तमिलनाडु विधानसभा में विपक्ष के नेता उदयनिधि स्टालिन ने परिसीमन के मुद्दे पर डीएमके का रुख एक बार फिर साफ कर दिया है. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी शुरू से ही परिसीमन का विरोध करती रही है और आगे भी इसका विरोध जारी रखेगी. उन्होंने कहा कि यह कोई नया मुद्दा नहीं है, लेकिन केंद्र सरकार इसे ऐसे पेश कर रही है जैसे यह पहली बार सामने आया हो.
उदयनिधि स्टालिन ने कहा, "डीएमके ने हमेशा परिसीमन का विरोध किया है. हम आगे भी इसका विरोध जारी रखेंगे." उन्होंने कहा कि पार्टी का यह रुख पहले से स्पष्ट रहा है और परिसीमन को लेकर उसकी चिंताएं नई नहीं हैं.
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जनसंख्या नियंत्रण करने वाले राज्यों का न हो नुकसान!
दक्षिणी राज्यों की तरफ से परिसीमन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है. खास तौर पर आबादी को आधार बनाकर सीटों के पुनर्वितरण की आशंका को लेकर तमिलनाडु समेत दक्षिणी राज्यों का तर्क है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया, उन्हें इसका नुकसान नहीं होना चाहिए. डीएमके पहले भी आबादी आधारित परिसीमन का विरोध करती रही है.
हालांकि, परिसीमन को लेकर डीएमके के रुख में हाल के दिनों में राजनीतिक बारीकी भी देखने को मिली है. जुलाई में पार्टी ने कहा था कि वह प्रस्तावित विधेयक का अंतिम रुख उसके संसद में पेश होने के बाद तय करेगी. पार्टी नेताओं ने साथ ही यह स्पष्ट किया था कि अगर किसी प्रस्ताव से तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों के हित प्रभावित होते हैं तो डीएमके उसका विरोध करेगी.
एमके स्टालिन का भी प्रदर्शन का प्लान
इसी बीच तमिलनाडु में करुणानिधि की पुण्यतिथि पर डीएमके की तरफ से कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है. एमके स्टालिन चेन्नई में करुणानिधि की प्रतिमा से शांति मार्च निकालकर मरीना बीच स्थित उनके स्मारक तक जाएंगे.
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दूसरी तरफ, डीएमके विधानसभा में मेकेदातु बांध का मुद्दा भी उठाने की तैयारी में है. पार्टी पहले से कावेरी जल और तमिलनाडु के हितों से जुड़े इस मुद्दे पर विरोध जताती रही है.
इस तरह उदयनिधि स्टालिन का ताजा बयान परिसीमन पर डीएमके के पुराने विरोध को फिर सामने लाता है. पार्टी के लिए यह मुद्दा सिर्फ सीटों के पुनर्विन्यास का नहीं, बल्कि तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और अधिकारों से भी जुड़ा हुआ है.