पृथ्वी एक अनोखे मौसम पैटर्न के लिए जानी जाती है जो एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में आसानी से प्रवाहित होता है. हालांकि, कभी-कभी सिस्टम के भीतर व्यवधान होते हैं जिनका वैश्विक प्रभाव होता है. ऐसी ही एक घटना है 'एल नीनो' (El-Nino) जो भूमध्य रेखा के आसपास प्रशांत महासागर में होती है.
एल नीनो एक वैश्विक जलवायु घटना है जो प्रशांत महासागर पर हवाओं और समुद्र की सतह के तापमान में बदलाव से बनती है. उन बदलावों का एक अनियमित पैटर्न होता है.एल नीनो की घटना का अनुमान नहीं लगाया जा सकता है. यह उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिक्स) और उपोष्णकटिबंधीय (सबट्रॉपिक्स) क्षेत्रों की जलवायु को प्रभावित करता है और इसका संबंध दुनिया के हायर लैटिट्यूड क्षेत्रों से है. समुद्र की सतह के तापमान के गर्म होने के चरण को 'एल नीनो' और ठंडे होने के चरण को 'ला नीना' के रूप में जाना जाता है.
असम की बाढ़ से लेकर बिहार और आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी तक, इस मॉनसून में मौसम का मिजाज एक जैसा नहीं रहा. IMD के जिला स्तर के आंकड़े इस अंतर को साफ दिखाते हैं.
सुपर अल-नीनो ने रिकॉर्ड स्तर की गर्मी बढ़ा दी है. वैज्ञानिकों के मुताबिक यह अभी पीक पर भी नहीं पहुंचा है. इसकी बढ़ती ताकत 2026-27 में वैश्विक तापमान, मौसम और भारत समेत कई देशों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है.
ताइवान में भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं. दक्षिणी और पूर्वी हिस्सों में बाढ़ और लैंडस्लाइड से सड़कें डूब गईं और रास्ते बंद हो गए. 4263 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया, जबकि 4 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं.
अमेरिका के नेवादा में रेनो शहर के पास लगी भीषण जंगल की आग तेजी से फैल रही है. 15 हजार एकड़ से ज्यादा इलाका जल चुका है, जबकि 24 हजार लोग बेघर हो गए हैं.
पाकिस्तान के सिंध में 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचती गर्मी के बीच खजूर की तुड़ाई जारी है. खैरपुर के मजदूर सुबह से ही काम में जुट जाते हैं, लेकिन बढ़ता तापमान खेती और उनकी रोजी-रोटी दोनों के लिए चुनौती बन रहा है.
भारत में मॉनसून बेतरतीब और कमजोर पड़ रहा है. IMD ने अगले दो हफ्तों में सामान्य से कम बारिश की भविष्यवाणी की है. IOD न्यूट्रल है. खरीफ फसलों पर खतरा बढ़ रहा है.
प्रशांत महासागर में बन रहा अल-नीनो इस बार बेहद ताकतवर हो सकता है. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इसका असर दुनिया के तापमान, बारिश और मौसम पर पड़ेगा और 2026-27 में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं.
जहां पानी रोजमर्रा की जरूरत है, वहीं अब इसकी सप्लाई टैंकरों के भरोसे है. श्रीलंका में सूखे ने ऐसा संकट खड़ा किया है कि हजारों लोगों के लिए पानी की हर बूंद जरूरी हो गई है.
प्यूर्टो रिको में सूखे के बीच पानी का संकट गहरा गया है. राजधानी सैन जुआन समेत कई इलाकों में 1.8 लाख कनेक्शनों पर पानी की कटौती की जा रही है. पुरानी पाइपलाइन, लीकेज और खराब मेन्टेनेन्स ने हालात को और मुश्किल बना दिया है.
सर्दी आने वाली है, लेकिन इस बार ठंड का तेवर बदला-बदला हो सकता है. अल-नीनो मजबूत हुआ तो पारा सामान्य से ऊपर रह सकता है. चिंता यहीं खत्म नहीं होती, क्योंकि इसका असर 2027 की गर्मी को भी ज्यादा तेज बना सकता है.
इंग्लैंड का करीब 71.3% हिस्सा सूखे की चपेट में है. कम बारिश और बढ़ती गर्मी ने पानी, खेती और वन्यजीवों पर असर डाला है. 4.5 करोड़ लोग प्रभावित हैं. 2.7 करोड़ लोगों पर पानी के इस्तेमाल की पाबंदी हैं.
डानुबे नदी का पानी घटने से 1944 में डूबा जर्मन युद्धपोत फिर दिखाई देने लगा है. सर्बिया में सामने आया यह मलबा यूरोप में बढ़ती गर्मी और सूखे के बीच नदियों के घटते जलस्तर की तस्वीर दिखाता है.
सितंबर में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. यूरोप के मौसम मॉडल ECMWF ने दिल्ली, महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सामान्य से कम बारिश का अनुमान जताया है.
टाइफून डॉल्फिन ने बंगाल की खाड़ी से कई मॉनसून सिस्टम छीन लिए और नमी सोख रहा है. फिर भी स्थानीय लो प्रेशर सिस्टम बन सकते हैं, जो अगस्त के बाकी दिनों में पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में बारिश लाएंगे.
पानी में डूब चुका एक पूरा गांव अब फिर दिखाई दे रहा है. इंडोनेशिया में अल-नीनो और लंबे सूखे के चलते करियन डैम का पानी घट गया. सोमांग गांव के पुराने घर और मस्जिद फिर से नजर आने लगे.
पश्चिमी प्रशांत में तूफान डॉल्फिन चीन में लैंडफॉल कर चुका है. चान-होम जापान की ओर बढ़ रहा है. मारियाना के पास तीन अन्य सिस्टम एक्टिव है. ये मॉनसून को प्रभावित कर सकते हैं.
एक नदी सूखी तो पूरे देश पर बिजली संकट का खतरा मंडराने लगा. हंगरी में डानुबे नदी का जलस्तर गिरने से न्यूक्लियर पावर प्लांट प्रभावित हुआ और सरकार को लोगों से बिजली बचाने की अपील करनी पड़ी.
गर्मी का ऐसा वार कि शेरनियां भी नहीं बच पाईं. टोक्यो जू में 39 डिग्री तापमान और उमस के बीच 3 शेरनियों की मौत हो गई, जिसकी जांच अब भी जारी है.
प्रशांत महासागर में बन रहे साइक्लोन मॉनसूनी बादल को खींच रहे हैं. जिससे पश्चिमी भारत में बारिश कम हो रही है. ECMWF के अनुसार 2026 के पूर्वोत्तर मॉनसून में दक्षिणी तमिलनाडु, केरल और श्रीलंका में सामान्य से अधिक बारिश की संभावना है.
आसमान से बरसती गर्मी अभी थमने वाली नहीं है. मजबूत होता अल-नीनो आने वाले महीनों में तापमान को और ऊपर ले जा सकता है, जिसका असर दुनिया के कई हिस्सों में महसूस होगा.
अल-नीनो के बावजूद भारत का मॉनसून 'मेड इन इंडिया' मौसमी सिस्टम से टिका हुआ है. जुलाई अंत की भारी बारिश ने जून की कमी को कुछ हद तक संभाला, लेकिन अगस्त 11.8% घाटे से शुरू हो रहा है.