रूस (Russia) या रूसी संघ (Russian Federation) पूर्वी यूरोप और उत्तरी एशिया में फैला एक देश है. यह दुनिया का सबसे बड़ा देश है, जो 17,125,191 वर्ग किलोमीटर में फैला है (Largest country in the world). रूस ग्यारह समय क्षेत्रों में फैला हुआ है, और सोलह संप्रभु राष्ट्रों की सीमा से मिलता है (Geographical location). यह 145.4 मिलियन की आबादी के साथ यूरोप का नौवां सबसे अधिक आबादी वाला देश है (Population of Russia). रूस की राजधानी मास्को यूरोप का सबसे बड़ा शहर है. सेंट पीटर्सबर्ग देश का दूसरा सबसे बड़ा शहर और सांस्कृतिक केंद्र है.
रूस के मध्ययुगीन राज्य का उदय 9वीं शताब्दी में हुआ. 988 में, इसने बीजान्टिन साम्राज्य से रूढ़िवादी ईसाई धर्म को अपनाया. 18वीं शताब्दी तक, इतिहास का तीसरा सबसे बड़ा साम्राज्य रहे रूस ने साम्राज्यवादी नीति और विलय के माध्यम से व्यापक रूप से विस्तार किया. रूसी क्रांति के बाद, रूस सोवियत संघ का सबसे बड़ा और प्रमुख घटक बन गया. यह दुनिया का पहला संवैधानिक रूप से समाजवादी राज्य था. सोवियत संघ ने द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र देशों की जीत में निर्णायक भूमिका निभाई, और शीत युद्ध के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए एक महाशक्ति और प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरा. 1991 में सोवियत संघ के विघटन के बाद, इसने खुद को रूसी संघ के रूप में पुनर्गठित किया (History of Russia).
व्लादिमीर पुतिन 2000 से रूस की राजनीतिक व्यवस्था पर हावी हैं और इसके राष्ट्रपति हैं (President of Russia).
रूस मानव विकास सूचकांक में 52वें स्थान पर है. रूस की अर्थव्यवस्था नॉमिनल जीडीपी के हिसाब से दुनिया की ग्यारहवीं सबसे बड़ी और पीपीपी के हिसाब से छठी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है (Economy of Russia). यह एक मान्यता प्राप्त परमाणु-हथियार संपन्न राज्य है, जिसके पास परमाणु हथियारों का दुनिया का सबसे बड़ा भंडार है (World's largest stockpile of nuclear weapons). यह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का एक स्थायी सदस्य है, यह G20, SCO, BRICS, APEC, OSCE, IIB और WTO का सदस्य है.
रूस 2018 में यूरोप में दसवां सोलहवां सबसे अधिक भ्रमण किया जाने वाला देश था. 2020 में, पर्यटन का देश के कुल सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 4% हिस्सा था (Tourism in Russia).
रूस में आधिकारिक और मुख्य रूप से बोली जाने वाली भाषा रूसी है. यह यूरोप में सबसे अधिक बोली जाने वाली मूल भाषा है. अंग्रेजी के बाद इंटरनेट पर रूसी दूसरी सबसे अधिक इस्तेमाल की जाने वाली भाषा है. यह संयुक्त राष्ट्र की छह आधिकारिक भाषाओं में से एक है (Languages in Russia ).
रूस की वयस्क साक्षरता दर 99.7% है. रूस की 62% जनसंख्या स्नातक है (Literacy in Russia).
ईरान में सत्ता को उखाड़ फेंकने के लिए लोग सड़कों पर उतर आए हैं. भारी हिंसा के बीच इंटरनेट बंद हो चुका. इस बीच ये कयास भी लग रहे हैं कि हालात और बिगड़े तो सुप्रीम लीडर अली खामेनेई देश छोड़कर भाग सकते हैं. किसी भी इमरजेंसी में मॉस्को उनके लिए अकेला सुरक्षित ठिकाना होगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन-रूस युद्ध के बीच परमाणु हमले की धमकी दी है. उन्होंने कहा कि रूस के बॉर्डर पर अमेरिका की दो परमाणु पनडुब्बियां तैनात हैं और यदि रूस की ओर से कोई बड़ा हमला होता है तो अमेरिका परमाणु हमला करेगा. इस धमकी पर रूस के राष्ट्रपति ने पलटवार किया.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के इस दावे से भारत में सियासी भूचाल आ गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें रूस से तेल नहीं खरीदने का आश्वासन दिया है. इस दावे के बाद भारतीय विदेश मंत्रालय ने ट्रंप का नाम लिए बिना एक सधा हुआ जवाब दिया है.
