पश्चिमी प्रशांत महासागर में इस समय मौसमी तबाही चल रही है. एक साथ कई ट्रॉपिकल चक्रवात एक्टिव हैं, जो क्षेत्र के देशों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर रहे हैं. इनमें तूफान डॉल्फिन चीन के पूर्वी तट पर लैंडफॉल कर चुका है. ट्रॉपिकल स्टॉर्म चान-होम जापान की मुख्य भूमि की ओर बढ़ रहा है.
मारियाना द्वीप समूह के आसपास तीन और सिस्टम घूम रहे हैं. यह स्थिति न केवल स्थानीय स्तर पर भारी बारिश, तेज हवाओं और बाढ़ का खतरा पैदा कर रही है, बल्कि भारत के मॉनसून पर भी प्रभाव डाल सकती है. तूफान डॉल्फिन इस साल चीन से टकराने वाला सबसे मजबूत उष्णकटिबंधीय चक्रवात साबित हुआ है. यह 9 अगस्त 2026 को शाम करीब 5:30 बजे झेजियांग प्रांत के युहुआन के पास लैंडफॉल किया.
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लैंडफॉल के समय इसकी अधिकतम निरंतर हवाओं की गति लगभग 150-151 किलोमीटर प्रति घंटा थी, जो सैफिर-सिंपसन स्केल पर कैटेगरी 1 तूफान के बराबर है. तूफान ने लगभग एक घंटे बाद वेन्झोउ के पास दूसरा लैंडफॉल भी किया. इससे पहले यह जापान के दक्षिणी ओकिनावा प्रांत से गुजर चुका था, जहां इसने बिजली कटौती और कुछ लोगों को घायल करने का कारण बना.
चीन में 10 लाख लोगों को शिफ्ट किया गया
चीन में इस तूफान के कारण व्यापक तैयारी की गई. दस लाख से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया. वेन्झोउ शहर में अकेले 9 लाख से ज्यादा लोगों को स्थानांतरित किया गया. हजारों आपातकालीन आश्रय खोले गए.

शंघाई में भी हजारों लोगों को निकाला गया और लगभग 1400-1500 उड़ानें रद्द कर दी गईं. अधिकारियों ने उच्चतम स्तर का रेड अलर्ट जारी किया था, जो भारी बारिश, तेज हवाओं, बाढ़ और भूस्खलन के खतरे को देखते हुए आवश्यक था. तूफान के बाद यह कमजोर होकर ट्रॉपिकल स्टॉर्म में बदल गया और अंतर्देशीय क्षेत्रों की ओर बढ़ रहा है, जहां बुधवार तक भारी बारिश का खतरा बना हुआ है.
झेजियांग, जियांग्सू, अनहुई और आसपास के क्षेत्रों में 200-500 मिलीमीटर तक बारिश हो सकती है, जिससे नदियों में बाढ़ और पहाड़ी इलाकों में लैंडस्लाइड का जोखिम बढ़ गया है. डॉल्फिन की विशेषता यह है कि यह अंतरराष्ट्रीय रेखा के पास बना और लंबी दूरी तय करते हुए चीन पहुंचा.
इसका जीवनकाल औसत तूफान से कई गुना लंबा रहा. इसने सुपर तूफान की तीव्रता भी हासिल की थी. यह घटना जलवायु परिवर्तन के हिसाब से भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि गर्म समुद्री सतह के तापमान ऐसे शक्तिशाली और लंबे समय तक चलने वाले तूफानों को बढ़ावा देते हैं.
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चक्रवाती तूफान चान-होम: जापान की ओर बढ़ता खतरा
इस बीच, चक्रवाती तूफान चान-होम जापान की ओर बढ़ रहा है. यह उत्तर-पश्चिमी प्रशांत में 14वें नंबर का सिस्टम है. जापान के पूर्वोत्तर हिस्सों, विशेष रूप से होंशू द्वीप के मध्य या उत्तर-पूर्वी भागों की ओर बढ़ रहा है. यह मंगलवार शाम या रात तक जापान की मुख्य भूमि पर लैंडफॉल कर सकता है. उसके पास से गुजर सकता है. वर्तमान में इसकी हवाओं की गति 40-50 नॉट्स के आसपास है. यह धीरे-धीरे मजबूत हो सकता है, हालांकि लैंडफॉल के समय यह कमजोर पड़ सकता है.

