परमाणु युग में सबसे डरावना सवाल यह नहीं है कि किसके पास सबसे ज़्यादा परमाणु हथियार हैं. बल्कि प्रश्न यह है कि कौन इनका इस्तेमाल सबसे पहले कर सकता है. परमाणु बमों का इस्तेमाल पहली और एकमात्र बार दूसरे विश्व युद्ध के दौरान किया गया था. आज से लगभग 81 साल पहले. तब से कई देशों ने परमाणु हथियार बनाने की तकनीक हासिल कर ली है, और ये हथियार पहले से कहीं ज़्यादा खतरनाक हो गए हैं.
चीन में जन्मे कनाडाई शिक्षाविद और भू-राजनीतिक मामलों के जानकार प्रोफ़ेसर जियांग ज़्यूकिन ने इस सवाल का जवाब दिया कि परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने वाला अगला देश कौन हो सकता है. प्रोफ़ेसर जियांग ज़्यूकिन अपनी थ्योरी पर आधारित भविष्यवाणियों के लिए जाने जाते हैं.
प्रोफ़ेसर जियांग यूट्यूबर राज शमानी के पॉडकास्ट में शामिल हुए. इस बातचीत के वीडियो 11 अगस्त को अपलोड किए गए थे. जब उनसे भविष्य के किसी टकराव में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना के बारे में पूछा गया, तो जियांग ने एक ऐसी भविष्यवाणी की जिसमें भारत के पश्चिमी पड़ोसी देश को इस भयानक स्थिति के केंद्र में रखा गया.
प्रोफ़ेसर जियांग ने कहा कि पाकिस्तान ही वह देश है जिसके सबसे पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की आशंका है.
प्रोफ़ेसर जियांग किसी आसन्न परमाणु युद्ध की भविष्यवाणी नहीं कर रहे थे. असल में उन्होंने इसके उलट बात कही. उन्होंने कहा, "मैं व्यक्तिगत रूप से यह नहीं मानता कि हमारी ज़िंदगी में कभी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल होगा, क्योंकि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल को लेकर दुनिया भर में एक तरह की मनाही है."
इस प्रोफेसर ने 2024 में ट्रंप की सत्ता में वापसी और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित युद्ध जैसी भू-राजनीतिक भविष्यवाणियां की थी. ये भविष्यवाणियां सच हुईं और वे मशहूर हो गए.
पाकिस्तान पर अपनी बात कहते हुए इस प्रोफेसर ने आगे अहम बात कही.
उन्होंने कहा, "लेकिन अगर मुझे अंदाज़ा लगाना हो कि कौन सा देश सबसे पहले परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करेगा, तो वह भारत या पाकिस्तान में से कोई एक होगा. शायद पाकिस्तान."
प्रोफ़ेसर जियांग के मुताबिक इसकी वजह पाकिस्तान की परमाणु युद्ध लड़ने की इच्छा नहीं बल्कि उस देश की कमज़ोरियां हैं.
दो घंटे के एक पॉडकास्ट में उन्होंने कहा, "पाकिस्तान परमाणु हथियारों वाला एक बहुत ही कमज़ोर, अव्यवस्थित और भ्रष्ट देश है. हो सकता है कि आपातकालीन स्थिति में खुद को रोकने के लिए उनके पास ज़रूरी कंट्रोल सिस्टम न हों."
मार्च में अमेरिका के पत्रकार मेहदी हसन के साथ एक इंटरव्यू में प्रोफ़ेसर जियांग ने माना कि असल में वह प्रोफ़ेसर नहीं हैं, बल्कि लोगों ने ही उन्हें ऐसा कहना शुरू कर दिया था.
भारत परमाणु हथियारों का इस्तेमाल क्यों नहीं करेगा
जियांग ने पाकिस्तान को "कमजोर, गरीब, भ्रष्ट और बंटा हुआ" बताया. उनका तर्क था कि अगर कभी परमाणु हथियारों का इस्तेमाल हुआ तो सबसे ज़्यादा संभावना भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध की होगी.
यह भविष्यवाणी एक चिंताजनक आकलन है, लेकिन यह उस रणनीतिक सच्चाई पर ध्यान केंद्रित करती है जिसने दशकों से दक्षिण एशियाई परमाणु राजनीति को परिभाषित किया है.
भारत और पाकिस्तान की परमाणु नीतियां एक जैसी नहीं हैं. भारत ने 'पहले इस्तेमाल न करने' (No First Use) की घोषित नीति बनाए रखी है, हालांकि समय-समय पर इस नीति पर बहस होती रही है और इसमें कुछ बदलाव भी किए गए हैं. वहीं दूसरी ओर पाकिस्तान ने जानबूझकर रणनीतिक अस्पष्टता बनाए रखी है और 'पहले इस्तेमाल न करने' की नीति को नहीं अपनाया है.
इसका न्यूक्लियर हथियार भंडार मूल रूप से भारत की बड़ी पारंपरिक सैन्य क्षमता को रोकने से जुड़ा है.
प्रोफेसर जियांग का तर्क इसी असमानता पर आधारित है.
