गाजा (गाजा पट्टी) (Gaza Strip) पश्चिम एशिया में स्थित फिलिस्तीन राज्य का दक्षिण-पश्चिमी भाग है. यहां हमास का प्रशासन है. गाजा पट्टी लगभग 365 वर्ग किलोमीटर में फैली हुई है और इसकी सीमाएं उत्तर और पूर्व में इजरायल, दक्षिण में मिस्र और पश्चिम में भूमध्य सागर से घिरी हुई हैं.
गाजा का इतिहास काफी जटिल और संघर्षों से भरा रहा है. 1948 में इजरायल के गठन के बाद, अरब-इजरायल युद्ध के परिणामस्वरूप गाजा पट्टी मिस्र के नियंत्रण में आ गया. 1967 के छह-दिवसीय युद्ध के दौरान इजरायल ने इस पर कब्जा कर लिया. 1993 के ओस्लो समझौते के तहत फिलिस्तीनी प्रशासन को आंशिक नियंत्रण मिला, लेकिन 2005 में इजरायल ने अपने सैनिकों और बस्तियों को वापस बुला लिया. 2007 में हमास ने यहां नियंत्रण स्थापित किया, जिसके बाद इजरायल और मिस्र ने इस क्षेत्र पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया.
गाजा में इजरायल और हमास के बीच अक्सर हिंसक संघर्ष होते रहे हैं. इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए हमास पर हमले करता है, जबकि फिलिस्तीनी इसे अपने अधिकारों का हनन मानते हैं. गाजा पर इजरायली नाकेबंदी के कारण वहां मानवीय संकट की स्थिति बनी हुई है.
7 अक्टूबर 2023 को, हमास (Hamas) ने गाजा पट्टी से इजरायल पर एक बड़ा हमला किया. 9 अक्टूबर 2023 को, इजरायल ने हमास पर युद्ध की घोषणा की और गाजा पट्टी पर पूरी तरह से नाकाबंदी लगा दी (Israel Palestine Conflict).
गाजा को इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक से अलग किया गया है. दोनों क्षेत्र नाममात्र से फिलिस्तीनी प्राधिकरण के अधिकार क्षेत्र में हैं. लेकिन गाजा पर एक उग्रवादी, सुन्नी इस्लामी संगठन हमास शासन कर रहा है. गाजा पूरी तरह से इजरायल के नेतृत्व वाली (और मिस्र समर्थित) भूमि, समुद्र और हवाई नाकाबंदी के अधीन है. जहां लोगों और सामानों को क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से प्रवेश करने या छोड़ने की मनाही है, जिसके कारण इसे ओपन एयर जेल कहा जाने लगा.
गाजा पट्टी 41 किलोमीटर लंबी, 6 से 12 किलोमीटर चौड़ी हैऔर इसका कुल क्षेत्रफल 365 वर्ग किमी है. लगभग 365 वर्ग किमी भूमि पर लगभग 2 मिलियन फिलिस्तीनी रहते हैं. गाजा में फिलिस्तीनियों की बहुसंख्यक आबादी है.
मिडिल ईस्ट जंग में इजरायल और अमेरिका का साथ देने के लिए ऑस्ट्रेलिया के पीएम एंथोनी अल्बानीज को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. सिडनी की एक मस्जिद में अल्बानीज के खिलाफ जमकर हूटिंग की. देखें वीडियो.
ईरान से जंग के बीच इजरायली अधिकारियों ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए अल-अक्सा मस्जिद को बंद कर दिया है. ईद के मौके पर 1967 के बाद से यह पहली बार है कि मस्जिद को बंद रखा गया. इस कदम से मस्जिद में नमाज के लिए पहुंचे मुसलमानों में भारी गुस्सा और उदासी है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दर्जन से अधिक देशों के प्रतिनिधियों के साथ गाजा को लेकर अहम बैठक करने जा रहे हैं. 'बोर्ड ऑफ पीस' की पहली बैठक में 5 अरब डॉलर की शुरुआती फंडिंग पर चर्चा होगी, जहां गाजा पुनर्निर्माण पर 70 अरब डॉलर के खर्च होने की संभावना है.
