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Klara and the Sun Book Review: AI दोस्त और अकेलापन... एक मशीन की नजर से इंसान को समझने की कोशिश

नोबेल पुरस्कार विजेता लेखक काजुओ इशिगुरो का उपन्यास ‘क्लारा एंड द सन’ एक ऐसी दुनिया की कहानी है, जहां बच्चों का अकेलापन दूर करने के लिए आर्टिफिशियल फ्रेंड बनाए जाते हैं. क्लारा भी ऐसी ही एक मशीन है, जिसे 14 साल की जोसी अपने साथी के तौर पर चुनती है. क्लारा की नजर से कही गई यह कहानी धीरे-धीरे एक बड़ा सवाल उठाती है कि इंसान होने, प्यार करने और किसी के लिए मायने रखने का असली मतलब क्या है?

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काजुओ इशिगुरो की किताब क्लारा एंड द सन. (Photo: ITG)
काजुओ इशिगुरो की किताब क्लारा एंड द सन. (Photo: ITG)

इंसान ने मशीनें बनाईं ताकि जिंदगी आसान हो सके. फिर ऐसी मशीनें बनाने लगा, जो उसके सवालों के जवाब दें, उसके काम में हाथ बंटाएं और अकेलेपन में उसका साथ दें. अब कल्पना कीजिए कि कोई मशीन आपके बिहेवियर को आपसे बेहतर समझने लगे. आपके करीबियों की भावनाओं को पढ़ने लगे और आपको खोने के डर से वह सब करने को तैयार हो जाए, जिसकी उम्मीद आप किसी अपने से करते हैं. क्या तब भी उसे सिर्फ मशीन कहेंगे? नोबेल पुरस्कार विजेता काजुओ इशिगुरो की किताब Klara and the Sun इसी सवाल के सहारे हमें एक ऐसी दुनिया में ले जाता है, जहां अकेलेपन से जूझ रहे बच्चों के लिए आर्टिफिशियल फ्रेंड यानी AF खरीदे जाते हैं लेकिन यह सिर्फ एक रोबोट और एक लड़की की कहानी नहीं है. यह इंसानी भावनाओं, रिश्तों, महत्वाकांक्षाओं और उस मुश्किल सवाल की पड़ताल भी है कि आखिर इंसान होने का मतलब क्या है.

कहानी की शुरुआत एक दुकान की खिड़की से होती है. वहां रखी क्लारा बाहर की दुनिया को उत्सुकता से देखती है. राह चलते लोग, बदलती रोशनी, आसपास की गतिविधियां और सबसे बढ़कर सूरज. उसकी निगाह हर चीज पर जाती है. क्लारा एक आर्टिफिशियल फ्रेंड है, जिसे बच्चों का साथ देने के लिए बनाया गया है. उसकी दुनिया सीमित है. वह चीजों को ध्यान से देखती है, उनके बीच संबंध जोड़ने की कोशिश करती है, लेकिन जो कुछ देखती है, उसके पीछे छिपे कारणों को हमेशा समझ नहीं पाती. यही सीमित समझ उसे दिलचस्प बनाती है. वह इंसानों की दुनिया में मौजूद है, लेकिन उसे इंसानों की तरह देखने और समझने का अनुभव नहीं है.

इशिगुरो ने इंसानी कहानी को किसी मनुष्य के बजाय एक मशीन के नजरिए से पेश किया है. क्लारा की आंखों से दुनिया को देखते हुए हम लोगों के बिहेवियर और उनकी इमोशंस को करीब से देखने लगते है, जिन्हें अक्सर हम सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देते हैं. किताब में किसी बड़ी टेक क्रांति या भविष्य की चमक-दमक का रोमांच नहीं है. इसका संसार पहली नजर में सामान्य लगता है, लेकिन जैसे-जैसे क्लारा लोगों के करीब आती है, उनके रिश्तों में छिपी बेचैनी और विरोधाभास सामने आने लगते हैं. 

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क्लारा की जिंदगी तब बदलती है, जब जोसी नाम की 14 साल की लड़की उसे चुनती है. जोसी की मां क्रिसी उसे खरीदकर घर ले आती हैं. अब क्लारा का काम दुकान की खिड़की से दुनिया को देखना नहीं, बल्कि जोसी की जिंदगी का हिस्सा बनना है. उसे जोसी की आदतों, पसंद-नापसंद और भावनाओं को समझना है, उसका साथ देना है और उसके अकेलेपन को कम करना है. लेकिन जोसी की जिंदगी उतनी सहज नहीं है, जितनी बाहर से दिखाई देती है. वह गंभीर रूप से बीमार है और उसके परिवार के व्यवहार में एक ऐसा तनाव मौजूद है, जिसकी वजह धीरे-धीरे सामने आती है.

क्लारा एंड द सन

जोसी का दोस्त रिक भी कहानी का अहम हिस्सा है. दोनों एक-दूसरे के करीब हैं, लेकिन उनकी सामाजिक स्थितियां अलग हैं. रिक की मौजूदगी से किताब उस तथाकथित व्यवस्था पर भी फोकस करती है, जिसमें बच्चों के भविष्य और अवसरों को लेकर पहले से ही एक फर्क मौजूद है. जोसी और रिक के रिश्ते के बीच क्लारा धीरे-धीरे उस दुनिया को समझने लगती है, जहां प्रेम के साथ डर, अपनेपन के साथ असुरक्षा और उम्मीद के साथ भविष्य की चिंता भी जुड़ी हुई है.