उन्होंने कहा, "भारत को इस्लामाबाद के खिलाफ परमाणु हथियारों का इस्तेमाल करने की ज़रूरत नहीं है, जबकि भारत के खिलाफ टिके रहने के लिए पाकिस्तान को ऐसा करना पड़ सकता है।"
2000 के दशक की शुरुआत से ही पाकिस्तान की राजनीतिक और सैन्य बयानबाजी में यह सोच बार-बार सामने आती रही है.
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के आंकड़ों के अनुसार भारत के पास 190 परमाणु वॉरहेड हैं, जिनमें से 12 वॉरहेड पहली बार 2025 में तैनात किए गए हैं. पाकिस्तान के पास लगभग 170 परमाणु वॉरहेड हैं, लेकिन उसने कोई भी परमाणु वॉरहेड तैनात नहीं किया है.
पाकिस्तानी नेताओं की बार-बार परमाणु हमले की धमकियां
2002 में करगिल में पाकिस्तान के सरेंडर के साथ खत्म हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य टकराव के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने चेतावनी दी थी कि अगर उनके देश के अस्तित्व पर खतरा आया तो वे परमाणु हथियारों का इस्तेमाल कर सकते हैं.
2019 में पुलवामा आतंकी हमले और भारत की बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री इमरान खान ने चेतावनी दी थी कि परमाणु हथियार रखने वाले दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से परमाणु युद्ध हो सकता है. इस बात को तनाव बढ़ने के नतीजों के बारे में चेतावनी के तौर पर कहा गया था, लेकिन इससे यह भी पता चला कि पाकिस्तान की सुरक्षा योजनाओं में परमाणु हथियारों की क्या भूमिका है.
मई 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भी यह बात फिर से चर्चा में आई.
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा कि अगर "हमारे अस्तित्व पर सीधा खतरा" हुआ तो परमाणु हथियारों का इस्तेमाल किया जा सकता है, हालांकि बाद में उन्होंने परमाणु विकल्प को "बहुत दूर की संभावना" बताया और कहा कि उस समय ऐसा कोई इरादा नहीं था.
पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने भी कहा कि इस्लामाबाद का परमाणु हथियार तैनात करने का कोई इरादा नहीं है और उनकी पारंपरिक सैन्य क्षमताएं काफी हैं.
बाद में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने ज़ोर देकर कहा कि उनका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों और देश की सुरक्षा के लिए है, न कि आक्रामकता के लिए. वहीं राष्ट्रपति आसिफ अली ज़रदारी ने पाकिस्तान की परमाणु क्षमता को "विश्वसनीय न्यूनतम निवारक" बताया जिसका मकसद रणनीतिक संतुलन बनाए रखना और बाहरी हमले से देश की रक्षा करना है.
लेकिन हाल के समय में सबसे चौंकाने वाला बयान पाकिस्तान के सैन्य नेतृत्व की तरफ से आया.
आसिम मुनीर का 'माउथ डायरिया' जियांग की थ्योरी को सपोर्ट करता है
अगस्त 2025 में खबर आई कि पाकिस्तान के आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने फ्लोरिडा के टाम्पा में एक डिनर के दौरान कहा, "हम एक परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं. अगर हमें लगा कि हम बर्बाद हो रहे हैं, तो हम आधी दुनिया को भी अपने साथ ले डूबेंगे."
यह भी खबर आई कि उन्होंने मिसाइलों से भारत के किसी भी ऐसे बांध को नष्ट करने की धमकी दी जिससे पाकिस्तान की पानी की सप्लाई पर असर पड़ता हो. इसके बाद भारत ने इन बयानों को "परमाणु हथियारों की धमकी" करार दिया.
यह घटनाक्रम प्रोफेसर जियांग की भविष्यवाणी को संदर्भ देता है. पाकिस्तान की परमाणु नीति लंबे समय से इस खतरनाक सोच पर टिकी है कि परमाणु हथियार पारंपरिक सैन्य कमजोरी की भरपाई करते हैं. अगर भारत के पास बड़ी पारंपरिक सैन्य और आर्थिक ताकत है, तो पाकिस्तान का परमाणु जखीरा वह हथियार है जो भारत को इस ताकत का फायदा उठाने से रोकता है.
जियांग का यह तर्क नहीं है कि पाकिस्तान परमाणु हमला करने की तैयारी कर रहा है. बल्कि उनकी चिंता यह है कि अगर पारंपरिक संघर्ष ऐसे मोड़ पर पहुंच जाए जहां पाकिस्तान के नेतृत्व को लगे कि देश का वजूद ही खतरे में है, तो क्या होगा.
तब परमाणु हथियार केवल एक डेटरेंट नहीं रह जाते. वे एक बचाव का रास्ता बन जाते हैं.
जियांग ने कहा, "फिर भी मुझे व्यक्तिगत रूप से लगता है कि हमारी ज़िंदगी में कभी परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की संभावना जीरो परसेंट है."
लेकिन अगर वह लगभग जीरो वाली संभावना कभी हकीकत बन जाती है, तो उनका मानना है कि पहले परमाणु हमले का रास्ता भारत-पाकिस्तान सीमा से होकर गुजर सकता है.
दो दशकों से पाकिस्तान का संदेश मूल रूप से यही रहा है कि परमाणु हथियार उसके अस्तित्व को सुनिश्चित करने के लिए हैं.