उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के लिए अस्तित्व और राजनीतिक भविष्य की दृष्टि से सबसे अहम माना जा रहा. 2017 और 2022 के लगातार दो विधानसभा चुनावों में हार के चलते पार्टी सत्ता से बाहर है. लोकसभा चुनाव में बेहतर प्रदर्शन के नाते सपा को 2027 में सत्ता में वापसी की नई उम्मीद जागी है, जिसके चलते शिवपाल यादव और अखिलेश यादव यानी चाचा-भतीजे की जोड़ी सपा के सामाजिक और रणनीतिक समीकरणों को नए सिरे से साधने में जुट गए हैं.
सपा प्रमुख अखिलेश यादव इन दिनों अपने विनिंग फॉर्मूले 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ-साथ 'सॉफ्ट हिंदुत्व' के जरिए गैर-यादव ओबीसी और सवर्ण जातियों के बीच अपनी पैठ बढ़ाने में जुटे हैं.
वहीं, सपा के कोर वोटबैंक माने जाने वाले मुस्लिम समुदाय को साधे रखने के मोर्चे पर चाचा शिवपाल यादव लग गए हैं. शिवपाल यादव ने पिछले दो दिनों में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुस्लिम बहुल इलाके संभल और रामपुर का दौरा किया. इस दौरे को पार्टी के मुस्लिम आधार को मजबूत रखने और किसी भी तरह की नाराजगी या असमंजस को दूर करने की एक सोची-समझी रणनीति के रूप में देखा जा रहा है.
शिवपाल का संभल और रामपुर का दौरा
पश्चिमी यूपी की सियासत में मुस्लिम वोटर काफी अहम है. इस इलाके में सपा की पूरी सियासत मुस्लिम वोटों पर ही केंद्रित है. संभल और रामपुर दोनों ही क्षेत्र सपा की सियासत के लिहाज से बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते हैं. रामपुर में आजम खान के परिवार के साथ हुए कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रमों के बाद कार्यकर्ताओं के मनोबल को बढ़ाना और मुस्लिम समुदाय में पार्टी के प्रति विश्वास बहाल रखना एक बड़ी चुनौती रहा है.
वहीं, संभल में भी हालिया घटनाक्रमों के बाद स्थानीय समीकरणों को संतुलित रखना आवश्यक था. सपा के महासिचव शिवपाल यादव ने संभल और रामपुर का दौरा ही नहीं किया बल्कि स्थानीय प्रमुख मुस्लिम नेताओं, धर्मगुरुओं और आम कार्यकर्ताओं से सीधी मुलाकात की. आजम खान से रामपुर जेल में जाकर मिले और उसके बाद शिवपाल यादव ने उनके घर जाकर परिवार के साथ मुलाकात की.
बर्क से आजम परिवार तक को साध गए
शिवपाल ने कहा कि आजम खान बहुत तकलीफ में हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि इतने बड़े नेता को जेल में जमीन पर लिटाया जा रहा है. उन्हें न दवाई दी जा रही है. न ही कपड़े दिए जा रहे हैं. शिवपाल यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनते ही आजम खान पर हुए एक-एक जुल्म और अत्याचार का बदला लिया जाएगा. इस तरह शिवपाल ने संदेश दिया कि समाजवादी पार्टी हर परिस्थिति में अपने कार्यकर्ताओं और मुस्लिम समाज के साथ खड़ी है.
शिवपाल सिंह यादव ने मंगलवार को संभल और मुरादाबाद में मुस्लिम समुदाय के लोंगो से मिले. उन्होंने वादा किया कि प्रदेश में सपा की सरकार बनने के बाद पूर्व मंत्री आजम खां और संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क के खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे वापस होंगे.
शिवपाल ने कहा कि बीजेपी सरकार में समाजवादी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं का राजनीतिक उत्पीड़न किया जा रहा है. उन्होंने हाल ही में संभल हिंसा प्रकरण में आई न्यायिक जांच आयोग की रिपोर्ट पर असहमति जताते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए जानबूझकर ऐसी जांच कराई गई, जिसका हिसाब भी किया जाएगा.
आजम खान को गृहमंत्री बनाने का किया वादा
शिवपाल यादव ने जिस तरह संभल से लेकर रामपुर तक दौरा कर बर्क परिवार से आजम खान की फैमिली तक के साथ मजबूती से खड़े करने का संदेश दिया है.रामपुर में जौहर यूनिवर्सिटी के अधिकारियों के साथ बैठक और विश्वविद्यालय में पढ़ रहे छात्रों के साथ संवाद किया. इतना ही नहीं आजम खान पर एक्शन लेने वाले आईएएस अधिकारी आंजनेय कुमार सिंह पर भी शिवपाल ने निशाना साधा.
