इजरायल के वित्त मंत्री बेजालेल स्मोत्रिच ने कहा कि इजरायल को अपनी सीमा को लेबनान के लिटानी नदी तक बढ़ाना चाहिए. यह बयान इजरायल के लेबनान पर बढ़ते हमलों के बीच आया है. स्मोत्रिच ने रेडियो पर कहा कि नई इजरायली सीमा लिटानी नदी होनी चाहिए.
यह अब तक किसी बड़े इजरायली नेता का सबसे साफ बयान है कि वे लेबनान की जमीन पर कब्जा करना चाहते हैं. इजरायल का कहना है कि यह हमला ईरान समर्थित हिजबुल्लाह के खिलाफ है, लेकिन लेबनान इसे अपनी जमीन पर कब्जे की कोशिश बता रहा है.
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लेबनान कब युद्ध में घसीटा गया?
लेबनान को 2 मार्च 2026 को इस युद्ध में खींचा गया जब हिजबुल्लाह ने इजरायल पर मिसाइलें दागीं. उसके बाद इजरायल ने लिटानी नदी के दक्षिण में रहने वाले सभी लोगों को वहां से निकलने का आदेश दे दिया था. इजरायल का कहना है कि यह इलाका हिजबुल्लाह का गढ़ है. यहां से इजरायल पर रॉकेट हमले होते हैं.

इजरायली हवाई हमलों और जमीनी कार्रवाई में अब तक 1000 से ज्यादा लोग मारे गए हैं. 10 लाख से ज्यादा लोग अपने घर छोड़ चुके हैं. सोमवार को बेरूत के दाहिया इलाके में भी तीन धमाके हुए. इजरायल ने कहा कि वहां हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया गया. एक हमले में ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के कुद्स फोर्स का एक कमांडर भी मारा गया.
स्मोत्रिच का बयान क्यों जरूरी है?
स्मोत्रिच एक छोटी दक्षिणपंथी पार्टी के नेता हैं जो प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार में हैं. उन्होंने कहा कि लेबनान में सैन्य अभियान सिर्फ हिजबुल्लाह को खत्म करने तक नहीं रुकना चाहिए, बल्कि इजरायल की सीमा बदलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि हर कमरे और हर चर्चा में मैं यही कहता हूं कि नई इजरायली सीमा लिटानी नदी होनी चाहिए. रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने पहले भी कहा था कि अगर हिजबुल्लाह ने हथियार नहीं डाले तो लेबनान को जमीन गंवानी पड़ सकती है. स्मोत्रिच ने गाजा के लिए भी ऐसे बयान दिए थे.

लेबनान की जमीन पर कब्जा क्यों?
इजरायल ने लिटानी नदी के ऊपर सभी पुलों को नष्ट कर दिया है ताकि दक्षिण लेबनान से उत्तर लेबनान का संपर्क कट जाए. सड़कें और छोटे पुल भी तोड़ दिए गए हैं. लेबनान के एक कस्बे के मेयर हन्ना अमील ने बताया कि अब सामान लाने के लिए हफ्ते में एक-दो बार लेबनानी सेना के काफिले की मदद लेनी पड़ती है.
बिजली-पानी और डीजल की भारी कमी हो गई है. अगर उत्तर जाने वाले सभी रास्ते बंद हो गए तो इलाके में क्या होगा, यह सोचकर लोग डर रहे हैं. इजरायल का कहना है कि यह सब हिजबुल्लाह के ठिकानों को नष्ट करने के लिए जरूरी है. नागरिकों को बचाने के लिए निकासी का आदेश दिया गया है.
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इजरायल ने लेबनान पर कब कब्जा किया था?
लेबनान को इजरायल के हमलों का लंबा इतिहास है. 1978 से लेकर अब तक कई बार इजरायली सेना लेबनान में घुसी है. 1982 से 2000 तक इजरायल ने दक्षिण लेबनान पर कब्जा रखा था. लेबनान अब भी उस पुराने दर्द को याद करता है.

लेबनान सरकार कह रही है कि वह विदेशी देशों से मदद मांग रही है ताकि इजरायल पर दबाव बनाया जाए. लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन ने सीधी बातचीत का प्रस्ताव दिया है. लेबनान सरकार ने हिजबुल्लाह के गतिविधियों पर रोक लगा दी है और कह रही है कि वह इजरायल से सीधी बात करना चाहती है.
संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख ने इजरायल की कार्रवाई की आलोचना की है. अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार सैन्य हमलों में नागरिक इमारतों, पुलों और घरों पर हमला नहीं किया जा सकता. इजरायल कह रहा है कि वह केवल हिजबुल्लाह को निशाना बना रहा है. नागरिकों को बचाने के लिए निकासी का आदेश दे रहा है. लेकिन लेबनान और अंतरराष्ट्रीय संगठन इसे जमीन हड़पने की कोशिश बता रहे हैं.
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आगे क्या होगा?
स्मोत्रिच का बयान लेबनान में बहुत गूंज रहा है. अगर इजरायल लिटानी नदी तक सीमा बढ़ाने की कोशिश करता है तो युद्ध और लंबा चल सकता है. लेबनान सरकार विदेशी दबाव से युद्ध रोकने की उम्मीद कर रही है. फिलहाल इजरायल की सेना दक्षिण लेबनान में छापेमारी जारी रखे हुए है. हिजबुल्लाह लड़ाकों को पकड़ रही है.