पृथ्वी एक अनोखे मौसम पैटर्न के लिए जानी जाती है जो एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आसानी से प्रवाहित होता है. हालांकि, कभी-कभी सिस्टम के भीतर व्यवधान होते हैं जिनका वैश्विक प्रभाव होता है. ऐसी ही एक घटना है 'एल नीनो' (El-Nino) जो भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत महासागर में होती है.
एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर पर हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव से बनती है. उन बदलावों का एक अनियमित पैटर्न होता है.एल नीनो की घटना का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है. यह उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिक्स) और उपोष्णकटिबंधीय (सबट्रॉपिक्स) क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करता है और इसका संबंध दुनिया के हायर लैटिट्यूड क्षेत्रों से है. समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने के चरण को 'एल नीनो' और ठंडे होने के चरण को 'ला नीना' के रूप में जाना जाता है.
मौसम विभाग ने 2026 के मॉनसून का पूर्वानुमान जारी किया है. पूरे देश में बारिश सिर्फ 90% ही रहने की संभावना है. जून में सबसे कम बारिश (92%) होने की आशंका है.
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने 2026 के मॉनसून को लेकर नया पूर्वानुमान जारी किया है. इसके अनुसार, इस साल देश में सामान्य से कम बारिश होने की संभावना है. जून से सितंबर के दौरान कुल वर्षा लंबी अवधि के औसत के 90 प्रतिशत तक रह सकती है. अल नीनो के प्रभाव और जून में कमजोर बारिश की आशंका ने किसानों और जल प्रबंधन से जुड़े क्षेत्रों की चिंता बढ़ा दी है.
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार अगले 5 साल में पृथ्वी कई बार 1.5 डिग्री सेल्सियस की सीमा पार करेगी. गर्मी के रिकॉर्ड टूटेंगे. आर्कटिक तेजी से गर्म होगा. अमेजन में सूखा पड़ सकता है. प्राकृतिक आपदाएं आएंगी.
भारत में 1997-98, 1983 और 1994 में मजबूत अल-नीनो होने के बावजूद वैज्ञानिकों की भविष्यवाणी फेल हुई. प्रशांत महासागर का पूर्वी हिस्सा ठंडा था. अन्य मौसमी वजहों ने मॉनसून को मजबूत किया, जिससे सामान्य या ज्यादा बारिश हुई.
अल-नीनो को अक्सर कमजोर मॉनसून और सूखे से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन कई बार इसकी भविष्यवाणियां गलत साबित हुई हैं. इतिहास में ऐसे कई उदाहरण मिले हैं, जब मजबूत अल-नीनो के बावजूद भारत में सामान्य या औसत से ज्यादा बारिश हुई. वैज्ञानिकों के मुताबिक, हिंद महासागर की स्थिति, हवाओं का पैटर्न और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कई फैक्टर्स मॉनसून को प्रभावित करते हैं. यही वजह है कि अब मौसम विभाग मल्टी-फैक्टर मॉडल के जरिए पूर्वानुमान तैयार करता है.
प्रशांत महासागर में मजबूत अल-नीनो लौटने की संभावना है. IMD ने चेतावनी दी है कि भारत का अगला मानसून सामान्य से कमजोर (92%) रह सकता है. इससे खरीफ फसलों पर असर पड़ेगा. करोड़ों किसानों की मुश्किलें बढ़ेंगी.
क्या दुनिया फिर एक बार Super El Nino के खतरे की तरफ बढ़ रही है. वैज्ञानिकों की ताजा चेतावनी ने दुनियाभर की चिंता बढ़ा दी है. करीब 149 साल पहले आए भयंकर El Nino ने कई देशों में सूखा, भुखमरी और भारी तबाही मचा दी थी. अब बढ़ता समुद्री तापमान फिर बड़े जलवायु संकट का संकेत माना जा रहा है.
दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने अब एक नए खतरे को लेकर चेतावनी दी है, और वो है Super El Nino. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल जून या जुलाई से इसका असर दिखना शुरू हो सकता है, जिसका सबसे बड़ा प्रभाव India समेत कई देशों के Weather पर पड़ेगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि Pacific Ocean का तापमान तेजी से बढ़ रहा है, और अगर यही स्थिति बनी रही तो ये अब तक का सबसे ताकतवर El Nino बन सकता है.
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 2026 में एक बहुत मजबूत अल-नीनो बनने वाला है, जो इतिहास के सबसे खतरनाक अल-नीनो में से एक हो सकता है. दुनिया भर में बाढ़, सूखा और रिकॉर्ड गर्मी का खतरा बढ़ जाएगा.
