आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल अब सिर्फ मोबाइल और कंप्यूटर तक ही सीमित नहीं रहने वाला है. अब आप एआई से गाड़ी में बैठकर भी सवाल पूछ सकेंगे और अपने सफर से जुड़ी कई जानकारियां हासिल कर सकेंगे. Hyundai अपनी नई Bayon में ऐसा ही AI वॉइस असिस्टेंट देने जा रही है, जो Perplexity की एआई टेक्नोलॉजी और SoundHound AI की वॉइस टेक्नोलॉजी की मदद से काम करेगा. कंपनी के मुताबिक, यह भारत में हुंडई का पहला जनरेटिव AI वॉइस असिस्टेंट होगा. आइए जानते हैं कि कैसे काम करेगी यह टेक्नोलॉजी.
अब AI से पूछ सकेंगे सफर से जुड़े सवाल
अभी तक ज्यादातर वॉइस असिस्टेंट को किसी खास कमांड के हिसाब से काम करना पड़ता है. लेकिन जनरेटिव एआई की मदद से यूजर नॉर्मल भाषा में सवाल पूछ सकते हैं. यानी हर बार किसी प्रीसेट कमांड को बोलने की जरूरत नहीं होगी.
अगर आप कहीं घूमने जा रहे हैं, तो AI से अपने सफर का प्लान बनाने के लिए कह सकते हैं. यह आपको रास्ते में मौसम की जानकारी देने, होटल खोजने और आसपास अच्छे रेस्टोरेंट के बारे में बताने में मदद करेगा.
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इतना ही नहीं, यूजर इससे आसपास की शॉपिंग जगहों और खेल से जुड़ी जानकारी भी मांग सकेंगे. मैच के स्कोर या किसी नॉर्मल सवाल का जवाब जानने के लिए भी इस असिस्टेंट का इस्तेमाल किया जा सकेगा.
इसका मकसद सफर के दौरान छोटी-छोटी जानकारियों के लिए बार-बार फोन देखने की जरूरत को कम करना है. कंपनी ने अभी यह साफ नहीं किया है कि एआई के सभी फीचर्स के लिए इंटरनेट जरूरी होगा या नहीं.
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NVIDIA की टेक्नोलॉजी भी मिलेगी
इस AI असिस्टेंट के साथ गाड़ी में NVIDIA की टेक्नोलॉजी से लैस Connected Car Navigation Cockpit भी मिलेगा. इसमें 12.3 इंच की दो कर्व्ड स्क्रीन दी जाएंगी. एक स्क्रीन पर ड्राइविंग से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी, जबकि दूसरी का इस्तेमाल इंफोटेनमेंट और नेविगेशन के लिए होगा. इस सिस्टम में ऑनलाइन नेविगेशन, स्प्लिट-स्क्रीन और अपनी पसंद के हिसाब से कंट्रोल सेट करने जैसे फीचर्स मिलेंगे.
हर भाषा में जवाब मिलेगा
हुंडई ने भारतीय यूजर्स को ध्यान में रखते हुए 500 से ज्यादा इन-बिल्ट वॉइस कमांड देने की जानकारी दी है. इनका इस्तेमाल हिंदी, अंग्रेजी, तमिल, बंगाली और तेलुगु में किया जा सकेगा. इनमें से कई कमांड बिना इंटरनेट के भी काम करेंगे.
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ध्यान देने वाली बात यह है कि इन भाषाओं में मिलने वाले नॉर्मल वॉइस कमांड और Perplexity वाला जनरेटिव AI असिस्टेंट अलग-अलग फीचर्स हैं. फिलहाल जनरेटिव एआई असिस्टेंट के लिए अंग्रेजी भाषा का सपोर्ट बताया गया है.
कुल मिलाकर, यह बदलाव दिखाता है कि एआई अब रोजमर्रा की टेक्नोलॉजी का हिस्सा बन रहा है. आने वाले समय में यूजर्स सिर्फ बटन दबाकर नहीं, बल्कि नॉर्मल बातचीत करके भी कई काम कर सकेंगे.