परिसीमन (Delimitation) एक प्रक्रिया है जिसके तहत किसी देश या राज्य में चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या में बदलाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी क्षेत्रों को न्यायसंगत रूप से विभाजित करना है ताकि सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व समान रूप से हो सके.
परिसीमन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने में मदद करती है. इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक नागरिक का वोट समान मूल्य रखे और किसी भी क्षेत्र को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक या कम प्रतिनिधित्व न मिले.
भारत में परिसीमन का कार्य परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय होता है। यह आयोग संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत गठित किया जाता है और इसकी सिफारिशें अंतिम और बाध्यकारी होती हैं.
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने प्रस्तावित परिसीमन को लेकर बीजेपी पर निशाना साधा है. उन्होंने आरोप लगाया कि इससे तमिलनाडु की राजनीतिक ताकत और संसद में उसका प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है.
संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे सप्ताह में सरकार दो अहम विधेयक पास कराने में कामयाब हो गई है, लेकिन लोगों की निगाहें परिसीमन बिल और महिला आरक्षण बिल पर टिका हुआ है. इन दोनों बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए.
बिहार की सम्राट सरकार ने ग्राम पंचायत के पुनर्गठन के लिए परिसीमन कराने का ऐलान कर दिया है. राज्य निर्वाचन आयोग के बाद पंचायती राज विभाग ने परिसीमन के लिए अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके बाद बिहार के ग्राम पंचायत के नक्शे पूरी तरह से बदल जाएंगे.
मॉनसून सत्र के पहले दिन संसद में जोरदार हंगामे के बीच अखिलेश यादव और राहुल गांधी ने मुलाकात की है. बताया जा रहा है कि मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने चढ़ावा चोरी मामले पर विपक्ष की साझा रणनीति, सरकार को घेरने की तैयारी विस्तार से चर्चा की.
मोदी सरकार संसद के मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन बिल को पास कराने की कवायद करती नजर आ सकती है. अप्रैल में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा न जुटा पाने के चलते ये पास नहीं हो सका था. तीन महीने में विपक्ष का समीकरण बिगड़ा है, जिसके दम पर सरकार अपने कदम बढ़ा सकती है.
परिसीमन और FCRA संशोधन बिल को लेकर TMC ने सरकार पर सवाल उठाए हैं. डेरेक ओ ब्रायन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर दोनों मुद्दों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने और प्रस्तावित कानूनों पर पहले सभी दलों से चर्चा करने की मांग की है.
सरकार मॉनसून सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण बिल ला सकती है. इसके लिए बीजेपी पूरी तैयारी में जुटी हुई है. अगर सरकार को डीएमके का समर्थन मिलता है, तो उसके लिए जरूरी संख्या जुटाना काफी आसान हो जाएगा.
संसद के आगामी सत्र और ऑल-पार्टी मीटिंग के बीच परिसीमन विधेयक को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. इसी बीच कांग्रेस द्वारा इस बिल को समर्थन देने की चल रही खबरों पर पार्टी के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने सीधा पलटवार किया है.
मोदी सरकार एक बार फिर से महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल को पास कराने के लिए नंबर गेम जुटाने में जुट गई है. मॉनसून सत्र से पहले बीजेपी मिशन-360 के आंकड़े को जुटाने में लगी हुई है, लेकिन अभी भी 6 कदम दूर है. ऐसे में सरकार ने 19 जुलाई को सभी दलों की बैठक बुला ली है.
नरेंद्र मोदी सरकार की नीतियों की प्रखर विरोधी शिवसेना UBT ने परिसीमन बिल पर सरकार को शर्तों के साथ समर्थन करने की घोषणा कर राजनीतिक जगत को चौंका दिया है. शिवसेना UBT के पास लोकसभा में 9 सांसद थे, लेकिन पार्टी में ताजा बगावत के बाद उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मात्र 3 सांसद रह गए हैं.
संसद के मॉनसून सत्र की शुरुआत से पहले कांग्रेस की बड़ी बैठक हुई. सोनिया गांधी की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में संसद सत्र
मोदी सरकार एक बार फिर से मॉनसून सत्र में महिला आरक्षण बिल और परिसीमन बिल ला सकती है. दोनों बिल को पास कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत चाहिए, लेकिन बिना डीएमके के समर्थन से संभव नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डीएमकी अपने स्टैंड को बदलेगी?
परिसीमन की बहस के बीच शशि थरूर ने 'सैलरी' का उदाहरण देकर सवाल उठाया है कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटें 50% बढ़ने के बाद भी क्या उनका राजनीतिक प्रभाव बराबर रहेगा? जानिए थरूर और चंद्रबाबू नायडू के तर्क. सवाल ये है कि क्या संसद में राज्यों की राजनीतिक ताकत भी उसी अनुपात में संतुलित रहेगी?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटें समान रूप से बढ़ाई भी जाती हैं, तब भी राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की तरफ ही झुकेगा.
इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल गिर गया था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे.
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के त्रिपुरा की तकरीबन गुमनाम पार्टी में शामिल हो जाने के साथ बगावत की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. लेकिन, महाराष्ट्र उद्धव ठाकरे के सामने एक बार फिर 2022 जैसी ही चुनौती और खतरा मंडरा रहा है. जो हालात हैं, सवाल यही उठ रहा है कि अगला शिकार कौन है?
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए सत्ता परिवर्तन ने पूरे देश का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है. पश्चिम बंगाल की जीत के बाद तो बीजेपी के हौसले आसमान छू रहे हैं. खबर है कि केंद्र की बीजेपी सरकार मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल लाने का प्लान कर रही है.
मोदी सरकार अप्रैल में महिला आरक्षण संसोधन बिल के साथ परिसीमन बिल लेकर आई थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के चलते सफल नहीं हो सकी थी. दो महीने के बाद सियासी माहौल बदल गया है, क्योंकि टीएमसी में टूट और कांग्रेस से डीएमके रूठ गई है. विपक्ष के इस बिखराव का फायदा बीजेपी उठाते हुए बीजेपी फिर से दो-तिहाई नंबर जुटाने के जुगाड़ में लग गई है.
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस वक्त का इंतजार करने को कह रहे थे वो वक्त आ चुका है? क्या पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में विपक्ष को झटका देने और इंडिया गठबंधन में बिखराव के बीच अगले महीने विपक्ष को नया झटका देने और बिखेरने की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बना ली है? मानसून सत्र संभव है कि अगले महीने शुरू होगा.
केंद्र सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है. इसके लिए सरकार क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है. टीएमसी और डीएमके जैसे दलों से चर्चा हुई है. सूत्रों का दावा है कि कई टीएमसी सांसदों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
जरूरी नहीं कि तृणमूल कांग्रेस का उभरता संकट पश्चिम बंगाल तक ही सीमित हो, माना जा रहा है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, और क्षेत्रीय राजनीति के घटनाक्रम संसद की गणित तक बदल सकता है. महिला बिल पर नंबर के वजह से चूक गई बीजेपी के हाथ भी बाजी लग सकती है.