बिजनौर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले का एक पुराना शहर और जिला मुख्यालय है. यहां अपना नगरपालिका बोर्ड है और शहर के पास खुदाई में सिंधु घाटी सभ्यता के अवशेष मिले हैं.
बिजनौर एक सामान्य, अनारक्षित विधानसभा क्षेत्र है और बिजनौर लोकसभा सीट के पांच हिस्सों में से एक है. यह निर्वाचन क्षेत्र 1951 में बना था. इसमें बिजनौर नगरपालिका बोर्ड की पूरी सीमा, मंडावर और झालू नगरपालिका क्षेत्र, साथ ही मंडावर, बिजनौर और दारा नगर कानूनगो सर्कल शामिल हैं.
बिजनौर में 1952 से अब तक 19 विधानसभा चुनाव हुए हैं, जिनमें 2014 का उपचुनाव भी शामिल है. शुरुआती दशकों में इस सीट पर कांग्रेस का दबदबा रहा. पार्टी ने सात बार जीत हासिल की, जिसमें 1952 और 1967 के बीच लगातार चार जीतें शामिल थीं. उसकी आखिरी जीत 1985 में हुई, जिसके बाद पार्टी का प्रभाव कम हो गया. बीजेपी ने छह बार जीत दर्ज की है और कांग्रेस की जगह मुख्य ताकत बन गई है. बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने दो बार जीत हासिल की है, जबकि भारतीय क्रांति दल, जनता पार्टी, जनता दल और समाजवादी पार्टी ने एक-एक बार जीत हासिल की है.
बीजेपी के कुंवर भरतेंद्र सिंह ने 2012 में यह सीट जीती और बीएसपी के महबूब को 17,467 वोटों से हराया. 2014 में उनके लोकसभा के लिए चुने जाने के बाद उपचुनाव हुआ, जिसे समाजवादी पार्टी ने जीता; रुचि वीरा ने बीजेपी के हेमेंद्र पाल को 11,567 वोटों से हराया. बीजेपी ने 2017 में यह सीट फिर से हासिल की, जब सूची चौधरी ने मौजूदा एसपी विधायक रुचि वीरा को 27,281 वोटों से हराया, इस चुनाव में शीर्ष दो स्थानों पर महिला नेता रहीं. सूची चौधरी ने 2022 में राष्ट्रीय लोक दल (RLD) के उम्मीदवार नीरज चौधरी को 1,445 वोटों के मामूली अंतर से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी.
लोकसभा चुनावों के दौरान बिजनौर विधानसभा क्षेत्र में वोटिंग के रुझानों में अक्सर बदलाव देखा गया है. 2009 में, RLD ने BSP पर 10,169 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2014 में BJP ने समाजवादी पार्टी पर 28,256 वोटों की बढ़त बनाई थी. 2019 में BSP ने BJP पर 17,402 वोटों की बढ़त हासिल की. 2024 में, समाजवादी पार्टी ने RLD पर 991 वोटों के मामूली अंतर से बढ़त बनाई. इसमें दीपक सैनी को 89,429 वोट मिले, जबकि चंदन चौहान को 88,438 वोट मिले.
बिजनौर क्षेत्र में 2012 के विधानसभा चुनाव में 317,824 रजिस्टर्ड वोटर थे और वोटिंग प्रतिशत 65.88% था. यह संख्या 2017 में बढ़कर 363,181 (वोटिंग 67.67%), 2019 में 375,497 (वोटिंग 63.82%), 2022 में 390,546 (वोटिंग 64.56%) और 2024 में 395,082 (वोटिंग 57.35%) हो गई.
2011 की जनगणना के अनुमानों के अनुसार, अनुसूचित जाति के वोटर कुल वोटरों का 22.83% हैं. हालांकि बिजनौर एक प्रमुख शहर है, लेकिन विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से ग्रामीण है. यहां 68.62% वोटर गांवों में रहते हैं, जबकि 31.38% शहरी इलाकों में रहते हैं. इस क्षेत्र में हिंदू आबादी ज्यादा है और मुस्लिम आबादी भी काफी बड़ी संख्या में है.
