देश की संसद में एक बार फिर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े बेहद अहम संविधान संशोधन विधेयकों को पारित कराने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है. इसी सरगर्मी के बीच शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने शुक्रवार को संसद भवन परिसर स्थित कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से एक अहम मुलाकात की.
आधिकारिक तौर पर इस मुलाकात को महाराष्ट्र के विकास कार्यों और बारिश से जुड़ी स्थितियों पर चर्चा बताया गया है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसे संसद में जरूरी आंकड़ों को साधने की एक बड़ी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.
सरकार की पूरी कोशिश है कि इस सत्र के दौरान इन ऐतिहासिक विधेयकों को पारित करा लिया जाए, जिसके लिए तमाम दलों के साथ बातचीत का दौर शुरू हो चुका है.
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बिल पास कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरुरत
गौरतलब है संविधान संशोधन से जुड़े इन विधेयकों को पास कराने के लिए संसद में दो-तिहाई बहुमत की जरुरत होती है, जो मौजूदा सदन के गणित में एक बड़ी चुनौती है. चार महीने पहले जब यह बिल लोकसभा में लाया गया था, तब यह जरूरी दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से पीछे रह गया था.
उस दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि 230 सदस्यों ने इसका विरोध किया था. संख्या बल पूरा न होने के कारण बिल पास नहीं हो सका था.
हाल ही में शिवसेना UBT के 6 सांसद एकनाथ शिंदे गुट में शामिल हो गए हैं, जिससे लोकसभा में शिंदे की पार्टी की ताकत बढ़कर 13 हो गई है. इसके साथ ही लोकसभा में एनडीए की कुल संख्या बल बढ़कर 299 पहुंच गई है. सरकार अन्य क्षेत्रीय दलों के समर्थन से इस आंकड़े को मजबूत करने में जुटी है.
2029 के लिए महिलाओं को 33% आरक्षण का लक्ष्य
इस पूरी कवायद का मुख्य मकसद देश की विधायिकाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को साल 2029 के चुनावों से प्रभावी ढंग से लागू करना है. इसके साथ ही, लोकसभा सीटों के परिसीमन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाकर सदन की कुल संख्या को 816 तक ले जाने की योजना है.
सरकार का मानना है कि परिसीमन एक जरूरी लोकतांत्रिक प्रक्रिया है, जिससे हर नागरिक को संसद में निष्पक्ष प्रतिनिधित्व मिल सकेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस सिलसिले में एनडीए सहयोगियों और शिंदे गुट के नवनिर्वाचित सांसदों के साथ चाय पर चर्चा की और उनके क्षेत्रों के विकास कार्यों पर बातचीत की.
विपक्ष पर बरसे एकनाथ शिंदे
प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद एकनाथ शिंदे ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि वे इस अहम राष्ट्रीय कानून को पास कराने में मदद करें. उन्होंने कहा कि संसद को राजनीतिक प्राथमिकताओं के चलते बंधक नहीं बनाया जाना चाहिए.
इसके साथ ही उन्होंने कांग्रेस और विपक्षी दलों पर संसद को लगातार बाधित करने का आरोप लगाया. गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग को पूरी तरह से राजनीतिक करार दिया.
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दूसरी ओर, विपक्षी दल भी सरकार की रणनीतियों पर नजर बनाए हुए हैं. कांग्रेस पार्टी ने अपने लोकसभा और राज्यसभा के सभी सांसदों के लिए व्हिप जारी कर उन्हें 10, 11 और 12 अगस्त को सदन में अनिवार्य रूप से मौजूद रहने को कहा है. साथ ही 'इंडिया' गठबंधन के साथियों को भी अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित करने को कहा गया है.
आगामी सप्ताह में संसद में महिला आरक्षण, परिसीमन और विवादास्पद विदेशी अंशदान (FCRA) संशोधन विधेयक को लेकर बड़ा राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है. संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू सदन के सुचारू संचालन के लिए विपक्ष के लगातार संपर्क में हैं.