जापान में इस तूफान से भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्री लहरों का खतरा है. यह पहले से सक्रिय अन्य सिस्टमों के साथ मिलकर क्षेत्र में मौसम को और अस्थिर बना रहा है. अमेरिकी सैन्य ठिकानों सहित कई क्षेत्रों में सतर्कता बरती जा रही है. चान-होम के गुजरने के बाद यह जापान सागर की ओर बढ़ते हुए ट्रॉपिकल डिप्रेशन में बदलने की संभावना है. जापान जैसे विकसित देश में तैयारी बेहतर होती है, फिर भी बाढ़, भूस्खलन और यातायात से निपटना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.
मारियाना द्वीप समूह के आसपास तीन और सिस्टम
मारियाना द्वीप समूह (जिसमें गुआम और उत्तरी मारियाना द्वीप शामिल हैं) के आसपास भी कई उष्णकटिबंधीय प्रणालियां सक्रिय हैं या हाल ही में सक्रिय रही हैं. इनमें ट्रॉपिकल स्टॉर्म पेइलोउ और अन्य डिस्टर्बेंस शामिल हैं, जो क्षेत्र में घूम रहे हैं.
पश्चिमी प्रशांत में एक साथ कई सिस्टम सक्रिय होना असामान्य रूप से व्यस्त मौसम का संकेत देता है. इस साल पहले भी सुपर तूफान बावी जैसे शक्तिशाली तूफान मारियाना क्षेत्र से गुजर चुके हैं, जिन्होंने गुआम और आसपास के द्वीपों को प्रभावित किया था.
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ये सिस्टम गर्म समुद्री जल और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण बन रही हैं. अल-नीनो की वजह से इस क्षेत्र में तूफानों की संख्या और तीव्रता बढ़ा सकती हैं. स्थानीय स्तर पर ये द्वीप छोटे होने के कारण तूफानों से आसानी से प्रभावित होते हैं, जिससे बिजली, पानी और संचार व्यवस्था बाधित हो सकती है.
कुल मिलाकर, पश्चिमी प्रशांत में एक साथ डॉल्फिन, चान-होम, पेइलोउ और अन्य सिस्टमों का सक्रिय होना मौसम विज्ञानियों के लिए निगरानी का विषय है.
भारतीय मॉनसून पर संभावित प्रभाव
अब सवाल उठता है कि इतनी दूर पश्चिमी प्रशांत में हो रहे इन तूफानों का भारत के मॉनसून पर क्या असर पड़ सकता है. सीधे तौर पर ये तूफान भारत की ओर नहीं बढ़ रहे, लेकिन वायुमंडलीय सर्कुलेशन के माध्यम से अप्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं. वैज्ञानिक अध्ययनों से पता चलता है कि पश्चिमी उत्तर प्रशांत में सक्रिय चक्रवाती तूफान बंगाल की खाड़ी में लो-प्रेशर एरिया के डेवलपमेंट को प्रभावित कर सकते हैं.

जब प्रशांत में शक्तिशाली तूफान बनते हैं, तो वे नमी को पूर्वी दिशा की ओर खींच सकते हैं, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप की ओर आने वाली नमी कम हो जाती है. इससे मॉनसून ट्रफ की स्थिति बदल सकती है. बंगाल की खाड़ी में नए लो प्रेशर सिस्टम या डिप्रेशन बनने में बाधा आ सकती है.
ये लो प्रेशर सिस्टम भारत के मध्य, पूर्वी और उत्तरी हिस्सों में बारिश लाने वाले मुख्य कारक होते हैं। परिणामस्वरूप, कुछ समय के लिए मॉनसून में कमजोरी या ब्रेक की स्थिति पैदा हो सकती है, खासकर अगर तूफान लंबे समय तक सक्रिय रहे.
विशेषज्ञों का कहना है कि डॉल्फिन जैसे एक तूफान से लंबे समय तक मॉनसून प्रभावित होने की संभावना कम है. प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि तूफान कितनी देर तक तीव्र रहता है. कहां जाता है. कुछ मामलों में, ये सिस्टम मॉनसून हवाओं को मजबूत भी कर सकते हैं, जिससे पश्चिमी तट पर बारिश बढ़ सकती है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ऐसी दूरस्थ घटनाओं पर नजर रखता है, क्योंकि अल-नीनो और प्रशांत तूफान मिलकर मॉनसून के पैटर्न को बदल सकते हैं. इस साल पहले भी प्रशांत गतिविधि से मॉनसून प्रभावित होने के संकेत मिले थे.
कुल मिलाकर, ये तूफान वैश्विक जलवायु प्रणाली की जटिलता को दर्शाते हैं. पश्चिमी प्रशांत की गतिविधि भारतीय मॉनसून को अस्थायी रूप से प्रभावित कर सकती है, लेकिन सटीक प्रभाव का आकलन जारी निगरानी से ही संभव है. किसानों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों को सतर्क रहना चाहिए.