क्लारा के लिए जोसी का साथ देना धीरे-धीरे एक साधारण जिम्मेदारी से कहीं आगे बढ़ जाता है. जोसी की जिंदगी उसकी अपनी दुनिया का केंद्र बन जाती है. वह उसकी बीमारी को समझने और उसकी मदद करने का रास्ता तलाशती है. उसके पास इंसानों जैसी समझ या अनुभव नहीं हैं, फिर भी वह जोसी के लिए कुछ करने की कोशिश करती रहती है. यहीं पाठक के मन में सवाल उठता है कि क्लारा का व्यवहार उसकी प्रोग्रामिंग का नतीजा है या उसमें प्रेम जैसी किसी भावना की संभावना भी मौजूद है. 

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क्लारा की दुनिया में सूरज की भी एक खास जगह है. किताब के टाइटल में मौजूद The Sun यानी सूरज उसके लिए सिर्फ रोशनी या ऊर्जा का सोर्स नहीं है. क्लारा सोलर एनर्जी पर निर्भर है और सूरज को एक ऐसी शक्ति के रूप में देखती है, जिस पर भरोसा किया जा सकता है. उसके भीतर यह विश्वास है कि सूरज उसकी इच्छा सुन सकता है और जोसी की मदद कर सकता है. जोसी की बीमारी को लेकर उसकी चिंता बढ़ती है, तो सूरज पर उसका भरोसा भी इस उम्मीद से जुड़ जाता है कि वह जोसी को बचाने में मदद करेगा.

क्लारा के लिए यह विश्वास कितना वास्तविक है और इसकी सीमाएं क्या हैं. यह किताब के सबसे दिलचस्प पहलुओं में से एक है. उसकी सोच को पूरी तरह इंसानी तर्क से नहीं समझा जा सकता, लेकिन उसके विश्वास के पीछे जोसी के लिए कुछ कर गुजरने की इच्छा साफ दिखाई देती है.

यहीं से कहानी प्रेम और किसी को खो देने के डर के बीच का फर्क तलाशने लगती है. जोसी की मां क्रिसी भी अपनी बेटी से प्यार करती हैं, लेकिन उनकी चिंता में उसे खो देने का डर शामिल है. इसी डर के बीच उनकी एक प्लानिंग भी सामने आती है. ये प्लानिंग किताब के सबसे असहज सवालों में से एक को सामने लाती है कि क्या किसी इंसान को उसके व्यवहार, आदतों और दूसरों के साथ उसके रिश्तों के आधार पर दोबारा बनाया जा सकता है?

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यहां क्रिसी और क्लारा दोनों की इच्छाओं में जोसी से लगाव है लेकिन दोनों के रास्ते अलग है. एक तरफ क्लारा का समर्पण है, तो दूसरी ओर क्रिसी की वह कोशिश, जिसमें बेटी को खोने से बचाने की चाह उसकी पहचान के सवाल से टकराने लगती है. इशिगुरो यहां किसी पात्र को पूरी तरह सही या गलत साबित नहीं करते. वह पाठक के सामने एक ऐसी स्थिति रखते हैं, जिसमें प्यार, डर और महत्वाकांक्षा को अलग-अलग करना आसान नहीं है. किसी को बचाने की इच्छा कितनी दूर तक जा सकती है? क्या किसी की मौजूदगी को बनाए रखने के लिए उसकी जगह किसी दूसरे अस्तित्व को खड़ा करना काफी होगा? ये भी बता दूं कि किताब में लेखक इन सभी सवालों के जवाब नहीं देते. वह पाठकों को उनकी समझ के साथ बस छोड़ देते हैं. 

वहीं, किताब का एक और जरूरी हिस्सा 'लिफ्टेड' और 'अनलिफ्टेड' कैटेगरी में बांटने वाली व्यवस्था है. लिफ्टेड वे बच्चे हैं, जिनकी इंटेलिजेंस बढ़ाने के लिए उनके जीन में बदलाव किए गए हैं. इससे बेहतर शिक्षा और भविष्य में ज्यादा अवसर मिलने की उम्मीद जुड़ी है, लेकिन इसके साथ स्वास्थ्य संबंधी जोखिम भी हैं. जोसी इसी कैटेगरी में आती है और उसकी बीमारी इस व्यवस्था के जोखिमों की ओर ध्यान दिलाती है. दूसरी ओर, रिक 'अनलिफ्टेड' है. उसमें नेचुरल टैलेंट है, लेकिन उसके भविष्य को लेकर चिंता बनी रहती है. उसकी मां को डर है कि जिस समाज में बच्चों की क्षमताओं को बेहतर बनाने के लिए जीन में बदलाव किए जा रहे हैं, वहां रिक को जोसी जैसे अवसर नहीं मिल पाएंगे.

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इशिगुरो की लेखन शैली धीमी है. वह भविष्य की तकनीक पर ज्यादा जोर देने के बजाय क्लारा की खूबियों, उसके डायलॉग और अन्य किरदारों के व्यवहार के जरिए कहानी की परतें खोलते हैं. कई बातें तुरंत समझ नहीं आती. घटनाओं को जोड़ने से कई चीजें स्पष्ट होती हैं. लेकिन इस किताब की ताकत भी यही है कि यह अपने सवालों के जवाब जल्दबाजी में नहीं देती.

काजुओ इशिगुरो की यह किताब 2021 में पब्लिश हुई थी. पांच साल बाद यह दोबारा चर्चा में आई है क्योंकि हॉलीवुड में इस किताब पर इसी नाम से एक फिल्म रिलीज हो रही है. 'जोजो रैबिट' बनाने वाले ताइका वेट्टी की यह फिल्म 23 अक्टूबर को रिलीज हो रही है, जिसमें जेना ओर्टेगा को क्लारा के किरदार में देखा जा सकेगा.

किताब का नाम: Klara and the Sun

प्रकाशक का नाम: फेबर एंड फेबर

लेखक का नाम: काजुओ इशिगुरो

दाम: 599 रुपये

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