पश्चिम बंगाल के एक प्रमुख राजनेता हैं जो हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से बगावत करने और ममता बनर्जी को चुनौती देने के कारण खबरों में रहे.
कोलकाता के आशुतोष कॉलेज और कलकत्ता यूनिवर्सिटी से पढ़े ऋतब्रत ने 2000 के दशक की शुरुआत में माकपा की छात्र शाखा SFI के जरिए राजनीति में कदम रखा. वे लगभग 8 साल तक SFI के राष्ट्रीय महासचिव रहे और वामपंथ के युवा नेता माने जाते थे. 2014 में महज 34 साल की उम्र में माकपा ने उन्हें राज्यसभा भेजा, हालांकि, 2017 में पार्टी की विचारधारा के विपरीत आलीशान जीवनशैली और शीर्ष नेतृत्व के खिलाफ बयानबाजी के कारण उन्हें माकपा से निष्कासित कर दिया गया.
माकपा से निकलने के बाद उन्होंने पाला बदला और ममता बनर्जी को असली वामपंथी बताते हुए तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया. टीएमसी ने उन्हें अपने ट्रेड यूनियन विंग का प्रदेश अध्यक्ष बनाया. 2024 में जवाहर सरकार के इस्तीफे के बाद TMC ने उन्हें दोबारा राज्यसभा भेजा. 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वे उलुबेरिया पूर्व सीट से TMC के टिकट पर विधायक चुने गए, लेकिन विधायक बनने के तुरंत बाद, दिल्ली के बंग भवन में मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी से उनकी मुलाकात किया. इसके बाद ही ममता बनर्जी ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था. हालांकि, ऋतब्रत बनर्जी ने टीएमसी के विधायकों का समर्थन हासिल करके पार्टी पर अपना कन्ट्रोल दिखाने की कोशिश की.
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुटों से 25 अक्टूबर तक दावे, हलफनामे और कानूनी दस्तावेज मांगे हैं. 30 अक्टूबर की सुनवाई के बाद पार्टी के नाम, जोड़ा घास फूल चिन्ह, संगठनात्मक नियंत्रण और कोष पर अधिकार का फैसला किया जाना है.
महिला तृणमूल के लोकतांत्रिक विंग के अध्यक्ष पद से सबीना यास्मीन ने इस्तीफा दे दिया है. उन्होंने अपना इस्तीफा पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बिप्लब मित्रा को भेजा. उन्होंने खराब सेहत को पद छोड़ने की वजह बताया. सबीना हाल में ऋतब्रत बनर्जी के गुट के साथ जुड़ी थीं.
कलकत्ता हाईकोर्ट बुधवार को आईएसएफ नेता नौशाद सिद्दीकी की याचिका पर सुनवाई करेगा. उन्होंने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती दी है जिसमें पार्टी का "लिफाफा" चिन्ह बदलकर "अलमारी" कर दिया गया. आईएसएफ ने अप्रैल में हुए बंगाल चुनाव में लिफाफा चिन्ह पर ही चुनाव लड़ा था. यह चिन्ह अब तृणमूल कांग्रेस के एक धड़े, यानी ऋताब्रत बनर्जी की डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस को मिल गया है.
TMC के ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में दो याचिकाएं दाखिल की हैं. पहली याचिका में पार्टी के पुराने नाम और चुनाव चिह्न को न देने के फैसले को चुनौती दी गई है, जबकि दूसरी याचिका विधानसभा अध्यक्ष की बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला न लेने की देरी को लेकर है.
निर्वाचन आयोग (ECI) ने तृणमूल कांग्रेस के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों के लिए नए नाम और चुनाव चिह्न आवंटित कर दिए हैं. आयोग ने ममता बनर्जी गुट को 'ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस' नाम और 'फुटबॉल खिलाड़ी' सिंबल दिया है, जबकि बागी गुट को 'डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस' और 'लिफाफा' चुनाव चिह्न मिला है.
टीएमसी के चुनाव चिन्ह को लेकर चल रहा विवाद अब चुनाव आयोग के पास पहुंच गया है. उपचुनावों को देखते हुए दोनों गुटों ने चुनाव आयोग को अपनी पसंद के नामों और प्रतीकों (सिम्बल) की सूची भेज दी है. ममता बनर्जी गुट ने कल रात ही चुनाव आयोग को पत्र लिखकर अपनी बात रखी थी. वहीं, दूसरी ओर रतब्रत बैनर्जी गुट ने भी आज सुबह चुनाव आयोग को पत्र भेजकर नए नामों का सुझाव दिया है.
तृणमूल कांग्रेस के नाम और चुनाव चिह्न फ्रीज होने के बाद ममता बनर्जी और बागी गुट ने चुनाव आयोग को अपने नए विकल्प भेज दिए हैं. ममता गुट ने जहां रात में ही कड़ा विरोध जताते हुए चिट्ठी भेजी. वहीं, बागी खेमे ने शुक्रवार सुबह नाम और सिंबल के विकल्प सौंपे.
पश्चिम बंगाल में TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुट आमने-सामने हैं. चुनाव आयोग ने अंतरिम आदेश में दोनों गुटों को उपचुनाव में TMC के नाम और मौजूदा चुनाव चिह्न के इस्तेमाल से रोक दिया है. दोनों पक्षों से 18 सितंबर तक पार्टी के लिए तीन नाम और फ्री सिंबल सूची से तीन चुनाव चिह्न के विकल्प मांगे गए हैं.