ईरान ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान एलन मस्क की स्टारलिंक को सफलतापूर्वक जैम कर दिया गया. मिलिट्री-ग्रेड तकनीक से 80% तक ट्रैफिक प्रभावित हुआ. यह 'अटूट' इंटरनेट की कमजोरी दिखाता है. ये भारत के लिए चेतावनी है कि विदेशी नेटवर्क पर निर्भर न रहें. खुद की तकनीक बनाएं और राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करें.
एक तरफ रूसी सेना लगातार यूक्रेनी ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बना रही है. तो दूसरी तरफ कड़ाके की ठंड लोगों की मुश्किलें बढ़ा रही है. क्योंकि रूसी हमलों की वजह से यूक्रेन की राजधानी कीव के कई हिस्सों में दो दिन से भी ज्यादा समय से बिजली गुल है.
चीन के झंडे लगे इन जहाजों ने उस घटना के बाद यूटर्न लिया है, जब अमेरिकी बलों ने रूस के एक बड़े तेल टैंकर पर धावा बोलकर उसे जब्त कर लिया था. रूस के इस जहाज का नाम Bella 1 था लेकिन इसका हाल ही में नाम बदलकर मैरिनेरा कर दिया गया था.
जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग को लेकर दिए गए बयान पर चर्चा तेज हो गई. मर्ज ने कहा कि भारत-जर्मनी सहयोग से भारत की रूस पर निर्भरता घटेगी. इस पर विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने भारत की रक्षा खरीद नीति को राष्ट्रीय हित आधारित बताते हुए स्थिति स्पष्ट की.
ट्रंप ग्रीनलैंड पर कब्जे की धमकी दे रहे हैं, लेकिन अमेरिका डेनमार्क को हथियार बेच रहा है. जनवरी 2026 में हेलफायर मिसाइलों की बिक्री मंजूर हुई. डेनमार्क को F-35 जेट, AIM-120, P-8A Poseidon भी मिल रहे हैं. यह अजीब है- अमेरिका डेनमार्क को रूस से बचाने के नाम पर हथियार दे रहा है, जबकि खुद ग्रीनलैंड पर हमले की बात कर रहा है.
अमेरिकी सेना ने वेनेजुएला में निकोलस मादुरो को पकड़ने के दौरान एक रहस्यमयी 'सोनिक वेपन' का इस्तेमाल किया, जिससे सैनिकों की नाक से खून बहा, खून की उल्टी हुई. वे जमीन पर गिर गए और हिल भी नहीं पाए. वेनेजुएला के एक सैनिक के दावे के अनुसार, यह तीव्र ध्वनि तरंग ने रडार अक्षम कर दिया.
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान की बैंड बजाने वाले S-400 मिसाइल सिस्टम पर बड़ी खबर आई है. रूस ने पुष्टि की है कि भारत को मई 2026 तक S-400 का चौथा स्क्वाड्रन मिलेगा, जबकि आखिरी (पांचवां) 2027 में आएगा. पहले तीन स्क्वाड्रन पहले ही तैनात हैं. S-400 की मिसाइल रिफिल भी जारी है. यह भारत की वायु रक्षा को मजबूत करेगा और पाकिस्तान-चीन खतरे के खिलाफ निर्णायक डिटरेंस बनेगा.
इस वक्त दुनिया खौलते पानी का बर्तन बनी हुई है. कई देश आपस में लड़ रहे हैं, कई में भीतरी लड़ाइयां जारी हैं, वहीं कई बड़े मुल्क जो अब तक शांति का राग अलापते रहे, वे विस्तारवादी दिख रहे हैं. इस साल कई चुनाव भी हैं. इनमें बांग्लादेश समेत तीन ऐसे इलेक्शन हैं, जो तय करेंगे कि आगे चलकर शांति आएगी, या तीसरा महायुद्ध हो सकता है.
ISRO का PSLV C62 मिशन फेल हो चुका है. अब सवाल ये हैं कि चौथा स्टेज और सैटेलाइट कहां गिरेंगे? खराब या पुराने सैटेलाइट्स को दो तरीकों से निपटाया जाता है- लो अर्थ ऑर्बिट में छोटे सैटेलाइट्स हवा के घर्षण से 5-25 साल में खुद जलकर खत्म हो जाते हैं. बड़े सैटेलाइट्स और स्पेस स्टेशन को नियंत्रित तरीके से 'पॉइंट नेमो' में गिराया जाता है, जहां कोई इंसान या द्वीप नहीं है.
