तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी कोष पर अधिकार की लड़ाई निर्वाचन आयोग पहुंच गई है. आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट को अपने दावे, समर्थकों के हलफनामे, सबूत और कानूनी दस्तावेज 25 अक्टूबर से पहले जमा करने का निर्देश दिया है.
दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों और कानूनी सलाहकारों को 30 अक्टूबर को दोपहर 3 बजे नई दिल्ली स्थित निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में पेश होने को कहा गया है. आगामी निकाय चुनावों से पहले होने वाली इस सुनवाई के बाद तय किया जाना है कि टीएमसी के असली नाम, चुनाव चिन्ह और पार्टी कोष पर किसका अधिकार होगा.
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सुप्रीम कोर्ट ने दोनों गुटों को अपनी कानूनी दलीलें पूरी करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया था. इसके बाद निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पार्टी के संगठनात्मक नियंत्रण, संपत्तियों, आधिकारिक नाम और फूल-घास चुनाव चिन्ह के मालिकाना हक पर अंतिम फैसला देना है. पार्टी में यह विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद हुई अंदरूनी टूट के बाद शुरू हुआ था.
दोनों गुटों के अपने-अपने दावे
ममता बनर्जी गुट खुद को पार्टी के संस्थापक-अध्यक्ष का गुट बताते हुए दावा करता है कि वही पार्टी का वैध और पुराना नेतृत्व है. दूसरी तरफ, राज्य में विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले गुट ने निर्वाचन आयोग के सामने असली टीएमसी होने का दावा किया है. इस गुट को अरूप रॉय जैसे नेताओं का समर्थन भी मिला है.
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मूल नाम और चिन्ह पर अंतरिम रोक
अक्टूबर में हुए उपचुनावों से पहले विवाद का अंतिम समाधान नहीं होने के कारण निर्वाचन आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और जोड़ा घास फूल चिन्ह के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी थी. चुनाव के लिए दोनों गुटों को अस्थायी नाम और चिन्ह दिए गए थे.
ममता बनर्जी गुट को ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉलर चिन्ह मिला था. ऋतब्रत बनर्जी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम और लिफाफा चिन्ह दिया गया था. अब दोनों गुटों को 25 अक्टूबर तक दस्तावेज देने हैं और 30 अक्टूबर की सुनवाई के बाद पार्टी के नाम, चिन्ह, संगठनात्मक नियंत्रण और कोष पर अधिकार को लेकर फैसला किया जाना है.