प्रशांत महासागर
प्रशांत महासागर (Pacific Ocean) पृथ्वी के पांच महासागरों में सबसे बड़ा और गहरा है (Pacific Ocean Largest and Deepest Ocean on Earth). यह उत्तर में आर्कटिक महासागर से दक्षिण में दक्षिणी महासागर या अंटार्कटिका तक तक फैला हुआ है और पश्चिम में एशिया और ऑस्ट्रेलिया के महाद्वीपों और पूर्व में अमेरिका से घिरा है (Pacific Ocean Geographical Location).
16,52,50,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है. यह पृथ्वी की जल सतह का लगभग 46% और लगभग 32% भाग को कवर करता है (Pacific Ocean Water Surface Area). इसका कुल सतह क्षेत्र, पृथ्वी के सभी भूमि क्षेत्र से बड़ा है. जल गोलार्ध और पश्चिमी गोलार्ध दोनों के केंद्र प्रशांत महासागर में हैं. ओशन सर्कुलेशन के आधार पर इसे दो हिस्से उत्तर प्रशांत महासागर और दक्षिण प्रशांत महासागर में विभाजित किया गया है.
इसकी औसत गहराई 4,000 मीटर है (Pacific Ocean Depth). पश्चिमी उत्तर प्रशांत में स्थित मारियाना ट्रेंच में चैलेंजर डीप, दुनिया का सबसे गहरा बिंदु है, जिसकी गहराई 10,928 मीटर है (Pacific Ocean First Deepest Point on Earth). प्रशांत महासागर में दक्षिणी गोलार्ध का सबसे गहरा बिंदु, टोंगा ट्रेंच में हॉरिजन डीप है, जिसकी गहराई 10,823 मीटर है (Pacific Ocean Second Deepest Point on Earth). पृथ्वी पर तीसरा सबसे गहरा बिंदु, सिरेना डीप, मारियाना ट्रेंच में स्थित है (Pacific Ocean Third Deepest Point on Earth).
पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में कई प्रमुख सीमांत समुद्र हैं, जिनमें दक्षिण चीन सागर, पूर्वी चीन सागर, जापान सागर, ओखोटस्क सागर, फिलीपीन सागर, कोरल सागर, जावा सागर और तस्मान सागर शामिल हैं (Pacific Ocean Marginal Seas.
हालांकि एशिया और ओशिनिया के लोगों ने प्रागैतिहासिक काल से प्रशांत महासागर की यात्रा की है. पूर्वी प्रशांत को पहली बार 16वीं शताब्दी की शुरुआत में यूरोपीय लोगों ने देखा था जब स्पेनिश खोजकर्ता वास्को नुनेज डी बाल्बोआ ने 1513 में पनामा के इस्तमुस को पार किया और दक्षिणी सागर की खोज की. इसका नाम उन्होंने स्पेनिश में मार डेल सुर रखा. महासागर का वर्तमान नाम पुर्तगाली खोजकर्ता फर्डिनेंड मैगेलन ने 1521 में रखा था. उन्होंने इसे मार पैसिफिको कहा, जिसका पुर्तगाली और स्पेनिश दोनों में अर्थ है 'शांतिपूर्ण समुद्र' (Pacific Ocean Etymology).
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अटलांटिक और प्रशांत महासागर का नाम बदलने का मजाकिया सुझाव दिया है. उन्होंने कहा कि महासागर का नाम 'ट्रंप ओशन' या 'ओशन ऑफ द अमेरिकाज' रखा जाना चाहिए.
दिसंबर में अल-नीनो अपने सबसे मजबूत स्तर पर पहुंच सकता है. प्रशांत महासागर का तापमान रिकॉर्ड तोड़ने का अनुमान है, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में गर्मी बढ़ने और बारिश के पैटर्न में बदलाव से सूखा-बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है.
अंटार्कटिका के जिस द्वीप पर कभी दुनिया की सबसे बड़ी पेंग्विन कॉलोनी थी, वहां अब इनकी संख्या तेजी से घट रही है. नई स्टडी के मुताबिक, समुद्र का बढ़ता तापमान और भोजन की तलाश इन पेंग्विन के लिए बड़ी चुनौती बन रहे हैं.
समुद्र में बढ़ती गर्मी अब दुनिया के मौसम को बदलने का संकेत दे रही है. सुपर-डुपर अल-नीनो तेजी से मजबूत हो रहा है और अक्टूबर से दिसंबर के बीच समुद्र का तापमान सामान्य से 3.7 डिग्री तक ज्यादा पहुंचने का अनुमान है.
प्रशांत महासागर में एक साथ तीन तूफान एक्टिव हैं. चोई-वान और नोलो टाइफून बन चुके हैं, जबकि कोगुमा तेजी से मजबूत हो रहा है. पांच साल बाद अक्टूबर में ऐसा दुर्लभ संयोग बना है, जिससे जापान के आसपास समुद्र में ऊंची लहरों का खतरा बढ़ा है.
समुद्र में मिलने वाला ब्लू-फुटेड बूबी अपने चमकीले नीले पैरों के लिए पहचाना जाता है. खास बात यह है कि इसके पैरों का रंग इसकी डाइट और शरीर की स्थिति से जुड़ा है. जानिए मछली खाने वाले इस अनोखे पक्षी की दिलचस्प कहानी.