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के मर्चेंट नेवी ऑफिसर रक्षित चौहान उन तीन भारतीयों में शामिल है, जिन्हें अमेरिका ने एक रूसी टैंकर के साथ जब्त किया है.
श्वेतपत्र विश्व में बढ़ रहे तनावों, अमेरिका और रूस के बीच बढती कटुता, वेनेजुएला और ईरान में घटनाओं के साथ ग्रीनलैंड पर ट्रम्प की योजनाओं पर विस्तृत चर्चा करता है. इसमें बताया गया है कि कैसे वैश्विक शक्तियां अपनी सामरिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय हैं और भारत पर इसके क्या प्रभाव पड़ सकते हैं. इसमें रूस, चीन, अमेरिका, ईरान और भारत के राजनीतिक और कूटनीतिक पहलुओं को सरल भाषा में समझाया गया है ताकि विश्व व्यवस्था में संभावित बदलावों की गहराई से जानकारी मिल सके.
दक्षिण अफ्रीका के समुद्री क्षेत्र में चीन, रूस और ईरान ने संयुक्त नौसैनिक अभ्यास शुरू किया है. इसे BRICS Plus देशों का समुद्री सुरक्षा अभ्यास बताया जा रहा है, लेकिन अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच इसे रणनीतिक शक्ति प्रदर्शन के तौर पर भी देखा जा रहा है.
अमेरिकी बलों ने कैरिबियन सागर में एक और तेल टैंकर 'ओलीना' को जब्त किया. पिछले दिनों मारिनेरा और M/T सोफिया को भी रोका गया था. ट्रंप प्रशासन का लक्ष्य वेनेजुएला के तेल वितरण को नियंत्रित करना और प्रतिबंधों को लागू करना है.
DRDO ने 9 जनवरी 2026 को हैदराबाद में फुल स्केल एक्टिवली कूल्ड स्क्रैमजेट कंबस्टर का 12 मिनट से ज्यादा ग्राउंड टेस्ट सफलतापूर्वक किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल कार्यक्रम की मजबूत नींव बताया. यह सफलता भारत को अमेरिका, रूस, चीन के साथ हाइपरसोनिक तकनीक में आगे ले जाती है.
डोनाल्ड ट्रंप का ग्रीनलैंड के खनिज का सपना राजनीतिक भाषणों में चमकता है, लेकिन वास्तव में यह खनन कंपनियों के लिए बुरा सपना है. यहां सदियों से जमी जमीन (पर्माफ्रॉस्ट), -50 डिग्री ठंड, महीनों का अंधेरा, कोई सड़क-रेल नहीं और सिर्फ 2-3 महीने की शिपिंग विंडो है. विशेषज्ञ कहते हैं, खनिज संभावना तो है, लेकिन निकालना लगभग असंभव और बहुत महंगा.
अमेरिका और रूस के बीच एक पुराने खाली तेल टैंकर को लेकर तनाव बढ़ गया था. रूस ने टैंकर की सुरक्षा के लिए अपनी नौसेना तैनात की थी. अमेरिका ने आइसलैंड के पास अटलांटिक महासागर में जहाज पर कब्जा कर क्रू के सभी सदस्यों को रिहा कर लिया था.
अटलांटिक महासागर में आइसलैंड के समीप रूसी नौसेना की एक पनडुब्बी और कई युद्धपोतों ने एक महत्वपूर्ण जब्ती की है. इस घटना में रूस ने इसे खुले समंदर में हुई एक स्पष्ट डकैती बताया है. इस कार्रवाई के चलते क्षेत्र में राजनीतिक और सामरिक तनाव की स्थिति बनी हुई है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. ऐसे समय में जब वैश्विक राजनीति बेहद संवेदनशील है, यह घटना विदेशी समुद्री सुरक्षा और रणनीतिक गतिशीलता पर भी असर डाल सकती है.
अमेरिका लंबे समय तक रूस से यूरेनियम मंगाता रहा. लेकिन 2024 में उसने एक कानून पास किया, जिसके तहत रूस में बना लो-एनरिच्ड यूरेनियम आयात करना प्रतिबंधित कर दिया गया. दिलचस्प बात ये है कि अमेरिका को रूस पर अपनी निर्भरता का एहसास तभी हुआ, जब उसने खुद उस पर रोक लगा दी.