TMC के चुनाव चिह्न को लेकर चल रहे विवाद में ऋतब्रत बनर्जी ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि वे इस फैसले का सम्मान करेंगे. साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि यह आदेश अस्थायी है और भविष्य में विवाद का समाधान निकलेगा.
तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच नाम और चुनाव चिन्ह को लेकर आज चुनाव आयोग सुनवाई करेगा. आयोग गुरुवार को ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी के गुटों की सुनवाई करेगा. ये फैसला नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को होने वाले उपचुनावों के लिए अहम होगा.
TMC के नाम, संगठन पर नियंत्रण और चुनाव चिह्न को लेकर ममता बनर्जी और ऋतब्रत बनर्जी गुट आमने-सामने हैं. दोनों गुट गुरुवार को चुनाव आयोग के सामने अलग-अलग अपना पक्ष रखेंगे. नंदीग्राम और रेजीनगर उपचुनाव से पहले आयोग के रुख पर सबकी नजर है.
नंदीग्राम उपचुनाव के लिए बीजेपी ने हसिरानी रथ को अपना उम्मीदवार बनाया है. हसिरानी रथ, चंद्रनाथ रथ की मां हैं, जो शुभेंदु अधिकारी के पीए थे. खास बात यह है कि तृणमूल के दोनों गुटों ने भी अलग-अलग उम्मीदवार उतारे हैं. ऐसे में नंदीग्राम में मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है.
पश्चिम बंगाल में उपचुनावों के बीच टीएमसी में वर्चस्व की जंग तेज हो गई है, जहां बागी ऋतब्रत खेमे ने ममता बनर्जी को नंदीग्राम सीट से निर्विरोध चुनाव लड़ने का खुला ऑफर दिया है. वहीं, पार्टी के नाम और 'घास पर दो फूल' चुनाव चिह्न पर अपने दावे को लेकर दोनों विरोधी धड़े 12 सितंबर को चुनाव आयोग के सामने अपना पक्ष रखेंगे.
पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता बनाए रखने का आदेश दिया है. डिवीजन बेंच ने टीएमसी की अंतरिम राहत याचिका खारिज करते हुए मामले को सिंगल बेंच के पास वापस भेजा है, जो दो महीने में अंतिम फैसला सुनाएगी.
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर तृणमूल कांग्रेस से जुड़े विवाद की जांच जल्द समाप्त करने की मांग की है. उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की शिकायत पर शुरू की गई जांच में आगे कोई समय विस्तार न देने का आग्रह किया है.
कोलकाता में 21 जुलाई शहीद दिवस पर इस बार तीन अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित हुए हैं. ममता बनर्जी के तृणमूल कांग्रेस गुट, विद्रोही ऋतब्रत बनर्जी गुट और कांग्रेस ने इस मौके पर अपने-अपने कार्यक्रम आयोजित किए हैं. ऐसे में पुलिस ने सुरक्षा के लिए लगभग 1,000 जवान तैनात किए हैं और ड्रोन से भी निगरानी रखी जा रही है.
टीएमसी को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है. अदालत ने टीएमसी के खाते से खर्च करने का अधिकार ममता बनर्जी गुट को दिया है. हालांकि अदालत ने खर्चों की निगरानी करने के लिए एक विशेष अधिकारी की नियुक्ति की है.
कलकत्ता हाईकोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तीन बैंक खातों में सामान्य रूप से लेनदेन शुरू करने का एक बड़ा और महत्वपूर्ण आदेश दिया है. पुलिस द्वारा खातों को फ्रीज करने के दिए गए तर्कों से असंतुष्ट होकर कोर्ट ने यह अंतरिम व्यवस्था की है.
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद से ममता बनर्जी की टेंशन खत्म होने का नाम नहीं ले रही है. टीएमसी में बगावत के बाद विधायक और सांसद पहले ही साथ छोड़ गए हैं. उसके बाद पार्टी दफ्तर छिना और अब पार्टी का बैंक खाता भी फ्रीज हो गया है. इस तरह ममता के हाथों से टीएमसी का कन्ट्रोल निकलता जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के दो गुटों के बीच राज्यसभा की तीन खाली सीटों पर उपचुनाव घोषित हो गए हैं. वहीं, टीएमसी में चुनाव चिन्ह और उम्मीदवारों के नामांकन को लेकर विवाद जारी है. निर्वाचन आयोग ने 14 जुलाई तक नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख तय की हैज. ऐसे में चुनाव आयोग टीएमसी विवाद पर अंतरिम फैसला दे सकता है.
पश्चिम बंगाल में राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले उपचुनाव ने टीएमसी की अंदरूनी कलह और बीजेपी की बढ़ती राजनीतिक ताकत को खुलकर सामने ला दिया है. विधानसभा में भारी बहुमत के चलते बीजेपी तीनों सीटों पर मजबूत स्थिति में दिख रही है, जबकि ममता बनर्जी और बागी गुट के बीच जारी संघर्ष ने टीएमसी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं और वह मुकाबले में ही नहीं दिख रही.