लेबनान की राजधानी बेरूत में इजरायली हवाई हमलों के बाद हालात बेहद गंभीर हो गए हैं. पिछले 12 घंटों में 50 से ज्यादा हमलों ने रिहायशी इलाकों को तबाह कर दिया है. बढ़ती हिंसा के बीच आम नागरिक सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं और हालात गाजा जैसे बनते नजर आ रहे हैं.
मिडिल-ईस्ट में जारी संघर्ष के बीच गाजा पट्टी, लेबनान और तेहरान में इजरायली हमले लगातार जारी हैं. गाजा में गर्भवती महिला, बच्चे और पुलिस अधिकारी भी हमलों की चपेट में आए. लेबनान में मौतों का आंकड़ा 850 तक पहुंच गया है.
नई स्टडी के मुताबिक Israel-Gaza war से अब तक लगभग 3.3 करोड़ टन CO₂e ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन हुआ है. वैज्ञानिकों का कहना है कि युद्ध केवल मानवीय और आर्थिक नुकसान ही नहीं पहुंचाते, बल्कि climate change को भी तेजी से बढ़ाते हैं. सैन्य गतिविधियां, बमबारी और reconstruction से भारी carbon emission हो रहा है.
जंग जलवायु परिवर्तन को तेज कर रहे हैं. वन अर्थ जर्नल की स्टडी के अनुसार, इजरायल-गाजा संघर्ष से 3.3 करोड़ मीट्रिक टन CO₂e उत्सर्जन हुआ, जो जॉर्डन के पूरे साल के उत्सर्जन या 76 लाख कारों के सालाना धुएं या 3.31 करोड़ एकड़ जंगलों द्वारा एक साल में सोखे जाने वाले कार्बन के बराबर है. सैन्य गतिविधियां, बमबारी और पुनर्निर्माण इसका मुख्य कारण हैं.
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने कहा कि गाजा मामले में भारत अपनी संभावित भूमिका देख रहा है और जमीन पर हालात स्पष्ट होने के बाद ही आगे की भागीदारी तय होगी. साथ ही उन्होंने बताया कि भारत फिलिस्तीनी समुदायों के लिए करीब 170 मिलियन डॉलर के प्रोजेक्ट चला रहा है और 40 मिलियन डॉलर की परियोजनाएं पाइपलाइन में हैं.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इजरायल दौरे और नेसेट में दिए गए ऐतिहासिक भाषण ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है. जहां इजरायली मीडिया ने इसे मजबूत रणनीतिक साझेदारी का संकेत बताया, वहीं मुस्लिम देशों की मीडिया ने इसे फिलिस्तीन मुद्दे से दूरी के रूप में देखा. पीएम मोदी के दौरे पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं साफ तौर पर बंटी नजर आईं.
पीएम मोदी ने कहा कि वह भारत के 140 करोड़ लोगों की ओर से दोस्ती और सम्मान का संदोश लेकर इजरायल आए हैं. भारत और इजरायल के रिश्ते केवल रणनीतिक नहीं है बल्कि साझा मूल्यों और विश्वास पर टिके हुए हैं.
इजरायल के तट पर 24 फरवरी 2026 को एक ही दिन दो दुर्लभ संकटग्रस्त जीवों के शव मिले. ज़िकिम बीच पर 12 मीटर लंबा मृत स्पर्म व्हेल और हर्ज़लिया के हॉफ हट्ज़ुक बीच पर क्रिटिकली एंडेंजर्ड लेदरबैक समुद्री कछुआ. मौत के संभावित कारण फिशिंग गियर में फंसना और प्लास्टिक प्रदूषण बताया जा रहा है. विशेषज्ञ ऑटोप्सी कर रहे हैं.
