पृथ्वी एक अनोखे मौसम पैटर्न के लिए जानी जाती है जो एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आसानी से प्रवाहित होता है. हालांकि, कभी-कभी सिस्टम के भीतर व्यवधान होते हैं जिनका वैश्विक प्रभाव होता है. ऐसी ही एक घटना है 'एल नीनो' (El-Nino) जो भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत महासागर में होती है.
एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर पर हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव से बनती है. उन बदलावों का एक अनियमित पैटर्न होता है.एल नीनो की घटना का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है. यह उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिक्स) और उपोष्णकटिबंधीय (सबट्रॉपिक्स) क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करता है और इसका संबंध दुनिया के हायर लैटिट्यूड क्षेत्रों से है. समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने के चरण को 'एल नीनो' और ठंडे होने के चरण को 'ला नीना' के रूप में जाना जाता है.
अर्जेंटीना के मशहूर इगुआजु फॉल्स में नदी का बहाव सामान्य से 6 गुना ज्यादा बढ़ गया. पानी के तेज उफान को देखते हुए पर्यटकों की एंट्री रोकनी पड़ी. आखिर अल-नीनो और भारी बारिश से क्या है इसका कनेक्शन?
दक्षिण भारत में अगले 2-3 दिनों में पूर्वोत्तर मानसून की शुरुआत होने वाली है. इससे 15 से 18 अक्टूबर के बीच केरलम, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश में भारी बारिश की संभावना है. भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी जारी है, लेकिन इस साल बारिश सामान्य से 12.6% कम रही है, जिसका कारण अल नीनो है.
दिसंबर में अल-नीनो अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच सकता है. प्रशांत महासागर का तापमान रिकॉर्ड तोड़ने का अनुमान है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ने और बारिश के पैटर्न में बदलाव से सूखा-बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
अल-नीनो के बीच बारिश की कमी ने भारत में चीनी उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है. गन्ने में सुक्रोज की मात्रा घटने से लेकर चीनी मिलों तक पानी की किल्लत का खतरा है. जानिए, कैसे बिगड़ सकता है मिठास का पूरा गणित.
अंटार्कटिका के जिस द्वीप पर कभी दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी थी, वहां अब इनकी संख्या तेजी से घट रही है. नई स्टडी के मुताबिक, समुद्र का बढ़ता तापमान और भोजन की तलाश इन पेंग्विन के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं.
समुद्र में बढ़ती गर्मी अब दुनिया के मौसम को बदलने का संकेत दे रही है. सुपर-डुपर अल-नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री तक ज्यादा पहुंचने का अनुमान है.
महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश में 2026 के कमजोर मॉनसून और अल-नीनो के कारण भारी सूखा पड़ा है. महाराष्ट्र के 74 प्रतिशत तालुकों और आंध्र के आधे से ज्यादा मंडलों में सूखा घोषित है. फसलें मुरझाईं, पानी की कमी बढ़ी, स्वास्थ्य, खेती, कारोबार और अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा है.
इंडोनेशिया के जंगलों और पीटलैंड में लगी आग से उठ रहा धुआं अब पड़ोसी देशों की हवा भी खराब कर रहा है. मलेशिया और सिंगापुर तक पहुंची धुंध ने चिंता बढ़ाई है. इस आग को भड़काने में सूखा मौसम और अल-नीनो बड़ी वजह हैं.
महाराष्ट्र में कम बारिश और घटते जल भंडार ने पानी की चिंता बढ़ा दी है. सूखे के खतरे और अल-नीनो के असर के बीच सरकार ने 16 अक्टूबर से शहरी इलाकों में 10% पानी कटौती का फैसला लिया है.
पेरू के पुंटा सैन जुआन में हम्बोल्ट पेंग्विन की संख्या 3,000 से घटकर 500 से भी कम रह गई है. बर्ड फ्लू और अल-नीनो के बाद अब समुद्र के बढ़ते तापमान और संभावित सुपर अल-नीनो ने इन पक्षियों की मुश्किल और बढ़ा दी है.
सुपर अल नीनो से अफ्रीका में गर्मी जानलेवा हो सकती है. अगले छह महीनों में नाइजीरिया, सूडान, नाइजर और चाड में करीब 66,800 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है. सबसे ज्यादा खतरा नाइजीरिया को है, जहां 31,400 मौतें हो सकती हैं.
प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और चीन के मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी बड़ी वजह को लेकर अहम अनुमान दिया है. नवंबर तक समुद्र की सतह 3.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकती है, जिसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ेगा.
अल-नीनो के असर से इस बार मॉनसून कमजोर रहा और बारिश में बड़ी कमी दर्ज हुई. 2001 के बाद यह चौथा सबसे कमजोर मॉनसून रहा. महाराष्ट्र में कम बारिश ने खेती और पानी, दोनों पर संकट बढ़ा दिया.
सालों से सूखी जमीन के नीचे दबे बीजों को जैसे ही पानी मिला, अटाकामा रेगिस्तान खिल उठा. अल नीनो की बारिश के बाद यहां बैंगनी और सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं. यह नजारा अक्टूबर में और बड़ा होने की उम्मीद है.
कैलिफोर्निया के दाना पॉइंट में समुद्र में गिरते घरों को बचाने के लिए घर मालिक महंगी चट्टानी दीवार बना रहे हैं. तटीय कटाव और तूफान से कई घर नष्ट हो चुके हैं.
सितंबर 2026 में बंगाल की खाड़ी के डीप डिप्रेशन के बाद बने लो-प्रेशर एरिया और पश्चिमी विक्षोभ ने मिलकर उत्तर भारत में भारी बारिश कराई है. मजबूत अल-नीनो के बावजूद ये मौसमी सिस्टम्स पूर्वी-मध्य भारत को नमी दे रही हैं, जिससे बाढ़, लैंडस्लाइड और एवलांच जैसी घटनाएं हो रही हैं.
इस बार अल-नीनो सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं बदलेगा, बल्कि दुनिया के कई हिस्सों में जानलेवा गर्मी बढ़ा सकता है. वैज्ञानिकों ने अगले कुछ महीनों में 4.5 लाख से ज्यादा अतिरिक्त मौतों का अनुमान लगाया है, जिसमें भारत भी शामिल है.
अल-नीनो ने इतिहास का सबसे अधिक समुद्री तापमान रिकॉर्ड बना दिया है. पारा 3.05 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया. यह अभी और बढ़ सकता है. अब दुनिया भर में मौसम तबाही लाएगा.
बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर डीप डिप्रेशन या चक्रवात अर्नब बन सकता है. ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का खतरा. साथ में अल-नीनो भी एक्टिव, जिससे सूखे की आशंका बढ़ी है.
180 से अधिक वैज्ञानिकों ने 2026-27 में शक्तिशाली अल-नीनो की चेतावनी दी है. इससे भारत में तेज गर्मी, कम बारिश, जंगल, जानवरों, खेती और समुद्र पर गंभीर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों ने तुरंत पर्यावरण निगरानी बढ़ाने की मांग की है.
तिब्बत के ऊंचे पहाड़ी इलाके पर सर्दी की शुरुआत में ज्यादा गर्मी पड़ने से हवा में लहरें बनती हैं. ये लहरें बहुत दूर जाकर कैलिफोर्निया में तेज बारिश और बाढ़ वाले तूफान लाती हैं. ला-नीना होने पर भी ये तूफान आ सकते हैं.