महाराष्ट्र के कल्याण पश्चिम से आवारा कुत्तों के आतंक की एक बेहद चिंताजनक तस्वीर सामने आई है. खड़कपाड़ा के बिर्ला कॉलेज रोड स्थित संदीप होटल इलाके समेत कल्याण के कई हिस्सों में कुत्तों ने बड़ी संख्या में लोगों पर हमला किया. दावा है कि रविवार दोपहर से सोमवार दोपहर तक 161 से ज्यादा लोग डॉग बाइट का शिकार हुए.
सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में खड़कपाड़ा, बिर्ला कॉलेज रोड, पुराने आरटीओ कार्यालय के आसपास का क्षेत्र और भोईरवाड़ी शामिल हैं. स्थानीय लोगों के मुताबिक कुत्ते राहगीरों, बाइक सवारों और रिक्शा चालकों के पीछे दौड़ते थे और मौका मिलते ही काट लेते थे.
11 साल की बच्ची गंभीर
हमले में एक 11 वर्षीय बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई. उसे बेहतर इलाज के लिए मुंबई के सायन स्थित लोकमान्य तिलक अस्पताल रेफर किया गया है.
अस्पताल में बढ़ती भीड़
KDMC के रुक्मिणीबाई अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुलक्षणा त्रिभुवन के अनुसार, रविवार देर रात तक 58 मरीज पहुंचे. सोमवार शाम 4 बजे तक 103 नए मरीज दर्ज किए गए. कई लोगों ने निजी अस्पतालों में भी इलाज कराया. घायलों को खरोंच, नाखून लगने और गहरे घाव जैसी तीन श्रेणियों में बांटकर इलाज किया जा रहा है. 46 गंभीर मरीजों को भर्ती कर विशेष उपचार दिया गया है.
अस्पताल के अनुसार गंभीर मरीजों को रेबीज इम्युनोग्लोब्युलिन (RIG) और अन्य मरीजों को एंटी-रेबीज वैक्सीन (ARV) दी जा रही है. दोनों दवाओं का पर्याप्त स्टॉक होने का दावा किया गया है.
लोगों में दहशत
स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई परिवारों ने बच्चों को घर से बाहर नहीं निकलने दिया. सोसायटी के मैदानों में खेलने वाले बच्चों को भी घर के अंदर रखा गया. इलाके में डर का माहौल बना रहा.
KDMC पर उठे सवाल
घटना के बाद कल्याण-डोंबिवली महानगरपालिका (KDMC) की नसबंदी और वैक्सीनेशन व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं. लोगों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद कुत्तों को पकड़ने में तत्काल कार्रवाई नहीं की गई.
प्रशासन हरकत में आया
घटना के बाद KDMC आयुक्त अभिनव गोयल और महापौर हर्षाली थविल चौधरी ने पत्रीपूल स्थित डॉग स्टेरिलाइजेशन और वैक्सीनेशन सेंटर का निरीक्षण किया. महापौर ने कहा कि प्रशासन रात से ही कुत्तों को पकड़ने की कोशिश कर रहा है और नसबंदी व वैक्सीनेशन का काम तेज करने के निर्देश दिए गए हैं.
विपक्ष का हमला
ठाकरे गुट के नेता उमेश बोरगांवकर ने कहा कि इतनी बड़ी घटना के बाद प्रशासन का जागना शर्मनाक है और नगर निगम के पास कोई ठोस योजना नहीं है.
फिलहाल इलाके में कुत्तों को पकड़ने और स्थिति नियंत्रित करने के लिए अभियान जारी है, लेकिन इस घटना ने शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को लेकर गंभीर चिंता पैदा कर दी है.