आस-पास के इलाके में सिंधु घाटी सभ्यता के पुरातात्विक सबूत मिले हैं, जिनमें सबसे खास आलमगीरपुर है, जो इस सभ्यता का सबसे पूर्वी स्थल है. स्थानीय मान्यता के अनुसार, इस शहर की स्थापना राजा बिजली पासी ने की थी. मध्यकाल में दिल्ली सल्तनत और मुगल साम्राज्य के दौरान इस शहर का महत्व बढ़ा. 18वीं सदी में यह रोहिल्लाओं के प्रभाव में आया और बाद में यहां मराठों और अफगानों के बीच संघर्ष हुए. रोहिल्ला युद्ध के बाद, 1774 में अंग्रेजों ने यहां कब्जा कर लिया और 1817 में बिजनौर को जिले का मुख्यालय बनाया.
यहां की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है, जिसमें गन्ना मुख्य फसल है. इसके अलावा व्यापार, छोटे उद्योग और एग्रो-प्रोसेसिंग यूनिट्स भी हैं. गन्ने की कीमतें, सिंचाई, बिजली की सप्लाई और रोजगार मतदाताओं के लिए अहम मुद्दे हैं.
भौगोलिक नजरिए से, बिजनौर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के उपजाऊ मैदानी इलाकों में गंगा नदी के पास बसा है. नहरों से सिंचाई की सुविधा के कारण यहां बड़े पैमाने पर खेती होती है.
यहां सड़क और रेल कनेक्टिविटी अच्छी है. बिजनौर का अपना रेलवे स्टेशन है जो बड़े रूटों से जुड़ा है. नेशनल और स्टेट हाईवे इस शहर को अलग-अलग दिशाओं से जोड़ते हैं.
उत्तराखंड का हरिद्वार यहां से लगभग 70-80 किमी, मेरठ लगभग 80-90 किमी, मुरादाबाद लगभग 100-110 किमी, सहारनपुर लगभग 110-120 किमी और दिल्ली लगभग 150-160 किमी दूर है. राज्य की राजधानी लखनऊ लगभग 422 किमी दूर है.
RLD के फिर से सहयोगी बनने के बाद, 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले BJP थोड़ी राहत महसूस कर सकती है. NDA का कौन सा सहयोगी दल इस सीट पर चुनाव लड़ता है, इस आधार पर सत्ताधारी गठबंधन को थोड़ी बढ़त मिल सकती है, हालांकि समाजवादी पार्टी और BSP से BJP को इस सीट को बचाने के लिए कड़ी चुनौती मिलने की उम्मीद है.
(अजय झा)
Neeraj Chaudhary
RLD
Ruchi Vira
BSP
Munir Ahmed
AIMIM
Nota
NOTA
Amiruddin
BJSAP
Gaurav Kumar
PPID
Mohan Lal
IND
Mamun Ul Haq Urf Adil Naeem
ASPKR
Vineet
AAAP
Jitendra Kumar
IND
Umesh Chand
IND
Archana Chaudhary
IND
Udai Veer Singh
IND
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उत्तर प्रदेश में 2027 के आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है. अयोध्या और मथुरा जैसे धार्मिक व सांस्कृतिक मुद्दों को लेकर समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी आमने-सामने आ गई हैं. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने अयोध्या सीट से अपना पहला प्रत्याशी पवन पांडे को घोषित कर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को वहां से सीधा चुनाव लड़ने की चुनौती दी है. इस चुनौती पर पलटवार करते हुए बीजेपी नेताओं ने कहा कि जिन्होंने राम भक्तों पर गोलियां चलवाई थीं, वे आज सनातन धर्म और अयोध्या की बात कर रहे हैं.
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उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां अभी से तेज हो गई हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सियासी मिजाज पूरे राज्य की सत्ता का समीकरण बदलने की क्षमता रखता है. इसी वजह से भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय लोक दल यानी आरएलडी इस इलाके में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रहे हैं. खबर है कि 23 दिसंबर को चौधरी चरण सिंह की जयंती के मौके पर हापुड़ में बीजेपी और आरएलडी एक साथ चुनावी बिगुल फूंक सकते हैं.
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है. मुख्य सवाल यह है कि क्या कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच गठबंधन बरकरार रहेगा या सीटों के बंटवारे पर मतभेद खुलकर सामने आएंगे. हाल ही में दिल्ली में चुनाव आयोग के खिलाफ हुए प्रदर्शन में दोनों पार्टियां एक साथ नजर आईं, जिससे विपक्ष की एकजुटता का संदेश गया. राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य नेताओं के इस विरोध प्रदर्शन को अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी का पूरा समर्थन मिला.
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