की संप्रभुता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है.
28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमला कर दिया. हालांकि पूर्ण पैमाने के युद्ध की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन क्षेत्रीय टकराव और प्रॉक्सी संघर्षों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता बढ़ा दी है (US, Israel attack on Iran).
ईरान और इजरायल के बीच लंबे समय से वैचारिक और सुरक्षा संबंधी मतभेद रहे हैं. इजरायल ईरान के परमाणु कार्यक्रम को अपने लिए खतरा मानता है, जबकि ईरान इजरायल की नीतियों की खुलकर आलोचना करता रहा है. अमेरिका, जो इजरायल का प्रमुख सहयोगी है, ईरान पर प्रतिबंधों और कूटनीतिक दबाव की नीति अपनाता रहा है.
अपनी स्वतंत्रता के बाद, इजराइल लगभग तुरंत ही अपने पांच पड़ोसी अरब राज्यों के साथ संघर्ष में उलझ गया, जिनकी सेनाएं फिलिस्तीन के क्षेत्र में प्रवेश करने लगीं. इजराइल और फिलिस्तीन के बीच हमेशा से विवाद रहा है (Israel Palestine Conflict).
इजराइल दक्षिणी लेवंत में स्थित है, एक क्षेत्र जिसे ऐतिहासिक रूप से कनान, इजराइल की भूमि और पवित्र भूमि के रूप में जाना जाता है. पहली सहस्राब्दी ईसा पूर्व की शुरुआत में, नव-असीरियन और नव-बेबीलोनियन साम्राज्यों के पतन से पहले, इजराइल और यहूदी के इजराइली साम्राज्य उभरे थे.
इजराइल की एकमात्र आधिकारिक भाषा हिब्रू है. 2018 तक, अरबी भी इजराइल राज्य की दो आधिकारिक भाषाओं में से एक थी. इजराइल में पवित्र भूमि का एक बड़ा हिस्सा शामिल है, जो यहूदी धर्म, ईसाई धर्म, इस्लाम, सामरीवाद, ड्रुज और बहाई सहित सभी इब्राहीम धर्मों के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र है.
इजरायली सेना ने बॉर्डर के पास इस क्षेत्र के लेबनानी गांवों को नष्ट कर दिया है. इसका उद्देश्य उत्तरी इजरायल के शहरों को हिज्बुल्लाह के हमलों से बचाना है.
इजरायल के यरूशलम और तेल अवीव में युद्ध के खिलाफ भारी विरोध प्रदर्शन किया गया. सड़कों पर उतरे लोगों ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू पर देश को युद्ध में धकेलने और तबाही की ओर ले जाने का आरोप लगाया. प्रदर्शनकारियों ने वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बस्तियों पर हमले का भी विरोध किया. देखें दुनिया आजतक.
ईरान में सुरक्षा एजेंसियों ने जासूसी के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. यह कार्रवाई देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में की गई. इन लोगों पर अमेरिका-इजरायल से जुड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा होने का आरोप है.
इजरायल द्वारा सोमालीलैंड में अपना राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा कर दिया है. सऊदी, कतर सहित 16 देशों ने चेतावनी दी है कि यह कदम अफ्रीका के हॉर्न क्षेत्र की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है.
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की नाकाबंदी के बीच संयुक्त राष्ट्र महासभा में इजरायली राजदूत ने चीन, फ्रांस और पाकिस्तान पर ईरान के साथ सीक्रेट डील करने का आरोप लगाया और पूछा कि आपने ईरान को जहाजों को सुरक्षित गुजरने के लिए कितना पैसा दिया.
हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने सीजफायर को को लेकर साफ कर दिया है कि यह तभी संभव होगा जब इजरायल भी इसका पालन करेगा. कासिम ने कहा है कि हमें दुश्मन पर भरोसा नहीं है.
US-Israel-Iran War LIVE Updates: ईरान और अमेरिका के बीच बातचीत तो शुरू हुई है, लेकिन तेहरान ने संवर्धित यूरेनियम देने से साफ मना कर दिया है. वहीं, समंदर में तनाव बढ़ाते हुए ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' को बंद कर दिया और एक भारतीय जहाज को बीच रास्ते से लौटने का आदेश दिया है.
लेबनान पर हमले रोकने का सख्त आदेश देने के एक दिन बाद ही डोनाल्ड ट्रंप के सुर बदल गए. उन्होंने इजरायल को अमेरिका का मजबूत सहयोगी बताते हुए उसकी जमकर तारीफ की. इस बीच सीजफायर लागू है, लेकिन जमीनी हालात अब भी नाजुक बने हुए हैं और क्षेत्र में तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है.
