राजकोट में 1300 करोड़ के सोने के आभूषण पहनकर 15 हजार अहीर समाज की महिलाओं ने रास गरबा किया. इस आयोजन में महिलाओं ने करीब 900 किलो सोने के आभूषण पहनकर पारंपरिक रास गरबा किया.
प्रसिद्ध कथावाचक मोरारी बापू इन दिनों देशव्यापी स्वास्तिक यात्रा पर निकले हैं. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य अध्यात्म के माध्यम से देश के लोगों के दिलों को जोड़ना और भारत में एकता का संदेश देना है. शंकराचार्य, महात्मा गांधी और विनोबा भावे जैसे महान व्यक्तित्वों के पदचिन्हों पर चलते हुए मुरारी बापू का मानना है कि भारत की आत्मा संवाद और सद्भाव में बसती है. मोरारी बापू ने बताया कि स्वास्तिक का अर्थ ही सबका कल्याण और मंगल है. वे कहते हैं कि जब लोगों के दिल आपस में मिलेंगे, तभी देश अखंड और महान बनेगा. आज के समय में जब संवाद की जगह विवाद और दुर्वाद ले रहे हैं, तब संवाद का मंत्र ही समाज को सही दिशा दिखा सकता है. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण के गीता ज्ञान का संदर्भ देते हुए संवाद की महत्ता को रेखांकित किया.
त्योहारों के इस पावन अवसर पर कथावाचक मोरारी बापू ने समाज और दुनिया के सामने कई महत्वपूर्ण बातें रखी हैं. मोरारी बापू के अनुसार हर साल रावण दहन तो किया जाता है, लेकिन असली आवश्यकता अपने भीतर छिपे मोह और रावणत्व को मिटाने की है. तुलसीदास जी के अनुसार मोह ही असली रावण है और जब इंसान अपनी दसों प्रकार की वृत्तियों पर नियंत्रण पा लेता है, वही सच्चा दशहरा है.
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 28 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट पर समाप्त हो जाएगी. चूंकि 18 अक्टूबर को अष्टमी तिथि सूर्योदय को स्पर्श नहीं कर रही है. इसलिए अष्टमी का कन्या पूजन 19 अक्टूबर को होगा. इसी दिन नवमी का कन्या पूजन और संधि पूजा भी होगी.
इस साल मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन 20 अक्टूबर को किया जाएगा. इस दिन श्रद्धालु बड़े ही भावुक मन से देवी दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन करते हैं और फिर उनसे अगले वर्ष आने की प्रार्थना करते हैं. मां दुर्गा की कुछ पारंपरिक प्रतिमाओं में देवी के माथे पर बिंदी के नीचे मकड़ी और उसका जाल भी दिखाई देता है. क्या आपने सोचा है कि आखिर यह क्यों होता है.
शारदीय नवरात्रि में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा करके भक्त सुख-समृद्धि, साहस और सफलता की कामना करते हैं. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार मेष, सिंह, वृश्चिक, धनु और मीन राशि का मां दुर्गा से विशेष संबंध माना जाता है. नवरात्र के दिनों में यह राशियां खूब लाभान्वित भी होती हैं.
काल भैरवनाथ के ‘खड़े रहकर किए जाने वाले नवरात्र’ में करीब 350 से 400 श्रद्धालु शामिल हुए हैं. खास बात यह है कि इस धार्मिक उत्सव में हिंदू-मुस्लिम एकता की भी खूबसूरत मिसाल देखने को मिल रही है. श्रद्धालु यहां 9 दिन तक खड़े रहकर व्रत कर रहे हैं. यह पैरों में न तो चप्पल पहन सकते हैं और न ही नींद आने पर जमीन पर सो सकते हैं.
हिंदू पंचांग के अनुसार, साल 2026 में अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह 8 बजकर 27 मिनट पर शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10 बजकर 51 मिनट तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर महाष्टमी का व्रत और कन्या पूजन सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को किया जाएगा.
Kanya Pujan Rules: नवरात्र में कन्या पूजन का खास महत्व है, लेकिन पूजा के दौरान कुछ जरूरी नियमों का ध्यान रखना भी जरूरी माना जाता है. ऐसे में जानिए कन्या पूजन करते समय किन नियमों का ध्यान रखना चाहिए.
