तूफान एक प्राकृतिक वातावरण या खगोलीय पिंड के वातावरण की एक अशांत स्थिति है. इस दौरान तेज हवाएं, बवंडर, ओले गिरना, गरज और बिजली के साथ आंधी, बारिश, भारी बर्फीली बारिश या तूफान, चक्रवाती हवाओं का सामना करना पड़ता है (Storm).
तूफान तब बनते हैं जब कम दबाव का केंद्र उसके आसपास के उच्च दबाव की प्रणाली के साथ विकसित होता है. इस स्थित में हवाओं का निर्माण होता है और इसके परिणामस्वरूप क्यूम्यलोनिम्बस (cumulonimbus) जैसे तूफानी बादलों का निर्माण होता है. क्यूम्यलोनिम्बस बादल अक्सर गरज भरे तूफान के समय आकाश में बने घने बादल होते हैं (Creation of Storm).
तूफान केवल पृथ्वी पर ही नहीं आते; पर्याप्त वातावरण वाले अन्य ग्रह भी तूफानी मौसम से गुजरते हैं, खाल कर गैसीय ग्रहों पर. इसका उदाहरण बृहस्पति पर दी ग्रेट रेड स्पॉट (The Great Red Spot) है (Storm on Jupiter).
क्लाउड मैप में पूरा भारत सफेद दिखने का मतलब है घने मॉनसूनी बादलों का फैलाव. जून में कमजोर मॉनसून के बाद जुलाई में नया एक्टिव फेज शुरू हुआ है, जिससे उत्तर और पूर्वी भारत में भारी बारिश हो रही है.
IITM पुणे की स्टडी में खुलासा हुआ कि भारत में मॉनसून की औसतन 25% बारिश जमीन तक पहुंचने से पहले ही वाष्प बन जाती है. जानिए इसका मौसम, कृषि और जल संसाधनों पर क्या असर पड़ सकता है. भविष्य में पूरे देश में इसी तरह के अध्ययन किए जाएंगे, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में इस प्रक्रिया के प्रभाव को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा.
तूफान बावी अब जापान, ताइवान और चीन की तरफ बढ़ गया है. उसकी ताकत कमजोर हुई है लेकिन तबाही ला सकता है. तेज हवाओं से ज्यादा अब चिंता भारी बारिश की है.
सूरत में भारी बारिश और बाढ़ से 47 लोगों की मौत हुई. प्रशासन के मुताबिक अब जलभराव खत्म हो चुका है. प्रभावित परिवारों को 4 लाख रुपये की सहायता दी जाएगी, जबकि शहर में राहत और सफाई अभियान जारी है.
दुनिया 2035 में नहीं पहुंची है, लेकिन वैज्ञानिकों का कहना है उस समय के मौसम की डरावनी झलक अभी दिख रही है. आने वाले महीनों में कई देशों में रिकॉर्ड गर्मी, सूखा, बाढ़ और जंगलों में आग जैसी घटनाएं बढ़ सकती हैं.
महाराष्ट्र के महाबलेश्वर में भारी बारिश से वेण्णा नदी पर बना पुल टूट गया. कई पर्यटक फंस गए, जबकि राहत और बचाव अभियान जारी है. 24 घंटे में 513 मिमी बारिश से जनजीवन प्रभावित हुआ. वीडियो में देखें पूरा वायरल क्लिप जिसमें कार को भी क्रेन की मदद से बाहक निकाला गया.
ISRO की सैटेलाइट तस्वीरों में पश्चिम भारत पर घने बादल दिखाई दिए हैं. गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश का अलर्ट है. कई इलाकों में जलभराव और बाढ़ का खतरा बढ़ा. ISRO की सैटेलाइट निगरानी से मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, जिससे समय रहते चेतावनी जारी करने में मदद मिल रही है.
अंतरराष्ट्रीय मौसम एजेंसियों के अनुसार अल-नीनो 2026-27 के दौरान वैश्विक मौसम को प्रभावित कर सकता है. भारत में कम बारिश और ज़्यादा गर्मी की आशंका है, जबकि कई क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है. जानिए इसके संभावित असर.
दिल्ली-NCR में तेज धूलभरी आंधी और बारिश से मौसम बदल गया है. पालम में हवा की रफ्तार 92 किमी/घंटा दर्ज की गई. IMD ने कई इलाकों के लिए रेड अलर्ट जारी कर लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है. मौसम में बदलाव से तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है.
देश में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ गई है. IMD के अनुसार, जून के शुरुआती दिनों में बारिश सामान्य से 64% कम रही. एक्सपर्ट्स इसे अस्थायी ‘मॉनसून पॉज़’ मान रहे हैं और जल्द सुधार की उम्मीद जता रहे हैं. मौसम विभाग (IMD) लगातार स्थिति पर नज़र बनाए हुए है.