शिवपाल ने 2027 में अखिलेश यादव को सीएम और आजम खान को गृह मंत्री बनाने की बात कही. शिवपाल ने कहा कि आजम खान के साथ जेल में बहुत बुरा सलूक हुआ है. इसलिए, इस बार इनको (भाजपा) हराना है और उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बनाना है. इस दौरान एक शख्स कहता है कि कि आजम भाई (आजम खान) को रक्षा मंत्री बनाना है. इस पर शिवपाल कहते हैं कि बिल्कुल बनेंगे. रक्षा मंत्री नहीं पहले गृह मंत्री.
चाचा-भतीजे की सियासी केमिस्ट्री
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सपा इस समय 'दोतरफा रणनीति' पर काम कर रही है. अखिलेश यादव इन लगातार मंदिरों के दर्शन, धार्मिक आयोजनों में भागीदारी और समावेशी बयानबाजी के जरिए बीजेपी के हिंदुत्व कार्ड की काट ढूंढ रहे हैं, उनका उद्देश्य पार्टी पर लगने वाले मुस्लिम परस्ती और 'तुष्टिकरण' के आरोपों को खारिज करना और बहुसंख्यक वर्ग के तटस्थ मतदाताओं को अपने साथ जोड़ना है.
अखिलेश के इस रुख से कहीं मुस्लिम मतदाता खुद को उपेक्षित न महसूस करने लगें. इस अलावा AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की यूपी में आक्रामक मुस्लिम सियासत की तरफ मुसलमानों का झुकाव न बढ़ जाए. इसीलिए मुस्लिमों को साधे रखने की कमान शिवपाल यादव ने संभाल रखी है. शिवपाल की जमीनी पकड़, अपना पुराना नेटवर्क और मुस्लिम नेताओं से उनका व्यक्तिगत जुड़ाव इस काम के लिए बेहद कारगर साबित हो सकता है.
20 फीसदी मुस्लिम वोटर कितने अहम
यूपी में मुस्लिम वोट की ताकत आबादी के लिहाज से देखें तो अनुमानों के मुताबिक यूपी में करीब चार करोड़ मुस्लिम हैं. ये आंकड़ा सूबे की कुल आबादी का करीब 20 फीसदी पहुंचता है. रामपुर, अमरोहा, बिजनौर समेत सूबे की 80 में से करीब 65 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाताओं की तादाद 30 फीसदी के आसपास या इससे अधिक है. रामपुर में तो मुस्लिम आबादी 49 फीसदी के करीब है.
सूबे की कुल 403 विधानसभा सीटों में से 143 सीटों पर मुस्लिम अपना असर रखते हैं. इनमें से 70 सीटों पर मुस्लिम आबादी बीस से तीस फीसद के बीच है. 73 सीटें ऐसी हैं जहां मुसलमान तीस फीसद से ज्यादा है. सूबे की करीब तीन दर्जन ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां मुस्लिम उम्मीदवार अपने दम पर जीत दर्ज कर सकते हैं जबकि करीब 107 विधानसभा सीटें ऐसी हैं जहां अल्पसंख्यक मतदाता चुनावी नतीजों को खासा प्रभावित करते हैं. इनमें ज्यादातर सीटें पश्चिमी उत्तर प्रदेश, तराई वाले इलाके और पूर्वी उत्तर प्रदेश की हैं.
2027 की चुनावी राह की चुनौतियां
उत्तर प्रदेश की सियासत में केवल मुस्लिम-यादव (एम-वाई) समीकरण के भरोसे सत्ता तक पहुंचना आसान नहीं रहा है. इसी वजह से सपा अपने आधार का विस्तार कर रही है. हालांकि, इस विस्तार के दौरान अपने कोर वोट बैंक को बिखरने से बचाना सबसे बड़ी चुनौती है.
चाचा और भतीजे की यह जोड़ी रणनीति के तहत अलग-अलग मोर्चों पर काम करती दिख रही है. अखिलेश जहां अपनी छवि को व्यापक और सर्वग्राही बनाने में लगे हैं तो शिवपाल यादव धरातल पर उतरकर उन वर्गों को भरोसा दिला रहे हैं जो दशकों से पार्टी का आधार रहे हैं. संभल से रामपुर तक का यह दौरा इसी सियासी बिसात का एक अहम अध्याय माना जा रहा है.