गाजा पट्टी को लेकर इजरायल और हमास के बीच सहमति अबतक नहीं बनी है. इस बीच नई खबर सामने आई है. दो देश वहां अपनी सेना उतारने वाले हैं. इसमें युगांडा और मोरक्को शामिल हैं. दोनों के सैनिक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बनाए 'इंटरनैशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स' का हिस्सा बनेंगे.
युगांडा के अधिकारियों ने गुरुवार को एक अंतरराष्ट्रीय फोर्स के हिस्से के तौर पर गाजा में सैनिक तैनात करने के लिए संसद से मंजूरी मांगी और उसे हासिल कर लिया.
रक्षा मंत्री द्वारा पेश किया गया यह सफल प्रस्ताव, गाजा के लिए 'इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स' (अंतरराष्ट्रीय स्थिरता बल) में शामिल होने की युगांडा की इच्छा का पहला सार्वजनिक संकेत है.
मोरक्को ने भी इस मिशन के लिए सैनिक भेजने का वादा किया है.
बता दें कि फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 'बोर्ड ऑफ़ पीस' द्वारा प्रस्तावित इस फोर्स का नेतृत्व एक अमेरिकी जनरल, मेजर जनरल जैस्पर जेफ़र्स करेंगे. उन्होंने मई में कहा था कि 20,000 सैनिकों वाली यह फोर्स इजरायल-हमास के विनाशकारी युद्ध के बाद "भविष्य की समृद्धि और स्थायी शांति" सुनिश्चित करेगी.
पिछले हफ्ते ट्रंप ने हमास के हथियार छोड़ने और इजरायल द्वारा गाजा से अपनी सेना हटाने के लिए एक समझौते का ऐलान किया था. उस समझौते के मुताबिक, इजरायली सैनिकों की चरणबद्ध वापसी पूरी होने के बाद गाजा में 'इंटरनेशनल स्टेबलाइज़ेशन फ़ोर्स' तैनात की जाएगी.
हालांकि, ताजा हालात कुछ अलग हैं. फिलहाल हमास और इजरायल दोनों ही अपनी बातों पर अड़े हैं. हमास का कहना है कि पहले इजरायल पीछे हटे तब हथियार छोड़ेंगे. वहीं इजरायल का कहना है कि पहले हमास हथियार डाले, तब सैनिक गाजा से पीछे जाएंगे. यानी ट्रंप का समझौता फिलहाल खटाई में पड़ा है.