ईरान के उप विदेश मंत्री सईद खतीबजादेह ने बताया कि अगले दौर की वार्ता के लिए फिलहाल कोई तारीख तय नहीं की गई है. उन्होंने अमेरिका के मैक्सिमलिस्ट रुख को वार्ता में देरी का कारण बताया. खतीबजादेह ने अमेरिकी पक्ष पर कूटनीति में समय बर्बाद करने का आरोप भी लगाया.
ईरानी स्पीकर ग़ालिबफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप के दावों को झूठ बताया है. इसके साथ तेहरान ने चेतावनी दी है कि अमेरिकी दबाव जारी रहा तो होर्मुज़ स्ट्रेट और ग्लोबल शिपिंग पर असर पड़ सकता है.
राष्ट्रपति जोसेफ ने उत्तरी इज़राइल पर ईरान समर्थित हिजबुल्लाह की ओर किए गए रॉकेट हमलों की निंदा की. इसके बाद ही इजरायल ने लेबनान में भारी बमबारी की थी.
मिडिल-ईस्ट में कम होते तनाव के बीच डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायल को लेबनान पर हमले से रोक दिया है. ट्रंप ने इजरायल को चेतावनी दी है कि अब लेबनान पर बमबारी नहीं होेनी चाहिए.
पिछले वीकेंड इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता हुई, लेकिन वार्ता विफल रही. पाकिस्तान ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को लौटते वक्त इजरायली हमले का डर था. इसे देखते हुए पाकिस्तानी वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को विशेष सुरक्षा प्रदान की.
मिडल-ईस्ट के युद्ध का भारत पर गहरा असर पड़ रहा है. ये भारत की ईंधन आपूर्ति में कटौती कर रहा है, उसकी निर्यात कमाई को कम कर रहा है, व्यापार मार्गों को बाधित कर रहा है और उसकी अर्थव्यवस्था पर दबाव डाल रहा है.
लेबनान और इजरायल के बीच आखिरकार युद्धविराम हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसकी जानकारी दी. लेबनान के राष्ट्रपति और इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू के बीच बातचीत हुई. दोनों नेताओं के बीच 10 दिन के युद्धविराम पर सहमती बनी है. देखें दुनिया आजतक.
'कूटनीति' में आज बात उन दो भौगोलिक मोर्चों की, जहाँ समीकरण तेज़ी से बदल रहे हैं. एक तरफ ट्रंप ने एलान किया है कि इज़रायल और लेबनान के नेता 34 साल में पहली बार बात करेंगे, लेकिन दूसरी तरफ लेबनान पर बमबारी थमी नहीं है. आखिर क्या इज़रायल की नज़र सिर्फ हिज़्बुल्लाह पर है, या इसके पीछे कोई बहुत बड़ा 'ग्रेटर इज़रायल' प्लान काम कर रहा है?
अमेरिका की पहल पर इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिन का सीजफायर लागू हुआ है, लेकिन जमीनी हालात अभी भी नाजुक बने हुए हैं. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का 'सिक्योरिटी जोन' बना रहेगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस सीजफायर की घोषणा करते हुए कहा कि अभी-अभी मेरी लेबनान के अत्यंत सम्मानित राष्ट्रपति जोसेफ़ आउन और इज़राइल के प्रधानमंत्री बीबी नेतन्याहू के साथ बहुत ही बेहतरीन बातचीत हुई. दोनों देशों के नेताओं ने शांति स्थापित करने के लिए सीजफायर पर सहमति जताई है.
अमेरिका की ओर से ईरान को एक बार फिर से चेतावनी मिली है. अमेरिकी रक्षा मंत्री ने कहा है कि ईरान के हर कदम पर नजर रखी जा रही है. वह होर्मुज में जहाजों को धमका रहा है. यह एक तरह की सीधी तौर से समुद्री लूट है. आने वाले समय में वह अगर सही फैसला नहीं करता तो फिर से सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी.
ट्रंप ने नेतन्याहू के साथ मिलकर इस युद्ध में हिस्सा लिया. लेकिन न तो ट्रंप ने इस जंग के लक्ष्य को परिभाषित किया और न ही इससे बाहर निकलने की किसी रणनीति पर कोई विचार किया. यदि ईरान जंग पर अड़ जाता है और इस संघर्ष को अमेरिकी मध्यावधि चुनावों तक खींचते हैं तो ऊर्जा संकट और गहरा सकता है.
इजरायल और लेबनान के बीच दशकों से चली आ रही दुश्मनी अब कूटनीतिक मेज पर सुलझती दिख रही है. इजरायली मंत्री गिला गामलियेल के मुताबिक, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन आज सीधी बातचीत करेंगे. 30 साल से भी अधिक वक्त के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं के बीच ये पहला सीधा संवाद होगा.