सुदेश लहरी कॉमेडी की दुनिया का बड़ा नाम हैं. आज उनके पास घर, गाड़ी... बंगला सब है. पर एक वक्त था जब वो पाई-पाई को मोहताज थे. आलम ये था कि उन्हें घरवालों का पेट भरने के लिए अपनी ट्रॉफी तक बेचनी पड़ी.
सुदेश लहरी ने कई बार अपनी गरीबी पर बात की. उन्होंने इंटरव्यू में कहा था- उस समय हालात बहुत मुश्किल थे. घर में बहुत गरीबी थी और मैं छोटी उम्र में छोटी दुकानों, फैक्ट्रियों और चाय की दुकानों पर काम करता था. घर में हालात इतने खराब थे कि कभी-कभी चाय तक नहीं बन पाती थी. लेकिन जब मैं चाय की दुकान पर काम करता था, तो आस-पास की फैक्ट्रियों में चाय ले जाता था. मैं बहुत छोटा था और मेरे पास चप्पलें तक नहीं थीं.
जब भी मैं किसी गली या कोने की दुकान के पास से गुजरता, तो एक कप लेकर उसमें थोड़ी चाय डालकर पी लेता था. फिर कप को कपड़े से साफ करके फैक्ट्री वापस ले जाता था. कभी-कभी मैं हलवा, बर्फी और समोसे भी बनाता था. मैंने जूते की फैक्ट्रियों और कार फैक्ट्रियों में भी काम किया. मैंने कुल्फी भी बेची है.
मनीष पॉल के थ्रोबैक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा- आर्थिक तंगी की वजह से मैं कभी एक्टिंग की क्लास नहीं ले सका या एक्टिंग सीख नहीं पाया. जब मैं चाय की दुकान पर काम करता या कुल्फी बेचता, तो मुझे उस काम को करने वाले की तरह बोलना और अभिनय करना पड़ता था. ये खुद एक तरह की एक्टिंग थी. आज अगर मुझे रिक्शा चालक का किरदार निभाना हो, तो मैं बहुत आराम से कर सकता हूं.
अमन औजला के साथ एक पॉडकास्ट में सुदेश लहरी ने बताया कि भाषा की बाधा और पढ़ाई की कमी के कारण उन्हें आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा. एक बार अंग्रेजी अच्छी तरह न आने के कारण उन्होंने गलती से किसी शो के लिए 50,000 रुपये की जगह 15,000 रुपये मांग लिए. हालांकि, पैसे मिलने के बाद उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ.
सुदेश लहरी की जिंदगी का एक मुश्किल समय ऐसा भी था, जब उन्हें एक कठिन फैसला लेना पड़ा. सुदेश ने बताया कि एक बार परिवार को खाना खिलाने के लिए उन्होंने 300-400 रुपये में अपनी ट्रॉफी बेच दी.
पर कहते हैं ना कि हर किसी का वक्त बदलता है. सुदेश लहरी की जिंदगी में भी वो पल आया, जब उनकी जिंदगी ने 360 डिग्री टर्न लिया. लाफ्टर शेफ के सेट पर कृष्णा अभिषेक ने सुदेश लहरी की लाइफ में आई शोहरत का जिक्र किया था.
कृष्णा ने शो पर कहा- सुदेश लहरी जी ने न कभी मीडिया में कहा. न कभी किसी इंटरव्यू में कहा. ये किसी की मौत में शामिल होने गए थे. इन्होंने श्मशान घाट के किसी कोने में एक महिला को बैठे देखा. उनके जिस्म पर कई घाव थे. वो तकलीफ में थी. सुदेश जी उस महिला को अपने घर ले आए. उसे अपने साथ अपने घर में मां बनाकर रखा और उस लेडी की सेवा की.
उस महिला ने मरते वक्त इन्हें आशीर्वाद दिया था कि तेरा कभी बुरा नहीं होगा. तू बहुत सफल होगा. उस आशीर्वाद के बाद ही इन्हें बॉम्बे से कॉल आया और तब सुदेश लहरी... सुदेश लहरी बन गए. आज वो क्या हैं, ये शायद ही किसी को बताने की जरुरत है.
All Photos: Instagaram @realsudeshlehri