शोरनूर विधानसभा क्षेत्र केरल के पलक्कड़ जिले में स्थित एक महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र है और यह सामान्य (अनारक्षित) सीट है. केरल विधानसभा की 140 सीटों में यह 51वीं सीट है. यह उन सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है जो मिलकर पलक्कड़ लोकसभा क्षेत्र बनाते हैं. शोरनूर विधानसभा क्षेत्र का गठन 2008 की परिसीमन प्रक्रिया के बाद हुआ. यह क्षेत्र ग्रामीण और शहरी इलाकों का मिश्रण है, जिसका केंद्र शोरनूर (Shoranur) शहर है. शोरनूर केरल का एक बड़ा रेलवे जंक्शन है और इस इलाके का प्रमुख परिवहन केंद्र भी माना जाता है. इस विधानसभा क्षेत्र में शोरनूर नगरपालिका (Municipality) के साथ-साथ ओट्टाप्पलम तालुक की कुछ पंचायतें- अनंगनाड़ी, चालावरा, चेरपुलसेरी, नेल्लाया, त्रिक्कदेरी, वणियमकुलम और वेल्लिनेझी शामिल हैं. यह क्षेत्र भारतपुझा (Bharathapuzha) नदी के किनारे बसा हुआ है, और नदी के कारण शोरनूर शहर परिवहन, व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा केंद्र बन गया है.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में शोरनूर में कुल 1,94,287 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें 1,00,430 महिला मतदाता और 93,857 पुरुष मतदाता शामिल थे. केरल में लोकतांत्रिक भागीदारी हमेशा से मजबूत रही है और इसका उदाहरण 2021 में भी दिखा, जब यहां 78.32% मतदान हुआ यानी बड़ी संख्या में लोगों ने वोट डाला.
शोरनूर विधानसभा क्षेत्र बनने के बाद से यह इलाका लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (LDF) और खासतौर पर CPI(M) के लिए मजबूत गढ़ बन गया. परिसीमन के बाद हुए शुरुआती दो चुनावों में CPI(M) के उम्मीदवारों ने जीत हासिल की. 2011 में इस नए बने क्षेत्र का पहला चुनाव CPI(M) की के. एस. सलीखा ने जीता, जिससे यहां वामपंथी प्रभाव की शुरुआत मानी जाती है. 2016 में CPI(M) के पी. के. ससी ने कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर सीट अपने पास बनाए रखी. 2021 में भी मुकाबला कड़ा रहा, लेकिन CPI(M) के पी. मम्मीकुट्टी ने जीत दर्ज की और शोरनूर में LDF का लगातार शासन जारी रहा.
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, 2021 के केरल विधानसभा चुनाव में CPI(M) (LDF) के पी. मम्मीकुट्टी को 74,400 वोट मिले, जो कुल वैध वोटों का लगभग 48.98% था. दूसरे नंबर पर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (UDF) के टी. एच. फिरोज बाबू रहे, जिन्हें 37,726 वोट मिले यानी लगभग 24.83% वोट. वहीं भाजपा (NDA) के संदीप वारियर को भी 36,973 वोट मिले, जो करीब 24.34% था. इससे यह साफ हुआ कि भाजपा का प्रभाव यहां बढ़ रहा है. पी. मम्मीकुट्टी ने 36,674 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जो कुल वैध वोटों का लगभग 24.21% है. यह जीत CPI(M) की पकड़ को मजबूत दिखाती है, लेकिन साथ ही UDF और NDA के अच्छे वोट शेयर यह भी बताते हैं कि शोरनूर में मुकाबला बहुदलीय और प्रतिस्पर्धी बना हुआ है.
शोरनूर विधानसभा क्षेत्र की अर्थव्यवस्था शहरी और कृषि, दोनों स्रोतों पर आधारित है. ग्रामीण इलाकों में भारतपुझा नदी और उसकी शाखाओं से सिंचाई होती है, जिससे पारंपरिक खेती मजबूत है. यहां मुख्य रूप से धान, नारियल और सब्जियों की खेती होती है. दूसरी तरफ शोरनूर का रेलवे जंक्शन रोजगार और व्यापार को बढ़ावा देता है, खासकर लॉजिस्टिक्स, परिवहन और संबंधित व्यवसायों में. शोरनूर की मजबूत परिवहन कनेक्टिविटी इस क्षेत्र के व्यापार को भी सहारा देती है.
परिसीमन के बाद से हुए तीनों विधानसभा चुनावों में शोरनूर ने CPI(M) के जरिए वामपंथी सरकार को समर्थन दिया है. हालांकि, यहां चुनावी माहौल केवल एकतरफा नहीं है. UDF, जिसमें इस क्षेत्र में मुख्य रूप से कांग्रेस मजबूत है, उसे भी अच्छी वोट हिस्सेदारी मिलती रही है. वहीं भाजपा (NDA) का वोट प्रतिशत हाल के चुनावों में बढ़ा है, जिससे संकेत मिलता है कि शहरी क्षेत्रों और युवाओं के बीच भविष्य में बदलाव संभव है. यह रुझान केरल के कुछ अन्य क्षेत्रों में भी देखने को मिला है.
शोरनूर क्षेत्र में चुनावों के दौरान प्रमुख मुद्दों में बुनियादी ढांचे (Infrastructure) का विकास, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं, रोजगार के अवसर, और नदी-किनारे होने के कारण बाढ़ प्रबंधन (Flood Management) जैसे विषय शामिल रहते हैं.
शोरनूर में घूमने के लिए भी कई जगहें हैं, जैसे शोरनूर भारतपुझा नदी के किनारे, कुजियानमकुन्न व्यू पॉइंट, वरिक्कास्सेरी मना और पोझाथु मना (ऐतिहासिक घर), तथा वेल्लिनेझी आर्ट विलेज, जो अपनी कला और सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है.
(श्रेया प्रसाद)
Firoz Babu.t.h
INC
Sandeep Varier
BJP
Muhammad Musthafa
SDPI
Ayyappan Kutty. T.c.
BSP
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