कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड बैलेंस (PF Balance) की पार्शियल और फुल विड्रॉल को लेकर नए नियम लागू किए हैं. एम्पलॉयी प्रोविडेंट फंड स्कीम 2026 के तहत समय से पहले फाइनल PF सेटलमेंट और एम्पलॉयी पेंशन स्कीम (EPS) से जुड़े विड्रॉल बेनिफिट पर वेटिंग पीरियड तय किया गया है. इन बदलावों के बाद कर्मचारियों के बीच इस बात को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि वे जरूरत के समय अपनी रिटायरमेंट सेविंग्स का इस्तेमाल कैसे कर पाएंगे.
सरकार ने 10 अगस्त को लोकसभा में लिखित जवाब के जरिए इन बदलावों से जुड़ी जानकारी दी. सरकार से EPF बैलेंस और पेंशन फंड के पार्शियल और फुल विड्रॉल नियमों में किए गए संशोधनों और कर्मचारियों की सेविंग्स तक उनकी पहुंच को लेकर सवाल पूछा गया था.
EPF सेटलमेंट के लिए कितना इंतजार?
श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने लोकसभा में बताया कि EPFO ने समय से पहले फाइनल EPF सेटलमेंट के लिए 12 महीने का वेटिंग पीरियड लागू किया है. वहीं, EPS के तहत विड्रॉल बेनिफिट लेने के लिए 36 महीने का वेटिंग पीरियड रखा गया है. इसका मतलब है कि नौकरी छोड़ने के तुरंत बाद EPFO मेंबर्स अपने पूरे EPF बैलेंस का फाइनल सेटलमेंट नहीं करा सकेंगे. इसी तरह EPS के तहत विड्रॉल बेनिफिट लेने वाले सदस्यों को भी 36 महीने की निर्धारित अवधि का इंतजार करना होगा.
इस दौरान PF से पैसा निकाल सकते हैं?
वेटिंग पीरियड लागू होने का मतलब यह नहीं है कि EPFO मेंबर्स इस दौरान अपने PF से किसी भी तरह की निकासी नहीं कर पाएंगे. सरकार के मुताबिक, EPFO ने पार्शियल और एडवांस PF विड्रॉल के नियमों को आसान और ज्यादा लचीला बनाया है.
ईपीएफओ सदस्य तीन व्यापक कैटेगरी के तहत अपने PF बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. ये कैटेगरी हैं...
इन प्रावधानों के तहत नौकरी नहीं होने के दौरान खर्च, मेडिकल इमरजेंसी, शिक्षा, घर और दूसरी जरूरी जरूरतों के लिए PF से पैसा निकाला जा सकता है.
साल में दो बार 75% तक PF विड्रॉल
श्रम राज्य मंत्री ने बताया कि विशेष परिस्थितियों में ईपीएफओ सदस्य बिना कारण बताए साल में दो बार अपने पीएफ बैलेंस का 75% तक निकाल सकते हैं. यानी फाइनल सेटलमेंट के लिए वेटिंग पीरियड के बावजूद जरूरत पड़ने पर PF की एक बड़ी राशि तक पहुंच बनी रहेगी, हालांकि विड्रॉल लागू शर्तों के अधीन होगी.
EPS के 36 महीने के नियम पर सवाल
सरकार से EPS के तहत विड्रॉल बेनिफिट के लिए 36 महीने के वेटिंग पीरियड और PF अकाउंट में 25% न्यूनतम बैलेंस बनाए रखने की शर्त को लेकर भी सवाल पूछा गया था. सरकार ने अपने जवाब में कर्मचारियों, ट्रेड यूनियनों या नियोक्ताओं की ओर से मिली किसी खास आपत्ति या प्रतिनिधित्व का विस्तृत ब्योरा नहीं दिया. हालांकि, मंत्री ने नियमों में बदलाव से पहले सभी स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श की प्रक्रिया की जानकारी दी.
सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज में हुई थी चर्चा
EPFO के सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज (CBT) में मान्यता प्राप्त ट्रेड यूनियनों, नियोक्ता संगठनों और केंद्र व राज्य सरकारों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं. शोभा करंदलाजे के मुताबिक, सभी संशोधनों को CBT की 238वीं बैठक में रखा गया था. वहां इन पर विस्तार से चर्चा और विचार-विमर्श किया गया, जिसके बाद सरकार को नोटिफिकेशन के लिए सिफारिश भेजी गई.
EPFO का सेटलमेंट क्लेम पर फोकस
सरकार से नए पीएफ विड्रॉल नियमों के कारण कर्मचारियों को होने वाली वित्तीय दिक्कतों और इन्हें लागू करने में आने वाली चुनौतियों को लेकर भी सवाल किया गया. जवाब में सरकार ने बताया कि EPFO तीन स्तरों पर काम कर रहा है...
नए नियमों के तहत समय से पहले पूरे EPF फाइनल सेटलमेंट और EPS विड्रॉल बेनिफिट के लिए वेटिंग पीरियड लागू किया गया है, लेकिन ईपीएफओ सदस्यों को आवश्यक जरूरतों, हाउसिंग और विशेष परिस्थितियों में पार्शियल पीएफ विड्रॉल की सुविधा जारी रहेगी. हालांकि, यह विड्रॉल तय नियमों और पात्रता की शर्तों के अधीन होगा.