एक नई Study में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि El Nino Event के दौरान कई देशों में Conflict और Violent Clashes का खतरा बढ़ जाता है. Researchers के मुताबिक, सूखा गर्मी और Food Crisis जैसी समस्याएं लोगों के बीच तनाव पैदा करती हैं जिससे लड़ाई झगड़े और अस्थिरता बढ़ सकती है.
अल-नीनो सूखा पैदा कर दुनिया भर में लड़ाई-झगड़ों का खतरा बढ़ा देता है. 1950 से 2023 तक 555 संघर्षों के एनालिसिस से यह नतीजा निकला है. मध्य अमेरिका और दक्षिणी अफ्रीका सबसे प्रभावित रहते हैं.
इस मई का मौसम असामान्य रूप से ठंडा रहा है. भारी बारिश, आंधी, ओले और तेज हवाओं के साथ कई वेदर सिस्टम एक्टिव हैं. मई के पहले सप्ताह में 79% ज्यादा बारिश हुई. सुपर अल-नीनो से मौसम और बदलेगा.
9 मई से मौसम पलटी मारेगा और ठंड पूरी तरह खत्म होगी. भीषण गर्मी और लू का अलर्ट है. यह बदलाव मानसून को कमजोर कर खेती और वैश्विक तापमान पर गंभीर असर डाल सकता है.
प्रमुख वैज्ञानिक जेम्स हानसेन ने भविष्यवाणी की है कि 2026 अब तक का सबसे गर्म साल रहेगा. ग्लोबल वार्मिंग के साथ सुपर अल-नीनो मिलने से पारा 2024 के रिकॉर्ड को तोड़ देगा. भारी गर्मी और चरम मौसम का खतरा है.
भारत इन दिनों पृथ्वी का सबसे बड़ा गर्म इलाका बन गया है. दुनिया के 100 सबसे गर्म शहरों में 95 भारत में हैं. उत्तर-पूर्वी भारत में अप्रैल में ही 43-47°C तापमान है. मौसम मॉडल बता रहे हैं कि 2026 में सुपर अल-नीनो आ सकता है, जो सबसे मजबूत होगा. इससे कहीं सूखा तो कहीं बाढ़ आएगी. रिकॉर्ड गर्मी बढ़ेगी. वैज्ञानिकों ने तैयार रहने की चेतावनी दी है.
भीषण गर्मी के बीच एक बार फिर खतरनाक हालात बनने की आशंका जताई जा रही है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, 1877 के बाद से अब सबसे शक्तिशाली अल-नीनो विकसित हो रहा है, जिसने चिंता बढ़ा दी है.
प्रशांत महासागर में 8046 किलोमीटर लंबी गर्मी की लहर फैल चुकी है, जो मेगा अल-नीनो को और ताकतवर बना रही है. वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि 2026-27 में भारी गर्मी होगी. सूखा पड़ेगा. फसलों को नुकसान होगा. भारत में इस गर्मी तापमान काफी बढ़ेगा. मानसून कमजोर पड़ सकता है. सूखे का खतरा रहेगा.
2026 का गर्मी का मौसम भारत में रिकॉर्ड तोड़ने वाला होगा. अप्रैल 2024 से हर महीने तापमान ने नया रिकॉर्ड बनाया. IMD के अनुसार हिमालय, पूर्वोत्तर और पश्चिमी घाट में मार्च-मई में सामान्य से ज्यादा गर्मी पड़ेगी. सुपर अल-नीनो और क्लाइमेट चेंज मुख्य कारण हैं. 52% कृषि भूमि और खुले में काम करने वाले लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे.
अफ्रीका के कई देशों में पहले बाढ़ आई. फिर हैजा फैला. उसके बाद सूखे की मार. चार दशकों का सबसे भयानक सूखा. फसल बची नहीं. पानी के स्रोत सूख गए हैं. नतीजा ये कि जमीन, जानवर और इंसान सब सूख रहे हैं. वहां से भयानक तस्वीरें सामने आ रही हैं...
Weather Update: उत्तर भारत में गर्मी कम होने का नाम नहीं ले रही है. यहां तक कि रात में मौसम काफी ज्यादा गर्म है. ऐसे में सवाल है कि आखिर इस बार ऐसा क्या हुआ कि गर्मी इतनी तेज पड़ रही है.
मौसम विभाग लगातार देश के अलग-अलग हिस्सों में हीटवेव और प्रचंड गर्मी का अलर्ट घोषित कर रहा है. हर साल देश में हीटवेव और गर्मी की वजह से सैकड़ों लोग मारे जाते हैं. 2015 से 2023 तक कुल मिलाकर पूरे देश में हीटवेव से 4057 लोगों की मौत हुई है.