scorecardresearch
 

ट्रंप हुए मजबूर, भारत को 100% टैरिफ छूट देने की कहीं ये तो वजह नहीं?

अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने टैरिफ छूट देते हुए 60 दिन का समय लिया है. वह ग्‍लोबल और अमेरिकी इकोनॉमी का विश्‍लेषण करना चाहते हैं कि टैरिफ का इनपर क्‍या असर होगा? मार्कों रुब‍ियो ने भारत दौरे के लिए निकलने से पहले यह बात कही है.

Advertisement
X
टैरिफ पर विचार के लिए ट्रंप ने लिया 60 दिनों का वक्‍त. (Photo: White House)
टैरिफ पर विचार के लिए ट्रंप ने लिया 60 दिनों का वक्‍त. (Photo: White House)

अमेरिकी राष्‍ट्रप‍ति डोनाल्‍ड ट्रंप ने अचानक शनिवार को रूसी तेल खरीदारों पर 100 फीसदी टैरिफ लगाने के फैसले को रोक दिया और यह तर्क दिया कि यह फैसला सुरक्षा कारणों की वजह से लिया गया है. वहीं अब अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कुछ ऐसा बताया है, जिससे ऐसा प्र‍तीत होता है कि ट्रंप या तो मजबूर हैं या फिर टैरिफ को लेकर अभी फैसला नहीं कर पा रहे हैं. 

रुबियो का कहना है कि अमेर‍िकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप 60 दिनों का समय लेना चाहते हैं, ताकि वे यह समझ सकें कि रूस पर प्रतिबंध लगाने और अन्‍य देशों पर टैरिफ लगाने का ग्‍लोबल इकोनॉमी पर क्‍या असर होगा?  रुबियो ने शनिवार शाम को उज्बेकिस्तान और भारत के एक सप्ताह के दौरे पर रवाना होने से पहले पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए यह बात कही. 

दरअसल, 'रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने वाले कानून' (जिसे 'ग्राहम एक्ट' भी कहा जाता है) के तहत ट्रम्प द्वारा दी गई छूट के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में रुबियो ने कहा कि मुझे लगता है कि राष्ट्रपति 60 दिनों का समय लेना चाहते हैं ताकि वे विश्लेषण कर सकें कि प्रतिबंध और टैरिफ लगाने का वैश्विक अर्थव्यवस्था, और यहां तक कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा. 

Advertisement

उन्होंने बताया कि 'ग्राहम एक्ट' ऐसे वक्‍त में पास किया गया है, जब दुनियाभर में जियो-पॉलिटिकल तनाव है. उन्‍होंने कहा कि टैरिफ में छूट का प्रावधान इसलिए रखा गया है, ताकि दुनिया भर में चल रही अलग-अलग घटनाओं जैसे ईरान जंग के कारण ग्‍लोबल एनर्जी सपलाई पर दबाव, सऊदी अरब में हूतियों के हमले, और यूक्रेन-रूस युद्ध का अध्ययन किया जा सके. रुबियो ने कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि इन सभी बातों को ध्‍यान में रखना होगा और इनका वैल्‍यूएशन करना होगा. 

भारत आ रहे विदेश मंत्री रुबियो 
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो सोमवार को भारत आ रहे हैं. उन्‍होंने कहा कि भारत के लिए पॉजिटिव नजरिया रखते हुए कहा कि भारत जैसे देश ने अपनी एनर्जी जरूरतों के सोर्स में विविधता लाई है, लेकिन वे अभी भी रूस से काफी मात्रा में तेल खरीद रहे हैं, जिसका कारण है कि कोई भी देश रातों-रात पूरी तरह से दूसरे सोर्स पर निर्भर नहीं हो सकता है. 

रुबियो ने कहा कि भारत, अमेरिका का एक महत्वपूर्ण सहयोगी और साझेदार है. राष्ट्रपति को इन सभी पहलुओं का अध्ययन करने और यह तय करने के लिए कि सही संतुलन क्या होना चाहिए, 60 दिनों की आवश्यकता है.

भारत और अमेरिका की डील बेहद करीब 
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील के लिए बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक डील पर मोहर नहीं लग पाई है. दोनों देशों की ओर से ऐसा कहा जा रहा है कि हम इस डील के बेहद करीब पहुंच गए हैं. हालांकि, अभी इसे लेकर कोई ठोस वजह सामने नहीं आई है. वहीं एक्‍सपर्ट्स कह रहे हैं कि संभवत: भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ को लेकर ही बातचीत रुकी हुई है. 

Advertisement

एक्‍सपर्ट्स भारत-अमेरिका के बीच चल रहे इस बाचतीत को भी एक वजह मान रहे हैं. ऐसे में अमेरिका कोई ऐसा कदम नहीं उठाना चाहता है, जिससे डील पर कोई बात खराब हो. 

---- समाप्त ----
Live TV

Advertisement
Latest News in Hindi »
Advertisement