कपड़े धोना, बर्तन साफ करना, फर्श पर झाड़ू लगाना और टेबल पोंछना... ये ऐसे काम हैं, जिन्हें हम रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इन कामों को करने के लिए रोबोट को भी ट्रेनिंग देनी पड़ती है?
चीन में इन दिनों कुछ लोग यही काम कर रहे हैं. फर्क बस इतना है कि वे अपने लिए नहीं, बल्कि रोबोट को इंसानों की तरह काम करना सिखाने के लिए ये सब कर रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि इस काम के बदले उन्हें हर महीने करीब 85 हजार रुपये तक मिल रहे हैं.
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन में रोबोट को घरेलू काम सिखाने वाले ऐसे लोगों की मांग बढ़ रही है. इन्हें 'रोबोट ट्रेनर' कहा जा रहा है. ये लोग खास सेंसर वाले उपकरण पहनकर कपड़े तह करने, बर्तन धोने, कप उठाने और बोतल के ढक्कन खोलने जैसे काम बार-बार करते हैं. उनके हर मूवमेंट को रिकॉर्ड किया जाता है, ताकि उसी डेटा की मदद से रोबोट को इन कामों की ट्रेनिंग दी जा सके.
आखिर क्या काम करते हैं रोबोट ट्रेनर?
चीन में रोबोट ट्रेनर का काम देखने में भले ही आसान लगे, लेकिन इसमें काफी मेहनत लगती है. इन लोगों को एक ही काम कई बार दोहराना पड़ता है. मसलन, किसी कप को उठाकर दूसरी जगह रखना है, तो उसे उठाने, पकड़ने और रखने की पूरी प्रक्रिया रिकॉर्ड की जाती है. इसी तरह बर्तन साफ करने, कपड़े तह करने और फर्श पर झाड़ू लगाने के दौरान हाथों की हरकतों को भी रिकॉर्ड किया जाता है.
इसके लिए कई जगहों पर कर्मचारियों को हाथों में सेंसर वाली डिवाइस, उंगलियों पर चिप और मोशन-कैप्चर डिवाइस पहनने पड़ते हैं. ये डिवाइस उनकी गतिविधियों का डेटा जुटाती हैं. बाद में इस डेटा को व्यवस्थित करके रोबोट की ट्रेनिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
इस ट्रेनिंग का मकसद रोबोट को सिर्फ किसी काम की जानकारी देना नहीं, बल्कि उसे यह सिखाना भी है कि किसी चीज को कैसे पकड़ना है, कितनी ताकत लगानी है और काम करते समय आसपास की चीजों के हिसाब से अपनी हरकतों को कैसे बदलना है. इस तरह तैयार किया गया डेटा रसोई, फैक्ट्री और सुपरमार्केट जैसी जगहों पर काम करने वाले रोबोट के लिए उपयोगी हो सकता है.
महीने में कितनी होती है कमाई?
चीन के सोशल मीडिया और जॉब प्लेटफॉर्म पर इन दिनों रोबोट ट्रेनर की नौकरियों के विज्ञापन दिखाई दे रहे हैं. इन नौकरियों में आमतौर पर हर महीने 4,000 से 6,000 युआन तक वेतन मिलने की बात कही जा रही है. भारतीय मुद्रा में यह रकम करीब 50 हजार से 85 हजार रुपये के आसपास बैठती है.
हालांकि, हर नौकरी में इतनी कमाई नहीं होती. कुछ जगहों पर काम के हिसाब से रोजाना भुगतान किया जाता है. उदाहरण के लिए, चीन के शांक्सी प्रांत के रहने वाले 22 साल के छात्र सन ने गर्मियों की छुट्टियों में यह काम किया. वह इंटर्नशिप की तलाश में था और इस दौरान उसने रोबोट ट्रेनिंग का काम शुरू किया.
सन को दिन की शिफ्ट के लिए 120 युआन यानी करीब 1,700 रुपये और रात की शिफ्ट के लिए 135 युआन यानी लगभग 1,900 रुपये मिलते थे. उसके काम में कपड़े तह करना, फर्श पर झाड़ू लगाना और रोबोट के लिए इंसानों की गतिविधियों का रिकॉर्ड तैयार करना शामिल था.
लेकिन कुछ समय बाद उसे महसूस हुआ कि इस काम से होने वाली कमाई के मुकाबले शारीरिक और मानसिक थकान ज्यादा है. यही वजह है कि इस क्षेत्र में कई लोग कुछ ही हफ्तों में काम छोड़ देते हैं.
दिन में 200 बार धोने पड़ते हैं बर्तन
इस काम की असली चुनौती तब समझ आती है, जब पता चलता है कि कर्मचारियों को एक ही गतिविधि बार-बार करनी पड़ती है. बीजिंग के एक स्टूडियो में काम करने वाली 40 साल की लियू युन इसका उदाहरण हैं.
