परिसीमन (Delimitation) एक प्रक्रिया है जिसके तहत किसी देश या राज्य में चुनावी क्षेत्रों की सीमाओं को पुनः निर्धारित किया जाता है. इसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या में बदलाव को ध्यान में रखते हुए चुनावी क्षेत्रों को न्यायसंगत रूप से विभाजित करना है ताकि सभी क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व समान रूप से हो सके.
परिसीमन एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो लोकतांत्रिक चुनाव प्रणाली को निष्पक्ष और प्रभावी बनाने में मदद करती है. इससे यह सुनिश्चित किया जाता है कि प्रत्येक नागरिक का वोट समान मूल्य रखे और किसी भी क्षेत्र को अन्य क्षेत्रों की तुलना में अधिक या कम प्रतिनिधित्व न मिले.
भारत में परिसीमन का कार्य परिसीमन आयोग (Delimitation Commission) द्वारा किया जाता है, जो एक स्वतंत्र संवैधानिक निकाय होता है। यह आयोग संविधान के अनुच्छेद 82 और 170 के तहत गठित किया जाता है और इसकी सिफारिशें अंतिम और बाध्यकारी होती हैं.
परिसीमन की बहस के बीच शशि थरूर ने 'सैलरी' का उदाहरण देकर सवाल उठाया है कि सभी राज्यों की लोकसभा सीटें 50% बढ़ने के बाद भी क्या उनका राजनीतिक प्रभाव बराबर रहेगा? जानिए थरूर और चंद्रबाबू नायडू के तर्क. सवाल ये है कि क्या संसद में राज्यों की राजनीतिक ताकत भी उसी अनुपात में संतुलित रहेगी?
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बताया कि सभी राज्यों में लोकसभा सीटें समान रूप से बढ़ाई भी जाती हैं, तब भी राजनीतिक प्रभाव बड़े राज्यों की तरफ ही झुकेगा.
इस साल अप्रैल में संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़ा संवैधानिक संशोधन बिल गिर गया था. बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे जबकि विरोध में 230 वोट पड़े थे.
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के त्रिपुरा की तकरीबन गुमनाम पार्टी में शामिल हो जाने के साथ बगावत की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. लेकिन, महाराष्ट्र उद्धव ठाकरे के सामने एक बार फिर 2022 जैसी ही चुनौती और खतरा मंडरा रहा है. जो हालात हैं, सवाल यही उठ रहा है कि अगला शिकार कौन है?
पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में हुए सत्ता परिवर्तन ने पूरे देश का राजनीतिक समीकरण बदल दिया है. पश्चिम बंगाल की जीत के बाद तो बीजेपी के हौसले आसमान छू रहे हैं. खबर है कि केंद्र की बीजेपी सरकार मॉनसून सत्र में फिर से महिला आरक्षण संशोधन और परिसीमन बिल लाने का प्लान कर रही है.
मोदी सरकार अप्रैल में महिला आरक्षण संसोधन बिल के साथ परिसीमन बिल लेकर आई थी, लेकिन दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाने के चलते सफल नहीं हो सकी थी. दो महीने के बाद सियासी माहौल बदल गया है, क्योंकि टीएमसी में टूट और कांग्रेस से डीएमके रूठ गई है. विपक्ष के इस बिखराव का फायदा बीजेपी उठाते हुए बीजेपी फिर से दो-तिहाई नंबर जुटाने के जुगाड़ में लग गई है.
क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस वक्त का इंतजार करने को कह रहे थे वो वक्त आ चुका है? क्या पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में विपक्ष को झटका देने और इंडिया गठबंधन में बिखराव के बीच अगले महीने विपक्ष को नया झटका देने और बिखेरने की रणनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बना ली है? मानसून सत्र संभव है कि अगले महीने शुरू होगा.
केंद्र सरकार मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक को दोबारा पेश कर सकती है. इसके लिए सरकार क्षेत्रीय दलों के साथ बातचीत कर सहमति बनाने की कोशिश कर रही है. टीएमसी और डीएमके जैसे दलों से चर्चा हुई है. सूत्रों का दावा है कि कई टीएमसी सांसदों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है.
जरूरी नहीं कि तृणमूल कांग्रेस का उभरता संकट पश्चिम बंगाल तक ही सीमित हो, माना जा रहा है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक समीकरणों को भी प्रभावित कर सकता है, और क्षेत्रीय राजनीति के घटनाक्रम संसद की गणित तक बदल सकता है. महिला बिल पर नंबर के वजह से चूक गई बीजेपी के हाथ भी बाजी लग सकती है.