करीब 500 साल तक समुद्र के किनारे खड़ी रही हवाई की मशहूर चट्टान आखिरकार गायब हो गई. तेज लहरों, भूकंप और दरारों से कमजोर हो चुकी यह चट्टान तूफान के दौरान टूटकर प्रशांत महासागर में समा गई.
समुद्र में सफर कर रही 16 मीटर की नाव के लिए कुछ सेकंड भारी पड़ गए. एक विशाल व्हेल से टक्कर के बाद नाव डूबने लगी. चार लोगों ने लाइफबोट का सहारा लिया और करीब 18 घंटे बाद उन्हें सुरक्षित निकाल लिया गया.
प्रशांत महासागर का तापमान तेजी से बढ़ रहा है और चीन के मौसम वैज्ञानिकों ने इसकी बड़ी वजह को लेकर अहम अनुमान दिया है. नवंबर तक समुद्र की सतह 3.5 डिग्री सेल्सियस तक ज्यादा गर्म हो सकती है, जिसका असर दुनिया के मौसम पर पड़ेगा.
जलवायु परिवर्तन से प्रशांत महासागर के अंदर पानी की आवाजाही बदल सकती है. वैज्ञानिकों के मुताबिक, समुद्र गर्म होने से पानी की उम्र और ऑक्सीजन के स्तर पर अलग-अलग क्षेत्रों में अलग असर पड़ सकता है. इसका प्रभाव समुद्री पर्यावरण पर भी पड़ने की आशंका है. वीडियो में जानें क्या बोले वैज्ञानिक.
सालों से सूखी जमीन के नीचे दबे बीजों को जैसे ही पानी मिला, अटाकामा रेगिस्तान खिल उठा. अल नीनो की बारिश के बाद यहां बैंगनी और सफेद फूल दिखाई दे रहे हैं. यह नजारा अक्टूबर में और बड़ा होने की उम्मीद है.
प्रशांत महासागर में बढ़ती गर्मी के साथ समुद्र के अंदर पानी के आने-जाने का तरीका बदल रहा है. वैज्ञानिकों ने पाया कि इसका असर पानी की उम्र और ऑक्सीजन पर अलग-अलग जगहों पर अलग तरह से पड़ रहा है, जो समुद्री जीवन के लिए अहम है.
कैलिफोर्निया के दाना पॉइंट में समुद्र में गिरते घरों को बचाने के लिए घर मालिक महंगी चट्टानी दीवार बना रहे हैं. तटीय कटाव और तूफान से कई घर नष्ट हो चुके हैं.
अल-नीनो ने इतिहास का सबसे अधिक समुद्री तापमान रिकॉर्ड बना दिया है. पारा 3.05 डिग्री सेल्सियस ऊपर पहुंच गया. यह अभी और बढ़ सकता है. अब दुनिया भर में मौसम तबाही लाएगा.
बंगाल की खाड़ी में लो प्रेशर डीप डिप्रेशन या चक्रवात अर्नब बन सकता है. ओडिशा और उत्तरी आंध्र प्रदेश में भारी बारिश का खतरा. साथ में अल-नीनो भी एक्टिव, जिससे सूखे की आशंका बढ़ी है.
180 से अधिक वैज्ञानिकों ने 2026-27 में शक्तिशाली अल-नीनो की चेतावनी दी है. इससे भारत में तेज गर्मी, कम बारिश, जंगल, जानवरों, खेती और समुद्र पर गंभीर असर पड़ सकता है. वैज्ञानिकों ने तुरंत पर्यावरण निगरानी बढ़ाने की मांग की है.
कैलिफोर्निया के तट पर उठी बड़ी लहरों ने बीच की रेत बहा दी, घरों और रेलवे लाइन तक पानी पहुंच गया. कई इलाकों में नुकसान के बाद अब वैज्ञानिकों की नजर आने वाले अल-नीनो पर है, जिससे हालात और बिगड़ने की आशंका है.
अल-नीनो की बढ़ती ताकत ने दुनिया की चिंता बढ़ा दी है. प्रशांत महासागर का तापमान लगातार ऊपर जा रहा है और अब 2027 में रिकॉर्ड गर्मी के साथ कई तरह के एक्सट्रीम मौसम का खतरा मंडरा रहा है.
अमेरिका के दक्षिणी हिस्से में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ा है. वहीं प्रशांत महासागर में दो शक्तिशाली तूफान तेजी से बढ़ रहे हैं. इन मौसमी बदलावों पर वैज्ञानिक लगातार नजर रखे हुए हैं.
पिछले 7 दिनों में 4.5 या उससे ज्यादा तीव्रता के 187 भूकंप दर्ज हुए. इनमें कई झटके पैसिफिक रिंग ऑफ फायर में आए. जापान, इंडोनेशिया, अलास्का और अमेरिका में हुई इस हलचल ने फिर भूकंपों पर ध्यान खींचा है.
पश्चिमी प्रशांत में तूफानों की एक साथ एंट्री ने मौसम पर नजरें बढ़ा दी हैं. यहां 8 साल बाद अगस्त चार तूफान एक साथ एक्टिव हैं. इनमें सौडेल सबसे ताकतवर है, जिसकी हवा 165 किमी/घंटे तक पहुंच रही है.