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने वेनेजुएला से तेल खरीद पर भारत का रुख साफ करते हुए बताया कि तेल खरीद केवल सप्लाई और प्रॉफिट के आधार पर ही होगी. उन्होंने भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को लेकर हालिया संयुक्त बयान को सकारात्मक बताया, जिसके तहत अगले सप्ताह भारत के नेगोशिएटर अमेरिका जाएंगे.
गाजा में शांति और विकास के लिए गठित बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक हुई...वॉशिंगटन में यूएस इंस्टिट्यूट ऑफ पीस में हुई बैठक दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने बताया कि गाजा को दोबारा बसाने के लिए अलग-अलग देशों ने 7 अरब डॉलर के योगदान दिया है...जबकि अमेरिका बोर्ड ऑफ पीस के लिए 10 अरब डॉलर देगा. देखें दुनिया आजतक.
वाशिंगटन में आयोजित शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्र की स्थिरता पर गहराई से चर्चा हुई. इस बैठक में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को सशक्त बनाने पर खास जोर दिया गया.
वॉशिंगटन में “बोर्ड ऑफ पीस” की पहली बैठक में करीब 50 देशों ने हिस्सा लिया, जहां गाजा के पुनर्निर्माण के लिए अरबों डॉलर की घोषणा हुई. अमेरिका ने 10 अरब डॉलर देने का वादा किया. इंडोनेशिया ने 8 हजार सैनिक भेजने की बात कही. हालांकि कई देशों ने इसे संयुक्त राष्ट्र को कमजोर करने की कोशिश बताते हुए दूरी बनाई.
वॉशिंगटन में शांति परिषद की पहली बैठक में गाजा पट्टी की वर्तमान स्थिति और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन चर्चा हुई. बैठक में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भूमिका को मजबूत करने पर जोर दिया गया और निर्णय लिया गया कि गाजा में शांति बनाए रखने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाएगा. इस बल में इंडोनेशिया, मोरक्को, कजाकिस्तान, कोसोवो और अल्बानिया जैसे पांच देश अपने सैनिक भेजेंगे. देखें वीडियो.
डोनाल्ड ट्रंप ने अपने नियंत्रण वाले 'बोर्ड ऑफ पीस' को 10 अरब डॉलर देने की घोषणा की है. यह रकम इस साल UN को दिए जाने वाले अमेरिकी योगदान से 12 गुना ज्यादा है. फंडिंग की वैधता और प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं.
इस वर्ष घोषित किए गए इस बोर्ड में 27 देश शामिल हैं, जिनमें अर्जेंटीना, आर्मेनिया, अजरबैजान, हंगरी, पाकिस्तान, सऊदी अरब और यूएई के साथ इजरायल भी शामिल है. हालांकि, इस समूह में फिलिस्तीनी प्रतिनिधियों को शामिल नहीं किया गया है, जिस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हो रही है.
गाजा में शांति बहाली के लिए बोर्ड ऑफ पीस की पहली बैठक में 40 से अधिक देशों के प्रतिनिधि और लगभग एक दर्जन पर्यवेक्षक शामिल हुए, जिनमें कई मिडिल ईस्ट, यूरोप, एशिया और अन्य देशों के राजनयिक शामिल थे.
गाजा में शांति बहाल करने के प्रयासों को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प आज शांति बोर्ड की पहली बैठक की अध्यक्षता करेंगे. व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव ने बताया कि इस बैठक में 20 से अधिक सदस्य देश गाजा पट्टी के लिए पांच अरब रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता का आधिकारिक एलान करेंगे.
रमजान से पहले गाजा युद्ध पर आधारित मिस्र के नए टीवी सीरियल 'साहब अल-अर्द' का ट्रेलर जारी होते ही विवाद खड़ा हो गया. कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे "त्रासदी का व्यावसायीकरण" बताते हुए विरोध जताया, जबकि कुछ ने इसे मिस्र की छवि सुधारने की कोशिश करार दिया.