केरल के उत्तरी जिले कन्नूर में स्थित पेरावूर केरल विधानसभा की 16वीं सीट है. यह राष्ट्रीय संसदीय चुनावों में कन्नूर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. पेरावूर एक सामान्य (अनारक्षित) सीट है और इसका राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध रहा है. इस विधानसभा क्षेत्र का गठन वर्ष 1977 में हुआ था. हालांकि यहां वामपंथी उम्मीदवार भी कभी-कभी जीतते रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक रूप से इसे कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (UDF) का गढ़ माना जाता रहा है. इस क्षेत्र की सामाजिक-आर्थिक संरचना छोटे कस्बों, कृषि आधारित आजीविका और नागरिक भागीदारी की मजबूत परंपरा से बनी है. यह इलाका ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों का मिश्रण है.
पेरावूर कर्नाटक सीमा के पास कन्नूर जिले के पहाड़ी इलाके में स्थित है और इसमें कई ग्राम पंचायतें शामिल हैं. यह क्षेत्र थालास्सेरी तालुक के अंतर्गत आता है, जिसमें अरलम, अय्यनकुन्नु, कानीचर, कीझूर-चावस्सेरी, केलाकम, कोट्टियूर, मुजक्कुन्नु, पायम और पेरावूर पंचायतें शामिल हैं। इन सभी पंचायतों से मिलकर पेरावूर विधानसभा क्षेत्र का गठन होता है.
मतदाता संख्या की बात करें तो चुनाव आयोग की 2021 केरल विधानसभा चुनाव की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार पेरावूर में कुल 1,77,249 पंजीकृत मतदाता थे, जिनमें पुरुष, महिलाएं और थर्ड जेंडर के मतदाता शामिल थे. मतदान के दिन कुल 1,41,734 वैध वोट पड़े, जिससे मतदान प्रतिशत लगभग 80.41 प्रतिशत रहा. यह आंकड़ा बताता है कि यहां के लोग लोकतांत्रिक प्रक्रिया में काफी सक्रिय भागीदारी करते हैं.
राजनीतिक इतिहास की दृष्टि से पेरावूर एक महत्वपूर्ण सीट रही है. 1977 में गठन के बाद से अधिकतर चुनावों में कांग्रेस और उसके सहयोगी UDF ने यहां जीत दर्ज की है. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) यानी CPI(M) इस सीट पर अब तक केवल एक बार, वर्ष 2006 में, जीत दर्ज कर पाई थी, जब के. के. शैलजा टीचर यहां से विधायक बनी थीं. इसके अलावा लंबे समय तक कांग्रेस का दबदबा बना रहा. 1970 और 1980 के दशक में के. पी. नूरुद्दीन (कांग्रेस) कई बार विधायक रहे. 2000 के दशक की शुरुआत में प्रो. ए. डी. मुस्तफा ने इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया. बाद में अधिवक्ता सनी जोसेफ 2011, 2016 और 2021 में लगातार तीन बार कांग्रेस की ओर से विधायक चुने गए.
2021 के विधानसभा चुनाव में पेरावूर में कांग्रेस और CPI(M) के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला. केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी (KPCC) के वर्तमान अध्यक्ष अधिवक्ता सनी जोसेफ को 64,784 वोट मिले, जो कुल मतों का लगभग 46.93 प्रतिशत था. उन्होंने CPI(M) के उम्मीदवार के. वी. सक्कीर हुसैन को बेहद कम अंतर से हराया, जिन्हें 61,942 वोट मिले यानी लगभग 44.70 प्रतिशत. भाजपा की उम्मीदवार स्मिता जयमोहन को 9,155 वोट मिले, जो करीब 6.44 प्रतिशत थे, और वे तीसरे स्थान पर रहीं. बाकी वोट SDPI, निर्दलीय उम्मीदवारों और नोटा को मिले. इस चुनाव में जीत का अंतर बहुत कम था, जिससे यह साफ हुआ कि इस क्षेत्र में UDF और LDF दोनों का मजबूत प्रभाव है.
हालांकि पेरावूर में ऐतिहासिक रूप से भाजपा और उसके सहयोगी UDF और LDF की तुलना में कमजोर रहे हैं, लेकिन 2021 में उन्हें मिले लगभग 6-7 प्रतिशत वोट यह संकेत देते हैं कि अब यहां बहुदलीय मुकाबला धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है.
सामाजिक-आर्थिक स्थिति की बात करें तो पेरावूर मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्र है और यहां की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा कृषि पर आधारित है. बड़ी संख्या में लोग मध्य और दक्षिण केरल से आकर यहां बसे प्रवासी किसान हैं. धान, रबर और मसालों की खेती यहां प्रमुख है. कस्बाई इलाकों में छोटे-मोटे व्यापार और सेवा क्षेत्र भी मौजूद हैं, लेकिन खेती अभी भी जीवनयापन का मुख्य साधन बनी हुई है.
रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों और विदेशों में जाने वाले लोगों की संख्या भी यहां काफी है, जिसका असर स्थानीय जनसंख्या संरचना और सामाजिक-आर्थिक स्थिति पर पड़ता है.
पेरावूर क्षेत्र के प्रमुख दर्शनीय और महत्वपूर्ण स्थलों में कोट्टियूर मंदिर, अरलम वन्यजीव अभयारण्य और आसपास के पहाड़ी व बागान क्षेत्र शामिल हैं, जो धार्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टि से खास माने जाते हैं.
विकास से जुड़े प्रमुख मुद्दों और प्राथमिकताओं में बेहतर सड़क और परिवहन संपर्क, रोजगार के अवसरों का सृजन, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और शिक्षा के स्तर में सुधार शामिल हैं. ये वे विषय हैं जिन पर स्थानीय जनता और जनप्रतिनिधि लगातार ध्यान देने की मांग करते रहे हैं.
(Sreya Prasad)
K V Sakkeer Hussain
CPI(M)
Smitha Jayamohan
BJP
A C Jalaluddeen
SDPI
Nota
NOTA
Sakkeer Hussain S/o Hamsa
IND
Sunny Vazhakkamalayil
IND
Sakkeer E K S/o Asiya
IND
P K Saji
NWLBRP
John Pallikkamalil
SDC
Sunny Muthukulathel
IND
Narayanakumar
IND
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