केरल के पलक्काड जिले में स्थित चित्तूर विधानसभा क्षेत्र राज्य की 140 सीटों में 58वीं सीट है. यह अलाथूर लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सात विधानसभा क्षेत्रों में से एक है. यह सीट सामान्य (अनारक्षित) श्रेणी की है और लंबे समय से केरल की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही है.
चित्तूर विधानसभा क्षेत्र में अर्ध-शहरी इलाके और ग्राम पंचायतों का मिश्रण देखने को मिलता है. यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि प्रधान है और इसमें चित्तूर-थाथामंगलम नगरपालिका के साथ-साथ चिट्टूर तालुक की एरुथेम्पथी, कोझिंजामपारा, नल्लेपिल्ली, पट्टांचेरी, पेरुमट्टी और वडाकरापथी पंचायतें शामिल हैं. इसके अलावा पलक्काड तालुक की पेरुवेम्बा और पोलपुल्ली पंचायतें भी इस विधानसभा क्षेत्र का हिस्सा हैं. यह इलाका धान के खेतों, नकदी फसलों की खेती, छोटे स्तर के कृषि आधारित उद्योग, और आसपास के बाजार शहरों से जुड़े बढ़ते सेवा क्षेत्र के कारण पहचाना जाता है.
2021 के केरल विधानसभा चुनाव में चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार चित्तूर में कुल 1,89,510 पंजीकृत मतदाता थे. इनमें लगभग 91,204 पुरुष और 94,532 महिला मतदाता शामिल थे. रिकॉर्ड में कुछ कम संख्या में ऐसे मतदाता भी थे जो सेना में सेवा दे रहे थे या विदेश में रह रहे थे. कुल 1,44,316 वैध वोट डाले गए और सीट पर 77.32% मतदान दर्ज हुआ. यह आंकड़ा बताता है कि यह क्षेत्र राजनीतिक रूप से जागरूक है और चुनाव में भागीदारी भी मजबूत रहती है.
चित्तूर को एक प्रतिस्पर्धी सीट माना जाता रहा है, जहां परिसीमन के बाद से अलग-अलग राजनीतिक मोर्चों के प्रतिनिधि चुने जाते रहे हैं. यहां मुख्य मुकाबला परंपरागत रूप से LDF (लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट) और UDF (यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट) के बीच रहा है. हालांकि पिछले कुछ चुनावों में चित्तूर में वाम मोर्चे का पलड़ा भारी रहा है. इस सीट से के. कृष्णनकुट्टी (जनता दल (सेक्युलर)- LDF) लगातार तीन बार जीत चुके हैं. वे 2011, 2016 और 2021 में विधायक चुने गए और वर्तमान में केरल सरकार में बिजली मंत्री भी हैं.
2021 के चुनाव में के. कृष्णनकुट्टी ने 84,672 वोट प्राप्त किए और करीब 55.38% वोट शेयर के साथ जीत दर्ज की. दूसरे स्थान पर एडवोकेट सुमेश अच्युतन (भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस - UDF) रहे, जिन्हें 50,794 वोट मिले और उनका वोट शेयर लगभग 33.22% रहा. बाकी वोटों का छोटा हिस्सा NOTA और अन्य उम्मीदवारों के बीच बंट गया.
2021 का परिणाम इस बात का संकेत था कि चित्तूर में LDF ने अपना आधार मजबूत बनाए रखा है. के. कृष्णनकुट्टी ने चुनावी प्रतिस्पर्धा के बावजूद अपनी पकड़ कायम रखी और लगातार जीत दर्ज की. हालांकि UDF की कांग्रेस ने भी अच्छा प्रदर्शन किया, जिससे यह स्पष्ट है कि सीट पर मुकाबला पूरी तरह एकतरफा नहीं है. यहां संगठन और स्थानीय मुद्दों के आधार पर वोटिंग का प्रभाव लगातार बना रहता है, इसलिए आने वाले चुनावों में भी इस सीट को “कड़ी लड़ाई” वाली सीट माना जाता रहेगा.
चित्तूर की अर्थव्यवस्था का आधार आज भी कृषि है. यहां बड़े पैमाने पर धान, नारियल, केला और सुपारी की खेती होती है. ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में परिवारों की आय खेती और उससे जुड़े कामों पर निर्भर है. यहां की खेती पर मानसून और पानी की उपलब्धता का बड़ा असर पड़ता है. कई बार पानी की कमी और बारिश के उतार-चढ़ाव से फसल प्रभावित होती है. फिर भी, इस क्षेत्र में नहर नेटवर्क और जलमार्गों के जरिए सिंचाई की व्यवस्था बनी हुई है, जो खेती को स्थिरता देती है. इस सीट पर छोटे और सीमांत किसानों की संख्या काफी है, जिन्हें स्थानीय सहकारी संस्थाओं और ग्रामीण सहायता योजनाओं का सहारा मिलता है.