जौ नवरात्र के दौरान बोए जाने वाले जौ के अंकुर होते हैं, जिन्हें देवी आराधना और शुभता का प्रतीक माना जाता है. सामान्यतः इन्हें मिट्टी के पात्र या पूजा स्थल पर बोया जाता है. लेकिन झांसी में एक महिला ने गांव की खुशहाली के लिए अपने शरीर पर ही जौ बौने का संकल्प लिया है.
Sandhi Puja 2026: महाष्टमी और महानवमी के बीच संधि पूजा का विशेष महत्व है. जानें संधि पूजा की तारीख, 48 मिनट का शुभ मुहूर्त, मां चामुंडा की पूजा विधि, 108 दीपक जलाने का महत्व और इससे जुड़ी धार्मिक मान्यताएं.
Kanya Pujan 2026 Shubh Muhurat: इस साल शारदीय नवरात्र में कन्या पूजन की तारीख को लेकर लोगों के मन में सवाल हैं. ऐसे में अगर आप भी कन्या पूजन की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए सही तारीख, शुभ मुहूर्त, पूजा की आसान विधि और जरूरी सामग्री.
सूर्य ने तुला राशि मे गोचर कर लिया है. इस राशि में रहकर सूर्य की सीधी दृष्टि कुंभ राशि में विराजमान राहु पर पड़ेगी. साथ ही, मीन राशि में बैठे शनि के साथ उनका षडाष्टक योग भी बनेगा. ज्योतिषविदों ने शनि-सूर्य के बीच बने षडाष्टक योग को कुछ राशियों के लिए शुभ बताया है.
Mangal Gochar November 2026: नवंबर 2026 में मंगल सिंह राशि में गोचर करेंगे. ज्योतिष के अनुसार, मेष, सिंह समेत 4 राशियों को धन लाभ, करियर में तरक्की और कारोबार में नए अवसर मिल सकते हैं. जानें मंगल गोचर की तारीख और किन राशियों को होगा फायदा.
Maa Mahagauri Vrat Katha: इस साल सप्तमी तिथि दो दिन पड़ने के कारण नवरात्र के आठवें दिन मां कालरात्रि की पूजा की जाएगी, जबकि 19 अक्टूबर को मां महागौरी की आराधना होगी. मान्यता है कि दुर्गाष्टमी पर इस व्रत कथा का पाठ करने से जीवन में सुख-शांति और खुशहाली आती है.
Navratri 2026 Ashtami: आज 18 अक्टूबर या कल 19 अक्टूबर को करें अष्टमी की पूजा? जानें कन्या पूजन, व्रत पारण का समय, मां महागौरी की पूजा विधि और महानवमी की तारीख.
Hastrekha Shastra: हस्तरेखा शास्त्र में विवाह रेखा को शादी और वैवाहिक जीवन से जोड़कर देखा जाता है. मान्यता है कि इस रेखा से शादी की उम्र और वैवाहिक जीवन के बारे में पता चलता है.
Maha Ashtami 2026: कल महाष्टमी पर कब करें कन्या पूजन? जानें 19 अक्टूबर 2026 को महाष्टमी की सही तारीख, कन्या पूजन का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महानवमी से जुड़ी जरूरी जानकारी.
शारदीय नवरात्र की महाष्टमी पर गुरु और चंद्रमा के बीच समसप्तक योग बनने की ज्योतिषीय चर्चा है. मान्यताओं के अनुसार, इस योग का मेष, सिंह और धनु राशि के जातकों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है. इन राशियों को करियर में आगे बढ़ने, नई जिम्मेदारियां मिलने और आर्थिक स्थिति सुधारने के अवसर मिल सकते हैं. हालांकि, ये ज्योतिषीय अनुमान हैं, सफलता के लिए मेहनत, धैर्य और समझदारी से फैसले लेना जरूरी है.
Aaj 18 October 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): 18 अक्टूबर 2026, दिन- रविवार, आश्विन मास, शुक्ल पक्ष, सप्तमी तिथि सुबह 08.27 बजे तक फिर अष्टमी तिथि, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र दोपहर 12.49 बजे तक फिर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, चंद्रमा- धनु में रात 19.33 बजे तक फिर मकर में, सूर्य- तुला में, अभिजित मुहूर्त- सुबह 11.43 बजे से दोपहर 12.29 बजे तक, राहुकाल- दोपहर 16.23 बजे से शाम 17.49 बजे तक, दिशा शूल- पश्चिम.
Aaj 18 October 2026 का पंचांग (Aaj ka Panchang): आज का पंचांग