How To Make Gulgule: नवरात्रि या किसी भी फलाहारी व्रत के दौरान जब पूजा के बाद कुछ मीठा, गरम-गरम और स्वादिष्ट खाने का मन करे, तो कुट्टू के आटे और गुड़ के गुलगुले सबसे बेहतरीन विकल्प हैं. उत्तर भारत में बनने वाली यह पारंपरिक डिश व्रत में बहुत चाव से खाई जाती है. कुट्टू का आटा पोषण से भरपूर और एनर्जी देने वाला होता है, वहीं गुड़ की प्राकृतिक मिठास इसके स्वाद को कई गुना बढ़ा देती है.
अक्सर लोगों की शिकायत होती है कि व्रत के गुलगुले अंदर से सख्त या कच्चे रह जाते हैं, लेकिन अगर घोल बनाने और तलने की सही तकनीक का ध्यान रखा जाए तो ये बाहर से कुरकुरे और अंदर से रुई जैसे सॉफ्ट व फूले-फूले बनते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने की सबसे आसान विधि और हलवाई स्टाइल सीक्रेट्स.
सामग्री:
1 कप कुट्टू का आटा
3/4 कप कसा हुआ गुड़ (स्वादानुसार)
1/2 छोटा चम्मच सौंफ (दरदरी पिसी हुई)
1/2 छोटा चम्मच हरी इलायची पाउडर
1 बड़ा चम्मच बारीक कटे काजू और बादाम
1 छोटा चम्मच सफेद तिल या कद्दूकस किया नारियल
1/2 कप गुनगुना पानी (घोल बनाने के लिए)
तलने के लिए मूंगफली का तेल या शुद्ध देसी घी
बनाने की शॉर्ट विधि:
सबसे पहले 1/2 कप गुनगुने पानी में कसा हुआ गुड़ डालकर 5 मिनट के लिए रख दें ताकि गुड़ पूरी तरह घुल जाए. अब इस पानी को छलनी से छान लें.
एक बड़े बर्तन में कुट्टू का आटा निकालें. इसमें सौंफ, इलायची पाउडर, कटे मेवे और तिल मिलाएं. अब थोड़ा-थोड़ा गुड़ का पानी डालते हुए चम्मच या हाथों से मिलाएं. घोल न बहुत ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही बहुत गाढ़ा (पकोड़े के घोल जैसा होना चाहिए).
बैटर को हाथ से 3-4 मिनट तक एक ही दिशा में लगातार फेंटें. फेंटने से घोल में हवा भरेगी, जिससे गुलगुले बिना सोडा या ईनो के भी फूले-फूले और स्पंजी बनेंगे. इसे 10 मिनट के लिए सेट होने दें.
कड़ाही में देसी घी या तेल मध्यम आंच पर गर्म करें. हाथ में थोड़ा पानी लगाकर बैटर की छोटी-छोटी लोइयां/गोलियां बनाकर तेल में छोड़ते जाएं.
आंच को मध्यम-धीमी रखें और कलछी से हल्का-हल्का चलाते हुए गुलगुलों को चारों तरफ से सुनहरा और क्रिस्पी होने तक तलें. धीमी आंच पर पकाने से गुलगुले अंदर तक अच्छे से सिक जाएंगे.
तैयार हैं आपके गरमा-गरम, फूले-फूले और रसीले कुट्टू के गुलगुले! इन्हें व्रत की पूजा में भोग लगाएं या शाम की चाय के साथ मजा उठाएं.