
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है. दोनों नेताओं ने 10 अक्टूबर को मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था और शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था. दोनों नेता चुनाव आयुक्त और ECI से जुड़े मुद्दों, छात्रों की गिरफ्तारी, मेट्रो स्टेशन बंद किए जाने से लेकर ट्रेनों के रद्द होने तक तमाम मामलों पर CJI को ज्ञापन सौंपना चाहते थे.
CJI ने मुलाकात से इनकार करते हुए दोनों नेताओं को जवाबी पत्र लिखा. उन्होंने जवाबी पत्र में कहा कि इन मुद्दों से जुड़े मामले सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं. ऐसे में लंबित मामलों पर चर्चा के लिए बैठक करना शक्तियों के बंटवारे के सिद्धांत का उल्लंघन होगा. उन्होंने कहा कि यह सिद्धांत संविधान की मूल संरचना का अभिन्न हिस्सा है और ऐसी बैठक स्थापित नैतिकता और न्यायिक औचित्य के भी खिलाफ होगी.

मुख्य न्यायाधीश ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि संवैधानिक ढांचे के तहत सुप्रीम कोर्ट के पास पत्र में उठाए गए मुद्दों से निपटने के लिए प्रशासनिक शक्तियां नहीं हैं. हालांकि, उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत अदालत नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए न्यायिक शक्तियों का इस्तेमाल कर सकती है.
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उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा और संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है. नागरिकों को कानून में निर्धारित प्रक्रिया के तहत किसी भी समय अपने अधिकारों को लागू कराने के लिए अदालत का रुख करने का अधिकार है. CJI ने सुझाव दिया कि प्रशासनिक स्तर पर ज्ञापन सौंपने की बजाय नेताओं के लिए न्यायिक प्रक्रिया के तहत याचिका दायर करना ज्यादा उचित होगा.

जस्टिस सूर्यकांत ने अपने पत्र में बताया कि इसी तरह के मुद्दे से जुड़े कुछ मामलों की सुनवाई मंगलवार 13 अक्टूबर को होनी है. उन्होंने राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को सोमवार को सुबह 10:30 बदे से शाम 4:30 बजे के बीच सुप्रीम कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से अपनी याचिका प्रस्तुत करने या ई-फाइलिंग के जरिए याचिका दायर करने का सुझाव दिया.
CJI ने आश्वस्त किया कि ऐसी किसी भी याचिका पर कानून के अनुसार जल्द सुनवाई की जाएगी.