लियू पहले ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में काम करती थीं. नौकरी छूटने के बाद उन्होंने नई नौकरी तलाशने की कोशिश की, लेकिन उम्र के चलते उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ा. इसके बाद उन्होंने रोबोट ट्रेनर के तौर पर काम शुरू किया.
स्टूडियो में उन्हें कंप्यूटर स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों के मुताबिक कप उठाने और सतहों को रगड़कर साफ करने जैसे काम करने पड़ते थे. उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती थी. बड़ी स्क्रीन पर कर्मचारियों की काम करने की रफ्तार और सटीकता के आधार पर उनकी रैंकिंग भी दिखाई जाती थी.
यहां एक दिन में 160 गतिविधियों के सैंपल तैयार करने का लक्ष्य था, जबकि बेहतर प्रदर्शन करने वाले कर्मचारी 260 से ज्यादा सैंपल पूरे कर लेते थे. लियू के लिए दिन में करीब 200 बार बर्तन धोना और टेबल पोंछना ही काफी थकाने वाला काम था.
लियू ने चीनी मीडिया आउटलेट जिजोउ स्टूडियो से बातचीत में कहा कि उन्हें रोबोट को ट्रेनिंग देना किसी मशीन को सिखाने के बजाय दो साल के बच्चे को सिखाने जैसा लगता है.
घर बैठे भी कर सकते हैं यह काम
रोबोट ट्रेनिंग की हर नौकरी में स्टूडियो जाकर काम करना जरूरी नहीं है. चीन के जियांग्सू प्रांत की रहने वाली गुओ होंगजुआन घर से ही यह काम करती हैं. वह रोजाना करीब छह घंटे किताबें व्यवस्थित करने, टेबल पोंछने और सामान को एक जगह से दूसरी जगह रखने जैसे कामों का डेटा जुटाती हैं.
इस काम से उन्हें महीने में करीब 4,000 युआन यानी लगभग 50 हजार रुपये मिलते हैं. गुओ के लिए इस नौकरी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि वह घर से काम करते हुए अपने बच्चे की देखभाल भी कर सकती हैं. यानी कुछ लोगों के लिए यह काम भले ही थकाने वाला हो, लेकिन दूसरों के लिए घर बैठे कमाई का एक विकल्प भी बन रहा है.
सड़क पर झाड़ू लगाने वालों का तरीका भी हो रहा रिकॉर्ड
चीन में रोबोट को ट्रेनिंग देने के लिए सिर्फ घरेलू कामों का ही डेटा नहीं जुटाया जा रहा. अगस्त में शेन्जेन की टेक्नोलॉजी कंपनी फाइसेन एआई ने एक सफाई कंपनी के साथ साझेदारी की. इसके तहत सड़क साफ करने वाले कर्मचारियों को डेटा जुटाने वाले उपकरण पहनाए गए.
जब ये कर्मचारी सड़कों पर झाड़ू लगाते या गुजरती इलेक्ट्रिक बाइक जैसी चीजों के हिसाब से अपनी गतिविधियां बदलते हैं, तो उनकी हरकतों को रिकॉर्ड किया जाता है. इसका मकसद रोबोट को असली दुनिया के माहौल को समझने और उसके मुताबिक काम करने में सक्षम बनाना है.
रोबोट को काम सिखा रहे इंसान, लेकिन आगे क्या होगा?
रोबोट ट्रेनर की बढ़ती मांग के बीच चीन में इस काम को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. कुछ लोग इसे कमाई का नया जरिया मान रहे हैं, तो कुछ इसे बेहद दोहराव वाला और थकाने वाला काम बता रहे हैं. इंटरनेट पर कुछ यूजर्स ने इसकी तुलना 'साइबर असेंबली लाइन' से की है, तो कुछ ने इसे घर से होने वाली मजदूरी जैसा बताया है.
एक अधेड़ उम्र के कर्मचारी ने बताया कि कम वेतन पर तीन महीने तक रोबोट ट्रेनिंग का काम करने के बाद कम से कम उन्होंने घरेलू काम करना तो सीख लिया.
लेकिन इस पूरे मामले में सबसे दिलचस्प और थोड़ा चिंताजनक पहलू भी है. आज इंसान रोबोट को कपड़े तह करना, बर्तन धोना और सफाई करना सिखा रहा है. इसके लिए वह अपनी मेहनत, समय और गतिविधियों का डेटा दे रहा है. लेकिन भविष्य में यही रोबोट इन कामों को खुद करने लगें, तो इंसानों की जरूरत कितनी रह जाएगी?