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PF खाते में जमा हैं ₹1 लाख... 25, 50 या 75000 कितना निकाल पाएंगे? जानें नियम

EPFO PF Withdrawal Rules 2026: नौकरी के दौरान कभी बीमारी, तो कभी बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने के लिए बड़ी रकम की जरूरत पड़ सकती है. ऐसे में पीएफ में जमा पैसा आपके काम आ सकता है. नए नियमों के तहत कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. लेकिन पैसा निकालने की सीमा, जरूरी सेवा अवधि और निकासी की संख्या जरूरत के हिसाब से तय होगी.

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नए नियमों के तहत पात्र कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. (Photo: ITG)
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के नए नियमों के तहत पात्र कर्मचारी अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. (Photo: ITG)

कभी अचानक इलाज पर बड़ा खर्च आ जाता है, तो कभी बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर बनवाने के लिए पैसों की जरूरत पड़ती है. ऐसी जरूरतों के लिए कर्मचारी भविष्य निधि (PF) में जमा रकम मददगार हो सकती है. अब कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने पीएफ से आंशिक निकासी (Partial Withdrawal) के नियम आसान कर दिए हैं.

नए ढांचे के तहत पात्र सदस्य अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. बाकी 25% रकम खाते में न्यूनतम बैलेंस के तौर पर रखनी होगी. हालांकि, निकासी की सीमा, सेवा अवधि और कितनी बार पैसा निकाला जा सकता है, यह जरूरत की श्रेणी पर निर्भर करेगा. पीएफ की आंशिक निकासी के इस नए ढांचे को 1 जुलाई 2026 से लागू किया गया है. नियमों और आवेदन से जुड़ी जानकारी के लिए ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट https://www.epfindia.gov.in/ देख सकते हैं.

पीएफ निकासी के नियमों में क्या बदला?

पहले पीएफ से आंशिक निकासी के लिए अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से कई नियम थे. इससे पात्रता और निकासी की शर्तें समझना मुश्किल हो सकता था. अब इन प्रावधानों को तीन प्रमुख श्रेणियों में रखा गया है:

आवश्यक जरूरतें: बीमारी, बच्चों की पढ़ाई और शादी

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आवास संबंधी जरूरतें: घर या प्लॉट खरीदना, मकान बनाना, होम लोन चुकाना और मरम्मत

विशेष परिस्थितियां: तय प्रावधानों के तहत दूसरी जरूरतों के लिए आंशिक निकासी

नए ढांचे में आंशिक निकासी के लिए न्यूनतम सेवा अवधि भी घटाकर 12 महीने कर दी गई है. निकासी की गणना में कर्मचारी और नियोक्ता, दोनों के अंशदान के साथ जमा ब्याज को शामिल किया जाता है.

₹1 लाख जमा हैं, तो कितना पैसा निकाल पाएंगे?

नियम के मुताबिक, पात्र पीएफ बैलेंस का अधिकतम 75% निकाला जा सकता है और कम से कम 25% रकम खाते में बचाकर रखनी होगी. यहां 25% बैलेंस का मतलब कोई तय रकम नहीं है. यह आपके पात्र पीएफ बैलेंस के हिसाब से तय होगा. वास्तविक निकासी संबंधित श्रेणी की शर्तों और पात्रता पर भी निर्भर करेगी.

बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए कितनी बार निकाल सकेंगे पैसा?

बीमारी, शिक्षा और शादी को जरूरी जरूरतों की श्रेणी में रखा गया है. इन मामलों में कम से कम 12 महीने की सेवा पूरी करने के बाद निकासी के लिए आवेदन किया जा सकता है.

बीमारी: एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 3 बार निकासी की अनुमति.

पढ़ाई: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 10 बार निकासी.

शादी: पूरी सदस्यता अवधि के दौरान अधिकतम 5 बार निकासी.

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इन जरूरतों के लिए भी निकासी की अधिकतम सीमा और बाकी शर्तें लागू रहेंगी. इसलिए केवल पात्र होने का मतलब यह नहीं है कि हर बार खाते में जमा पूरी रकम निकाली जा सकेगी.

घर खरीदने, बनाने या होम लोन चुकाने के नियम

अगर आप घर खरीदने, प्लॉट लेने, मकान बनवाने या होम लोन चुकाने के लिए पीएफ का इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो हाउसिंग श्रेणी में निकासी का प्रावधान है. घर की मरम्मत, सुधार या नवीनीकरण के लिए भी तय शर्तों के तहत पैसा निकाला जा सकता है.

इसके लिए कम से कम 12 महीने की सदस्यता पूरी होनी चाहिए. आवास संबंधी जरूरतों के लिए पूरी सदस्यता अवधि में अधिकतम 5 बार निकासी की अनुमति है. हालांकि, आवेदन मंजूर होने के लिए संबंधित योजना की पात्रता शर्तें पूरी करना जरूरी है.

25% रकम खाते में क्यों रखनी होगी?

पीएफ का मकसद केवल जरूरत के समय पैसा उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि नौकरी के बाद के जीवन के लिए बचत तैयार करना भी है. बार-बार निकासी करने पर रिटायरमेंट के समय खाते में कम रकम बच सकती है. इसी वजह से न्यूनतम 25% बैलेंस बनाए रखने का प्रावधान किया गया है. खाते में बची रकम पर ब्याज मिलता रह सकता है और समय के साथ ब्याज पर ब्याज यानी चक्रवृद्धि का लाभ भी मिल सकता है. इससे लंबे समय में रिटायरमेंट के लिए बचत तैयार करने में मदद मिलती है.

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विशेष परिस्थितियों में भी निकाल सकते हैं पैसे

विशेष परिस्थितियों की श्रेणी में नियमों को आसान किया गया है. इसके तहत सदस्य को कुछ स्थितियों में निकासी का कारण बताने की जरूरत नहीं होती. हालांकि, इस श्रेणी में भी निर्धारित शर्तें और निकासी की सीमाएं लागू होती हैं. बेरोजगारी की स्थिति में सदस्य तत्काल अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकता है. बाकी 25% रकम 12 महीने की बेरोजगारी के बाद निकाली जा सकती है. यह सामान्य आंशिक निकासी के नियमों से अलग प्रावधान है.

इसके अलावा, रिटायरमेंट और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियों में पूरी रकम के अंतिम निपटान की अनुमति हो सकती है. इनमें स्थायी विकलांगता, छंटनी, स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति और स्थायी रूप से विदेश जाने जैसी स्थितियां शामिल हैं. हालांकि, हर मामले में संबंधित नियमों के मुताबिक पात्रता की जांच जरूरी है.

पीएफ निकालने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

पीएफ से जरूरत के समय पैसा निकालने की सुविधा राहत देती है, लेकिन इसे नियमित खर्चों का विकल्प नहीं बनाना चाहिए. खाते से निकाली गई रकम पर आगे मिलने वाला ब्याज और चक्रवृद्धि का लाभ कम हो सकता है. इसका असर रिटायरमेंट के समय मिलने वाली कुल बचत पर पड़ सकता है. इसलिए बीमारी या किसी जरूरी खर्च के लिए निकासी करते समय अपनी मौजूदा जरूरत और भविष्य की बचत, दोनों का हिसाब रखें. आवेदन करने से पहले ईपीएफओ की आधिकारिक वेबसाइट पर नियम और पात्रता जरूर जांचें.

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