सावन महीना शुरू होते ही प्रयागराज के हर शिवालय में भक्तों की भीड़ जमा होने लगती है. लेकिन प्रयागराज में भगवान शिव का एक मंदिर ऐसा भी है, जिसे लोग 'शिव कचहरी' के नाम से जानते हैं. प्रयागराज में गंगा यमुना और सरस्वती के त्रिवेणी संगम के नजदीक गंगा नदी के पास बना 'शिव कचहरी' मंदिर आस्था की एक बेहद अनोखी मिसाल बना हुआ है.. यहां भोलेनाथ की पूजा केवल एक देवता के रूप में ही नहीं, बल्कि एक न्यायाधीश (जज) के रूप में भी की जाती है. मान्यता है कि इस अलौकिक 'अदालत' में भगवान शिव के सामने भक्त जाने-अनजाने में हुई गलतियों की माफी मांगते हैं.
वैसे तो प्रयागराज के शिवकुटी इलाके में बने शिव कचहरी को बेहद प्राचीन मंदिर माना जाता है. लेकिन सालों पहले इसे एक अदालत का स्वरूप दिया गया और इसका नाम 'शिव कचहरी' पड़ गया. मंदिर परिसर में एक या दो नहीं, बल्कि कुल 286 शिवलिंग स्थापित हैं. परिसर में थोड़ी ऊंचाई पर स्थित अलग स्वरूप का मुख्य शिवलिंग 'मुख्य न्यायाधीश' (Chief Justice) के रूप में विराजित है. इस मंदिर में भगवान विष्णु की भी एक मूर्ति स्थित है. इसके अलावा, इस ऐतिहासिक मंदिर का संबंध नेपाल के राजघराने से भी बताया जाता है.
उठक-बैठक लगाकर माफी मांगते हैं लोग
यहां आने वाले श्रद्धालु अपनी अर्जी लगाने और गलतियों की क्षमा मांगने के लिए एक अनोखे तरीके को अपनाते हैं. मंदिर में आने वाला हर भक्त अपने पापों से मुक्ति पाने के लिए महादेव के कान में अपनी गलतियां बताता है. इसके बाद भोलेनाथ के सामने कान पकड़कर 5, 7, 11 या 21 बार उठक-बैठक करता है. अक्सर इस मंदिर में आने वाले श्रद्धालु कई शिवलिंग से सटकर नंदी जी के कान में धीमी आवाज में अपनी बात कहकर हाजिरी लगाते हैं।
इस शिव कचहरी मंदिर में रोजाना बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. लेकिन सावन के पवित्र महीने में यहां विशेष मेले का आयोजन होता है. पूरे सावन में यह मंदिर भक्तों की भीड़ से गुलजार रहता है, जहां लोग अपनी गलतियों की माफी मांगने और न्याय व आशीर्वाद पाने पहुंचते हैं.