कांग्रेस आगामी लोकसभा चुनाव 2029 को ध्यान में रखते हुए दक्षिण भारत में अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में सक्रिय दिखाई दे रही है. कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु से जुड़े हालिया राजनीतिक फैसले संगठनात्मक प्राथमिकताएं, सामाजिक समीकरणों और नेतृत्व की भूमिकाओं को लेकर काफी सजग नजर आई है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्र के नाम संबोधन को लेकर कांग्रेस ने लोकसभा स्पीकर को विशेषाधिकार हनन का नोटिस सौंपा है. कांग्रेस का आरोप है कि प्रधानमंत्री के भाषण में सांसदों के लोकसभा में मतदान व्यवहार और उनकी नीयत पर सवाल उठाया गया. कांग्रेस का आरोप है कि यह सदन के विशेषाधिकार का उल्लंघन और अवमानना का मामला है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग के ऐन पहले डीएमके ने अपने प्रचार अभियान में फिर से बदलाव किया है. अब तमिल अस्मिता और द्रविड़ गौरव के साथ ही डीएमके नेता एमके स्टालिन को विजेता और तमिलनाडु के लोगों के रखवाले के रूप में पेश किया जा रहा है.
पीएम मोदी ने देश के नाम संबोधन में विपक्ष पर जोरदार हमला बोला. उन्होंने कहा कि कांग्रेस और उसके साथी दल परिसीमन पर लगातार झूठ बोल रहे हैं. ये इस बहाने विभाजन की आग को सुलगाना चाहते हैं. पीएम ने कहा कि कांग्रेस ‘बांटों और राज करो’ की पॉलिटिक्स अंग्रेजों से विरासत में सीखकर आई है. देखें वीडियो.
लोकसभा-विधानसभा में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण देने का बिल, एक्सप्रेस स्पीड से मुद्दा बन गया. शुक्रवार शाम लोकसभा में यह विधेयक मतदान की कसौटी पार करने में चूक गया, लेकिन उतनी तत्परता से सत्ता पक्ष के बैनर-पोस्टर पर चढ़ गया. गृह मंत्री अमित शाह अपने भाषण में इसका इशारा पहले ही कर चुके थे. सोशल मीडिया कैंपेन शुरू हो गया है.
महिला आरक्षण बिल गिरने के बाद सियासी घमासान तेज हो गया है. प्रियंका गांधी ने सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए 2023 में पारित कानून को लागू करने की मांग की है. उन्होंने नए प्रस्ताव को परिसीमन से जुड़ा बताते हुए इसे राजनीतिक रणनीति करार दिया. वहीं बीजेपी विपक्ष पर महिला विरोधी होने का आरोप लगा रही है, जिससे संसद से सड़क तक बहस और प्रदर्शन का माहौल बन गया है
कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण पर बीजेपी के हमलों का जवाब देते हुए कहा है कि विपक्ष ने परिसीमन बिल को गिराया जो लोकतंत्र के खिलाफ है साथ उन्होनें सरकार से पुराने कानून को लागू करने की बात कही. प्रियंका ने कहा कि विक्ष ने लोकतंत्र बचाया है और सरकार का षडयंत्र एकदम अलग था.
विपक्ष ने संसद में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संशोधन बिल को खारिज कर दिया. NDA दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा सका, जिससे मोदी सरकार को 12 साल में पहली विधायी हार मिली.
महिला आरक्षण से जुड़ा संविधान संशोधन बिल लोकसभा में गिर गया. मोदी सरकार बिल को लोकसभा में पास नहीं करा पाई. लोकसभा में कुल 528 सांसदों ने वोट डाले. इसके पक्ष में 298, जबकि विपक्ष में 230 वोट पड़े. बिल को पास कराने मोदी सरकार जरूरी दो-तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सकी. देखें वीडिय.
Parliament Session Live Updates: लोकसभा में संविधान संशोधन बिल वोटिंग में गिर गया है. इस बिल पर चर्चा का गृह मंत्री अमित शाह ने जवाब दिया. गृह मंत्री के जवाब के बाद कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यह बिल विचार और पारित करने के लिए पेश कर दिया. यह बिल पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी.
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में जवाब दिया. इस दौरान उन्होंने विपक्ष पर हमला बोलते हुए कहा कि इंडी अलायंस के सभी सदस्यों ने अगर, मगर, किंतु, परंतु का उपयोग कर साफ तौर पर महिला आरक्षण का विरोध किया. शाह ने कहा कि ये विरोध केवल महिला आरक्षण का है, उसके इम्पलीमेंटेशन का नहीं. देखें वीडियो.
वोट की ताकत में असमानता का मुख्य कारण जनसंख्या का असंतुलन है जिससे लोकतंत्र का मूल सिद्धांत कमजोर होता है. उदाहरण के लिए, यदि किसी राज्य में एक सांसद कम लोगों का प्रतिनिधित्व करता है तो वहाँ के वोट ज्यादा प्रभावी होते हैं, जबकि जहाँ एक सांसद बहुत अधिक लोगों का प्रतिनिधित्व करता है. वहाँ वोट की कीमत कम हो जाती है. इसलिए सरकार परिसीमन प्रक्रिया के माध्यम से इस असंतुलन को दूर करने का प्रयास कर रही है .