बारिश से पहले आसमान में काले बादल क्यों दिखाई देते हैं, इसके पीछे एक दिलचस्प साइंस छुपा है. जब बादलों में पानी की मात्रा बढ़ जाती है, तो वे घने हो जाते हैं और सूरज की रोशनी को रोक लेते हैं. इसी वजह से बादल काले या भूरे नजर आते हैं और बारिश की संभावना बढ़ जाती है.
दिल्ली एनसीआर में अचानक आए आंधी तूफान और बारिश के पीछे पाकिस्तान में बना साइक्लोनिक सर्कुलेशन बड़ा कारण बना. मौसम विभाग के अनुसार, अरब सागर की नमी और भीषण गर्मी के कारण मौसम अस्थिर हुआ. तेज हवाओं और बारिश से लोगों को राहत मिली लेकिन जनजीवन और उड़ानों पर असर पड़ा.
दिल्ली-NCR में तेज हवाओं और बारिश से मौसम सुहाना हुआ. IMD ने 17 जून तक बारिश और आंधी का अलर्ट जारी किया है. जानिए दिल्ली में मॉनसून कब पहुंचेगा और अगले कुछ दिनों का मौसम कैसा रहेगा. IMD का अनुमान है कि दिल्ली-NCR में मॉनसून 25 से 30 जून के बीच दस्तक दे सकता है.
IMD उत्तर-पश्चिम भारत में 13 जून तक बारिश का अलर्ट जारी किया है. 11 और 12 जून को गरज-चमक के साथ तेज हवाएं (50-60 kmph) और ओला गिरने की संभावना है.
देश के कई राज्यों में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच मौसम विभाग ने मौसम में बदलाव को लेकर नया अलर्ट जारी किया है. मौसम विभाग ने 8 से 12 जून तक आंधी-तूफान की चेतावनी जारी की है. इसी के साथ कुछ जगहों पर 70-80km/h की स्पीड से हवा चलने का भी अनुमान लगाया गया है.
तिब्बत के 5000 मीटर ऊंचे इलाके में फोटोग्राफर शूचांग ने हाई-स्पीड कैमरे से रेड स्प्राइट्स की शानदार तस्वीरें कैद कीं. ये ऊपरी वायुमंडल में तूफानों से बनने वाली बिजली हैं, जो लाल जेलीफिश जैसे दिखते हैं.
इस बार देश में बारिश कम हो रही है, लेकिन आंधी-तूफान और तेज हवाएं ज्यादा आ रही हैं. मुख्य कारण अल-नीनो, जलवायु परिवर्तन और वायुमंडलीय अस्थिरता है. इससे छिटपुट बारिश के साथ आंधियां बढ़ गई हैं.
देशभर में मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ है. 2-3 दिनों से उत्तर भारत के तमाम शहरों में हुई बारिश से गर्मी से राहत बनी हुई है. दूसरी ओर उत्तराखंड और हिमाचल के ऊंचाई वाले पहाड़ों पर बर्फबारी का सिलसिला जारी है. उधर, रविवार को राजस्थान में फिर धूल भरी आंधी और तेज हवाओं ने जनजीवन प्रभावित कर दिया.
तपती जमीन और आग बरसते आसमान की कठिनाइयों के साथ मई का महीना विदा लेने को है. लेकिन जाते जाते ये महीना ये ऐलान कर रहा है कि चुनौतियां अभी और भी हैं. 47 डिग्री तापमान पर जलते चुबते दिन और 30 डिग्री से ऊपर के तापमान में उबलती रातों के बीच वैज्ञानिकों की ओर से संकेत ये भी मिल रहे हैं राहत के दिन करीब हैं.
राजस्थान के कई शहरों में आज मौसम बिगड़ा है. भारी आंधी-तूफान चल रही है. चूरू, श्रीगंगानगर, बीकानेर में रेतीले बवंडर से आफत आई है. इस दौरान चूरू में डरावना मंजर देखने को मिला. धूल का इतना विशाल गुबार उठा कि दिन में ही अंधेरा छा गया. देखें वीडियो.
उत्तर भारत इस समय भीषण गर्मी और लू की चपेट में है. लेकिन अब लोगों को राहत मिलने के संकेत हैं. लेकिन पहले गर्मी से आफत और अब मौसम के बदले मिजाज से मुसीबत. बीती शाम से उत्तर भारत समेत देश के कई इलाकों में मौसम ऐसा बदला कि तेज बारिश ने सब कुछ अस्त-व्यस्त कर दिया. बारिश से कहां-कहां कैसा हाल रहा देखिए रिपोर्ट.