चित्तूर में विकास की चर्चा मुख्य रूप से खेती और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी रहती है. यहां के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं- किसानों को बाजार से जोड़ना और कृषि को मजबूत समर्थन देना, सिंचाई व्यवस्था को और बेहतर बनाना, एग्रो-मार्केट्स तक पहुंच बढ़ाना, सड़क, परिवहन और जल प्रबंधन जैसी बुनियादी सुविधाओं का आधुनिकीकरण.
चित्तूर में धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन के कुछ महत्वपूर्ण स्थान भी हैं. इनमें चित्तूरकावु देवी मंदिर, चित्तूर गुरुमडोम, मूलाथारा रेगुलेटर (डैम) और कुन्नम पिदारी मिनी डैम प्रमुख हैं.
(श्रेया प्रसाद)
Adv. Sumesh Achuthan
INC
V. Natesan
BJP
Nota
NOTA
A. Chandran
BSP
Prameela. K
IND
Nsk Puram Sasikumar
IND
केरल चुनाव के बीच पीएम मोदी 4 अप्रैल को तिरुवनंतपुरम और तिरुवल्ला में जनसभा और रोड शो करेंगे. NDA शक्ति प्रदर्शन के जरिए वोटरों तक पहुंच बनाने की रणनीति अपनाएगा.
कोच्चि से कोल्लम तक की इस ग्राउंड रिपोर्ट में चुनावी माहौल, वोटरों की उलझन और राजनीतिक जोश साफ दिखता है. रास्ते में LDF और UDF के घोषणापत्र, रैली में कांग्रेस समर्थकों का भरोसा और प्रियंका गांधी का भाषण इस चुनाव की तस्वीर पेश करते हैं. हालांकि इंटरव्यू का मौका आखिरी पल में छूट गया, लेकिन यही फील्ड रिपोर्टिंग की असली चुनौती भी है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल के बीजेपी कार्यकर्ताओं से संवाद करते हुए कांग्रेस और वाम दलों पर तीखा हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि राज्य में बीजेपी-एनडीए के पक्ष में माहौल बन रहा है और जनता बदलाव चाहती है. पीएम मोदी ने कांग्रेस को माओवादी मुस्लिम लीग कांग्रेस बताया.
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर पाकिस्तान हालात का फायदा उठाकर कोई दुस्साहस करता है, तो भारत का जवाब अभूतपूर्व और निर्णायक होगा. ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र करते हुए उन्होंने सेना के साहस की सरहाना की.
केरलम में जबरदस्त चुनावी माहौल के बीच राहुल गांधी ने मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक साथ निशाना साधा है. कांग्रेस नेता ने विजयन के ट्रंप की तरह मोदी के प्रभाव में होने का आरोप लगाया है. ध्यान रहे, निजी हमलों का रिजल्ट और रिकॉर्ड अच्छा नहीं रहा है.
केरल विधानसभा चुनाव के लिए 9 अप्रैल को मतदान है, लेकिन ईरान के साथ अमेरिया और इजरायल की चल रही जंग खत्म होने नहीं हो रही है. इसका असर केरल के चुनाव में भी पड़ता दिख रहा है, क्योंकि गल्फ देशों में रहने वाले मलयाली वोटर्स इस बार मतदान के लिए नहीं आ पा रहे हैं.
पश्चिम बंगाल, असम और केरल सहित पांच राज्यों में चुनाव हो रहे हैं, लेकिन किस्मत दांव पर राजस्थान के नेताओं की लगी है. बंगाल में भूपेंद्र यादव की अग्निपरीक्षा तो असम में जितेंद्र सिंह और केरलम में सचिन पायलट व नीरज डांगी का इम्तिहान है. ऐसे में देखना है कि कौन सफल होता है?
राहुल गांधी का कहना है कि केरलम में उनको महिला मुख्यमंत्री बनने का इंतजार है. हकीकत देखें तो पूरे राज्य में चुनाव मैदान में महज 10 फीसदी महिलाएं हैं - और कांग्रेस ने भी 92 उम्मीदवारों में सिर्फ 9 विधानसभा सीटों पर ही महिला कैंडिडेट खड़े किए हैं.
केरल विधानसभा चुनाव के लिए मुख्य मतदान से 10 दिन पहले ही चुनावी प्रक्रिया शुरू हो गई है. निर्वाचन आयोग की पहल पर 85 वर्ष से अधिक आयु के बुजुर्गों और दिव्यांगजनों के लिए घर से वोट डालने की सुविधा सोमवार को शुरू की गई. पहले ही दिन हजारों मतदाताओं ने इस सुविधा का लाभ उठाया.
केरल में राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री मोदी पर आरोप लगाया कि भारत की विदेश और आर्थिक नीतियां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रभाव में चल रही हैं. उन्होंने कहा कि भारत की स्वतंत्र रूप से तेल खरीदने की क्षमता पर असर हुआ है.